यूआईटी ने स्क्रैप एंड टिंबर मार्केट में सालों से जमे अतिक्रमियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। सुबह 6 बजे शुरू हुई कार्रवाई के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों के साथ 5 जेसीबी, 100 से अधिक पुलिस और यूआईटी के जवानों का जाब्ता रहा। इस दौरान 17 भूखंडों व पार्क की जमीन पर बने सभी मकान ढहा दिए।
अतिक्रमियों ने कार्रवाई का विरोध करते हुए पथराव भी किया। इससे एक जेसीबी और जीप का कांच टूट गया। कार्रवाई के दौरान ही पुनर्वास की मांग लेकर यूआईटी पहुंचे लोगों को पुलिस ने लाठियां फटकार कर खदेड़ दिया। इस कार्रवाई से आवंटियों को काफी राहत मिली है।
यूआईटी की टीम गुरुवार सुबह 6 बजे सचिव डॉ. मोहनलाल यादव, उपसचिव मानसिंह मीणा, दिप्ती रामचंद्र मीणा, मुरलीधर प्रतिहार व पुलिस उपाधीक्षक के नेतृत्व में टीम मौके पर पहुंची। यहां जेसीबी से करीब 17 भूखंडों व पार्क की जमीन पर बने सभी मकानों को तोड़ दिया गया। विरोध करने वालों को पुलिस ने मौके से दूर कर दिया और अतिक्रमण स्थल पर आने-जाने वाले रास्तों को बंद कर दिया, ताकि कोई विरोध करने वहां नहीं पहुंच सके। इस मार्केट के अलावा गुमानपुरा से यहां आने वाले मार्ग पर बने मकानों व रास्ते में बने अवरोधों को भी तोड़ दिया गया। सुबह 11 बजे तक चली कार्रवाई में पांच जेसीबी, एक सौ से अधिक पुलिस जवान और यूआईटी के जवान तैनात रहे।
यूआईटी पहुंचे तो पुलिस ने खदेड़ा
कार्रवाई के दौरान ही कांग्रेस के प्रदेश महासचिव पंकज मेहता वहां पहुंचे और उजाड़े गए लोगों के पुनर्वास की मांग करने लगे। तब उन्हें यूआईटी आने के लिए कहा गया। वे लोगों के साथ यूआईटी पहुंचे तो पुलिस ने उनके साथ पहुंचे लोगों को बाहर ही रोक दिया। मेहता व उनके कुछ साथी सचिव से बात करने ऑफिस में गए तो बाहर लोग हंगामा करने लगे। इस पर पुलिस ने लोगों को वहां से डंडे के बल पर खदेड़ दिया। पंकज मेहता की मांग पर सचिव ने एक कमेटी बनाकर सर्वे कराने व उनका प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजने की बात कही।
टीम पर फेंके पत्थर
अतिक्रमण विरोधी टीम लौट रही थी, तभी पंकज मेहता के नेतृत्व में यूआईटी की ओर से रवाना हुए लोगों में से किसी ने पत्थर फेंके, जिससे एक जेसीबी और जीप का कांच टूट गया।
1982 में बनी थी योजना
स्क्रैप एंड टिंबर मार्केट के लिए यहां भूखंड देने की कॅमर्शियल योजना 1982 में बनी थी। तब 206 आवंटियों के लिए तीन रुपए फीट में भूखंड आवंटित किए गए। उस समय जो रह गए, उनके लिए 1996-97 में दुबारा से लाटरी निकाली गई। इसमें करीब 26 व्यापारी ऐसे बचे जिन्होंने आवंटन के बावजूद पैसे जमा नहीं करवाए। 2012 में इनमें से 12 जनों ने तत्कालीन नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल से मिलकर नियमन के आदेश करवा लिए। जब उन्हें 750 रुपए वर्गफीट में जमीन का पैसा जमा करने के आदेश हुए। उन सभी ने पैसा जमा करवा लिया, लेकिन जब मौके पर देखा तो वहां अतिक्रमण हो रहा था। उन्होंने इसे हटाने के लिए लगातार यूआईटी के चक्कर लगाने के साथ ही पत्र देने जारी रखे।
पैसा जमा न होने पर 14 भूखंड निरस्त
यहां पर पैसा जमा नहीं कराने के कारण 14 व्यापारियों के भूखंड निरस्त हो गए। इन सभी भूखंडों पर करीब 17 लोगों ने अतिक्रमण करके वहां पक्का निर्माण करवा लिया। जिसे खाली करने में यूआईटी प्रशासन को पसीना आ रहा था।
जूते घिस गए, अब आई खुशी
स्क्रैप एंड टिंबर मार्केट एसोसिएशन के पदाधिकारी अशोक जैन, आवंटी गोपीचंद मलिक ने यूआईटी की कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि अपने भूखंडों<के लिए यूआईटी के चक्कर लगाते हुए उनके जूते तक घिस गए। अब उन्हें अपने भूखंड मिलने की उम्मीद बंधी है। अतिक्रमण तो तोड़ दिए, अब वहां से मलबा हटा दिया जाए तो वे कब्जा करके अपनी दुकान बनाएंगे।
भूखंडों पर देंगे कब्जा
यूआईटी सचिव डॉक्टर मोहनलाल यादव ने बताया कि स्क्रैप एंड टिंबर मार्केट की इस योजना में करीब 25 लोगों के अतिक्रमण हटाए गए हैं। उन्होंने आवंटित भूखंडों के अलावा पार्क तक पर कब्जा करके निर्माण कर लिया था। इन भूखंडों का कब्जा संबंधित आवंटी को दिया जाएगा।
अतिक्रमियों ने कार्रवाई का विरोध करते हुए पथराव भी किया। इससे एक जेसीबी और जीप का कांच टूट गया। कार्रवाई के दौरान ही पुनर्वास की मांग लेकर यूआईटी पहुंचे लोगों को पुलिस ने लाठियां फटकार कर खदेड़ दिया। इस कार्रवाई से आवंटियों को काफी राहत मिली है।
यूआईटी की टीम गुरुवार सुबह 6 बजे सचिव डॉ. मोहनलाल यादव, उपसचिव मानसिंह मीणा, दिप्ती रामचंद्र मीणा, मुरलीधर प्रतिहार व पुलिस उपाधीक्षक के नेतृत्व में टीम मौके पर पहुंची। यहां जेसीबी से करीब 17 भूखंडों व पार्क की जमीन पर बने सभी मकानों को तोड़ दिया गया। विरोध करने वालों को पुलिस ने मौके से दूर कर दिया और अतिक्रमण स्थल पर आने-जाने वाले रास्तों को बंद कर दिया, ताकि कोई विरोध करने वहां नहीं पहुंच सके। इस मार्केट के अलावा गुमानपुरा से यहां आने वाले मार्ग पर बने मकानों व रास्ते में बने अवरोधों को भी तोड़ दिया गया। सुबह 11 बजे तक चली कार्रवाई में पांच जेसीबी, एक सौ से अधिक पुलिस जवान और यूआईटी के जवान तैनात रहे।
यूआईटी पहुंचे तो पुलिस ने खदेड़ा
कार्रवाई के दौरान ही कांग्रेस के प्रदेश महासचिव पंकज मेहता वहां पहुंचे और उजाड़े गए लोगों के पुनर्वास की मांग करने लगे। तब उन्हें यूआईटी आने के लिए कहा गया। वे लोगों के साथ यूआईटी पहुंचे तो पुलिस ने उनके साथ पहुंचे लोगों को बाहर ही रोक दिया। मेहता व उनके कुछ साथी सचिव से बात करने ऑफिस में गए तो बाहर लोग हंगामा करने लगे। इस पर पुलिस ने लोगों को वहां से डंडे के बल पर खदेड़ दिया। पंकज मेहता की मांग पर सचिव ने एक कमेटी बनाकर सर्वे कराने व उनका प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजने की बात कही।
टीम पर फेंके पत्थर
अतिक्रमण विरोधी टीम लौट रही थी, तभी पंकज मेहता के नेतृत्व में यूआईटी की ओर से रवाना हुए लोगों में से किसी ने पत्थर फेंके, जिससे एक जेसीबी और जीप का कांच टूट गया।
1982 में बनी थी योजना
स्क्रैप एंड टिंबर मार्केट के लिए यहां भूखंड देने की कॅमर्शियल योजना 1982 में बनी थी। तब 206 आवंटियों के लिए तीन रुपए फीट में भूखंड आवंटित किए गए। उस समय जो रह गए, उनके लिए 1996-97 में दुबारा से लाटरी निकाली गई। इसमें करीब 26 व्यापारी ऐसे बचे जिन्होंने आवंटन के बावजूद पैसे जमा नहीं करवाए। 2012 में इनमें से 12 जनों ने तत्कालीन नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल से मिलकर नियमन के आदेश करवा लिए। जब उन्हें 750 रुपए वर्गफीट में जमीन का पैसा जमा करने के आदेश हुए। उन सभी ने पैसा जमा करवा लिया, लेकिन जब मौके पर देखा तो वहां अतिक्रमण हो रहा था। उन्होंने इसे हटाने के लिए लगातार यूआईटी के चक्कर लगाने के साथ ही पत्र देने जारी रखे।
पैसा जमा न होने पर 14 भूखंड निरस्त
यहां पर पैसा जमा नहीं कराने के कारण 14 व्यापारियों के भूखंड निरस्त हो गए। इन सभी भूखंडों पर करीब 17 लोगों ने अतिक्रमण करके वहां पक्का निर्माण करवा लिया। जिसे खाली करने में यूआईटी प्रशासन को पसीना आ रहा था।
जूते घिस गए, अब आई खुशी
स्क्रैप एंड टिंबर मार्केट एसोसिएशन के पदाधिकारी अशोक जैन, आवंटी गोपीचंद मलिक ने यूआईटी की कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि अपने भूखंडों<के लिए यूआईटी के चक्कर लगाते हुए उनके जूते तक घिस गए। अब उन्हें अपने भूखंड मिलने की उम्मीद बंधी है। अतिक्रमण तो तोड़ दिए, अब वहां से मलबा हटा दिया जाए तो वे कब्जा करके अपनी दुकान बनाएंगे।
भूखंडों पर देंगे कब्जा
यूआईटी सचिव डॉक्टर मोहनलाल यादव ने बताया कि स्क्रैप एंड टिंबर मार्केट की इस योजना में करीब 25 लोगों के अतिक्रमण हटाए गए हैं। उन्होंने आवंटित भूखंडों के अलावा पार्क तक पर कब्जा करके निर्माण कर लिया था। इन भूखंडों का कब्जा संबंधित आवंटी को दिया जाएगा।
Job
Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai