उद्योग मंत्रालय ने मांगा आईएल के 1-1 कर्मचारी का हिसाब

उद्योग मंत्रालय ने मांगा आईएल के 1-1 कर्मचारी का हिसाब

उद्योग मंत्रालय ने मांगा आईएल के 1-1 कर्मचारी का हिसाब

राज्य के सांसदों द्वारा प्रधानमंत्री और स्थानीय विधायकों द्वारा मुख्यमंत्री तक मामला पहुंचाने के बाद भी आईएल (इंस्ट्रूमेंटेशन लिमिटेड) को लेकर केंद्र सरकार की मंशा सकारात्मक नहीं दिख रही। हाल में केंद्रीय भारी उद्योग एवं लोक उद्यम मंत्रालय ने आईएल प्रबंधन से कुछ ऐसी जानकारियां और मांगी हैं, जो कंपनी को बंद करने की तैयारी का हिस्सा बताई जा रही हैं। सूत्रों ने बताया कि मंत्रालय ने अब एक-एक कार्यरत कर्मचारी व रिटायर्ड कर्मचारी की व्यक्तिगत लाइबिलिटी का ब्यौरा प्रबंधन से मांगा है, इसमें देनदारियों का हिसाब जून, 2016 के हिसाब से जोड़कर भेजने को कहा गया है।
अगले माह तक आईएल पर निर्णय संभव
प्रबंधन ने पिछले दिनों यह सारा ब्यौरा भी भेज दिया गया है। इससे माना जा रहा है कि वन टाइम सेटलमेंट के तौर पर सरकार सभी कर्मचारियों को वीआर (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति) देगी। पूरा ब्यौरा जून, 2016 के हिसाब से मांगा गया है, ऐसे में अगले माह तक आईएल पर कोई बड़ा निर्णय संभव है। प्रबंधन के मुताबिक, मार्च, 2016 की स्थिति के हिसाब से आईएल कोटा यूनिट में 159 ऑफिसर, 289 सुपरवाइजर व 108 वर्क मैन श्रेणी के स्थायी कार्मिक हैं। कुल कार्मिकों की संख्या 556 है। अलबत्ता मार्च के बाद भी कुछ कर्मचारी रिटायर हुए हैं, ऐसे में इनकी संख्या अब 500 तक है। इन सभी की लाइबिलिटी का ब्यौरा भेजा गया है। वहीं रिटायर हो चुके उन सभी कर्मचारियों की भी सूचना भेजी है, जिनका पीएफ व सैलेरी समेत अन्य भत्तों का पैसा बकाया है। मार्च, 2016 के हिसाब से कर्मचारियों की लाइबिलिटी करीब 346.73 करोड़ रुपए आंकी गई है।

आईएल फैक्ट्री चालू रहनी चाहिए और इसके लिए हम प्रयास भी कर रहे हैं। पिछले दिनों प्रधानमंत्री से मिले थे। तो उन्होंने पॉजीटिव देखने का आश्वासन दिया था। अगर हिसाब तैयार किया जा रहा है तो फिर से प्रधानमंत्री से मिलकर बात करेंगे।
- ओम बिरला, सांसद
सीएम से पीएम तक सारे प्रयास बेअसर
आईएल को लेकर स्थानीय विधायकों ने राज्य के उद्योग मंत्री से भेंट की और सभी विधायकों ने सीएम को पत्र लिखे। वहीं सांसद ओम बिरला समेत राज्य के 5 सांसदों ने दिल्ली में पीएम के प्रधान सचिव से मुलाकात की थी। उन्हें सारी स्थिति से अवगत कराया गया था और बताया गया था कि यह उद्योग कैसे पुनर्जीवित किया जा सकता है। खुद प्रबंधन द्वारा दिया गया प्लान सांसदों ने उनको सौंपा था। लेकिन हैरानी इस बात की है कि इसके बावजूद सरकार ने आईएल को चालू रखने के संबंध में प्रबंधन से आज तक कोई सवाल नहीं किया, बल्कि क्लोजर संबंधी सूचनाएं अपडेट मांगी जा रही हैं।

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  1. Visitor Photo
    By : Nikky

    Sahi kaha

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