बिहार के छोटे से कस्बे खगड़िया के रहने वाले वात्सल्य के घर की हालत ऐसी नहीं थी कि महंगी पढ़ाई कर सकें। ग्रिल और शटर बनाने का काम करने वाले पिता चंद्रकांत सिंह की कमाई इतनी ज्यादा नहीं थी कि बड़े सपने देख सकें। लेकिन, उनका सपना था कि बेटा वात्सल्य पढ़-लिखकर मुकाम हासिल करे।
मदद की आस में आ गए कोटा...
12 वीं के बाद वात्सल्य का सपना था कि आईआईटी में एडमिशन लें। लेकिन, एडमिशन के लिए महंगी कोचिंग में पढ़ना उनके बूते के बाहर था। मदद की आस में वात्सल्य कोटा आ गए। यहां किसी तरह एक कोचिंग के निदेशक से मिले तो उन्होंने उसका जज्बा देखते हुए उसे फ्री क्लास अटेंड करने की इजाजत दे दी। हॉस्टल की व्यवस्था भी फ्री कर दी। वात्सल्य भी माता-पिता और कोचिंग निदेशक के भरोसे पर खरे उतरे और दूसरे प्रयास में जेईई-2012 में 382वीं रैंक हासिल करके आईआईटी खड़गपुर में एडमिशन लिया।
कठिन परिस्थितियों में भी मेहनत और धैर्य की सच्ची दास्तां यहीं खत्म नहीं हुई। आईआईटी में भी पढ़ाई के जज्बे को कायम रखा। समर्पण और अनुशासन का नतीजा निकला कि अमेरिका की प्रमुख माइक्रोसाफ्ट रेडमंड कंपनी ने उनको 1.20 करोड़ रुपए का ऑफर दिया। आईआईटी में कैंपस प्लेसमेंट 1 से 20 दिसंबर के बीच हुआ था। अब जून-2016 में वो बीटेक पूरी करके अमेरिका की कंपनी से जुड़ेगा।
बीमारी से लड़कर दिया जेईई का पेपर
आईआईटी जेईई से 4 दिन पहले वात्सल्य की तबीयत खराब हो गई थी। इसके बावजूद तेज गर्मी में सिर धोकर पेपर देने पहुंच गए। पेपर आसान जरूर था, लेकिन बीमारी के चलते पेपर थोड़ा बिगड़ गया था। फिर हिम्मत जुटाई और दूसरा पेपर ज्यादा मुश्किल होने के बावजूद अधिक स्कोर किया। पढ़ने के जुनून के कारण ही वो स्टेट टॉपर रहे। भारतीय सांख्यिकी संस्थान और आईआईएसई में भी क्वालिफाई किया। रिसर्च की चाहत के कारण उन्होंने आईआईटी को चुना।
आईआईटियंस के साथ मिलकर खोलेंगे स्कूल
कोटा कोचिंग ने जो मदद वात्सल्य की थी, उसी जज्बे के साथ अब वे भी गरीब छात्रों को पढ़ाते हैं। आईआईटी में भी वे ऑटो चालकों को निशुल्क पढ़ाते हैं। वे अपने दोस्तों के साथ मिलकर अपने कस्बे में एक मॉडल स्कूल खोलने पर काम भी कर रहे हैं। इसमें आईआईटी छात्र 4 माह की छुट्टियों में जाकर पढ़ाएंगे। बाकी समय अन्य टीचर्स शिक्षा देंगे। वे बिहार में नक्सल प्रभावित क्षेत्र के बच्चों को शिक्षा से जाेड़ना चाहते हैं।
इनोवेशन: रिंग के जरिए इंटरनेट एक्सेस
अपने बैचमेट के साथ वात्सल्य ने एक इनोवेशन भी किया है। उन्होंने एक मिनी स्मार्ट डिवाइस बनाई है, जिसे हाथ की रिंग में लगाकर इंटरनेट एक्सेस किया जा सकता है। रिसर्च में रुचि होने के कारण वे एडवांस्ड टेक्नोलॉजी पर आधारित इनोवेटिव प्रोजेक्ट करना चाहते हैं।
मदद की आस में आ गए कोटा...
12 वीं के बाद वात्सल्य का सपना था कि आईआईटी में एडमिशन लें। लेकिन, एडमिशन के लिए महंगी कोचिंग में पढ़ना उनके बूते के बाहर था। मदद की आस में वात्सल्य कोटा आ गए। यहां किसी तरह एक कोचिंग के निदेशक से मिले तो उन्होंने उसका जज्बा देखते हुए उसे फ्री क्लास अटेंड करने की इजाजत दे दी। हॉस्टल की व्यवस्था भी फ्री कर दी। वात्सल्य भी माता-पिता और कोचिंग निदेशक के भरोसे पर खरे उतरे और दूसरे प्रयास में जेईई-2012 में 382वीं रैंक हासिल करके आईआईटी खड़गपुर में एडमिशन लिया।
कठिन परिस्थितियों में भी मेहनत और धैर्य की सच्ची दास्तां यहीं खत्म नहीं हुई। आईआईटी में भी पढ़ाई के जज्बे को कायम रखा। समर्पण और अनुशासन का नतीजा निकला कि अमेरिका की प्रमुख माइक्रोसाफ्ट रेडमंड कंपनी ने उनको 1.20 करोड़ रुपए का ऑफर दिया। आईआईटी में कैंपस प्लेसमेंट 1 से 20 दिसंबर के बीच हुआ था। अब जून-2016 में वो बीटेक पूरी करके अमेरिका की कंपनी से जुड़ेगा।
बीमारी से लड़कर दिया जेईई का पेपर
आईआईटी जेईई से 4 दिन पहले वात्सल्य की तबीयत खराब हो गई थी। इसके बावजूद तेज गर्मी में सिर धोकर पेपर देने पहुंच गए। पेपर आसान जरूर था, लेकिन बीमारी के चलते पेपर थोड़ा बिगड़ गया था। फिर हिम्मत जुटाई और दूसरा पेपर ज्यादा मुश्किल होने के बावजूद अधिक स्कोर किया। पढ़ने के जुनून के कारण ही वो स्टेट टॉपर रहे। भारतीय सांख्यिकी संस्थान और आईआईएसई में भी क्वालिफाई किया। रिसर्च की चाहत के कारण उन्होंने आईआईटी को चुना।
आईआईटियंस के साथ मिलकर खोलेंगे स्कूल
कोटा कोचिंग ने जो मदद वात्सल्य की थी, उसी जज्बे के साथ अब वे भी गरीब छात्रों को पढ़ाते हैं। आईआईटी में भी वे ऑटो चालकों को निशुल्क पढ़ाते हैं। वे अपने दोस्तों के साथ मिलकर अपने कस्बे में एक मॉडल स्कूल खोलने पर काम भी कर रहे हैं। इसमें आईआईटी छात्र 4 माह की छुट्टियों में जाकर पढ़ाएंगे। बाकी समय अन्य टीचर्स शिक्षा देंगे। वे बिहार में नक्सल प्रभावित क्षेत्र के बच्चों को शिक्षा से जाेड़ना चाहते हैं।
इनोवेशन: रिंग के जरिए इंटरनेट एक्सेस
अपने बैचमेट के साथ वात्सल्य ने एक इनोवेशन भी किया है। उन्होंने एक मिनी स्मार्ट डिवाइस बनाई है, जिसे हाथ की रिंग में लगाकर इंटरनेट एक्सेस किया जा सकता है। रिसर्च में रुचि होने के कारण वे एडवांस्ड टेक्नोलॉजी पर आधारित इनोवेटिव प्रोजेक्ट करना चाहते हैं।
Job
Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai