कोचिंग सिटी कोटा में सुसाइड का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार सुबह फिर एक काेचिंग छात्रा ने पांचवीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली। छात्रा ने जेईई मेन्स का रिजल्ट आने के दूसरे दिन सुसाइड किया। सुसाइड नोट के आधार पर पुलिस भी सुसाइड की वजह उम्मीद से कम नंबर आने को मान रही है। इधर, पुलिस ने छात्रा का पोस्टमार्टम करवाकर शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया है। गौरतलब है कि 11 दिन पहले भी एक कोचिंग छात्रा ने हाथों की नस काटकर पांचवीं मंजिल से कूदकर जान दी थी।
जवाहर नगर सीआई हरीश भारती ने बताया कि गाजियाबाद निवासी छात्रा कृति (17) पुत्री अंशुमान त्रिपाठी पिछले 2 सालों से इंद्रविहार स्थित आशीर्वाद अपार्टमेंट के फ्लैट में रहकर कोचिंग कर रही थी। वो यहां आईआईटी की तैयारी कर रही थी। उसके साथ उसकी मां भी रहती थी। कुछ दिन पहले ही मां गाजियाबाद गई थी तो उसके पिता कोटा आए थे। गुरुवार सुबह पिता जिम गए तो कृति अपार्टमेंट की 5वीं मंजिल से कूद गई। पड़ोसियों ने देखा तो उसकी मां को फोन किया। पड़ोसी ही कृति को तलवंडी क निजी अस्पताल में लेकर गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
जेईई मेन्स में थे 142 नंबर
कोचिंग संस्थान के मुताबिक कृति पढ़ाई में अच्छी थी। वो रोजाना कोचिंग आने के साथ-साथ समय पर सारा काम करती थी। उसके जेईई मेन्स में भी 142 नंबर आए थे। जेईई मेन्स में जनरल की कटऑफ 100 है। यानी उसने एडवांस एग्जाम के लिए क्वालिफाई कर लिया था।
सुसाइड की वजह पर सवाल
सीआई हरीश भारती ने बताया कि कृति अपने नंबरों से संतुष्ट नहीं थी। इस बात का जिक्र उसने सुसाइड नोट में भी किया है। हालांकि कृति के जेईई मेन्स में अच्छे नंबर आए थे। इस वजह से पढ़ाई में तनाव के तर्क पर भी सवाल उठ रहे हैं। उसके पिता भी ऐसी कोई वजह नहीं बता सके।
रिजर्व नेचर की थी कृति: पिता
कृति के पिता अंशुमान ने बताया कि कृति रिजर्व नेचर की थी। वो मोबाइल भी पुराना ही यूज करती थी। एएसआई अवधेश ने बताया कि अंशुमान का कहना है कि वो साइंटिस्ट बनना चाहती थी और इसरो में जाना उसका लक्ष्य था। अंशुमान सिर्फ 15 दिन पहले ही कोटा उसके पास रहने आए थे। इसके पहले कृति के पास उसकी मां रहती थी। कृति ने सुसाइड क्यों किया इसके बारे में तो पिता भी कुछ खास नहीं बता सके।
142 अंकों पर मिल जाता अच्छा कॉलेज: छात्रा ने जेईई मेन्स में 142 अंक हासिल किए थे। कॅरियर काउंसलर्स के मुताबिक इतने अंक हासिल करने वाले स्टूडेंट्स बोर्ड में भी 75 प्रतिशत अंक लाने की तो योग्यता रखते हैं। इस छात्रा के 142 अंक और बोर्ड के 75 अंकों के वेटेज काे मिलाकर जो रैंक आती, उसके आधार पर उसको अच्छा इंजीनियरिंग कॉलेज मिल जाता। एनआईटी श्रीनगर, जमशेदपुर, अगरतला और रायपुर में कोई न कोई ब्रांच जरूर मिल जाती। ऐसे भी मामले सामने आए हैं जब बच्चों ने मात्र मेन्स का कटऑफ क्रॉस करके ही जेईई एडवांस क्रैक कर आईआईटी में दाखिला लिया है।
सुसाइड का विचार आए तो अपने प्रियजनों के बारे में जरूर सोचें
वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. एमएल अग्रवाल का कहना है कि सुसाइड का विचार मन में आए या तनाव में हों तो जिसे आप सबसे ज्यादा चाहते उनको याद करते हुए सोचें कि आपके जाने के बाद उनका क्या होगा? कुछ देर लंबी सांस लेकर छोड़ें और मन में सोचें कि हर अंधेरी रात के बाद उजियाली सुबह आती है। आप सुसाइड करने जा रहे हो तो प्लीज, एक बार होप सोसायटी के नंबर 0744-2333666 पर कॉल करें।
जवाहर नगर सीआई हरीश भारती ने बताया कि गाजियाबाद निवासी छात्रा कृति (17) पुत्री अंशुमान त्रिपाठी पिछले 2 सालों से इंद्रविहार स्थित आशीर्वाद अपार्टमेंट के फ्लैट में रहकर कोचिंग कर रही थी। वो यहां आईआईटी की तैयारी कर रही थी। उसके साथ उसकी मां भी रहती थी। कुछ दिन पहले ही मां गाजियाबाद गई थी तो उसके पिता कोटा आए थे। गुरुवार सुबह पिता जिम गए तो कृति अपार्टमेंट की 5वीं मंजिल से कूद गई। पड़ोसियों ने देखा तो उसकी मां को फोन किया। पड़ोसी ही कृति को तलवंडी क निजी अस्पताल में लेकर गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
जेईई मेन्स में थे 142 नंबर
कोचिंग संस्थान के मुताबिक कृति पढ़ाई में अच्छी थी। वो रोजाना कोचिंग आने के साथ-साथ समय पर सारा काम करती थी। उसके जेईई मेन्स में भी 142 नंबर आए थे। जेईई मेन्स में जनरल की कटऑफ 100 है। यानी उसने एडवांस एग्जाम के लिए क्वालिफाई कर लिया था।
सुसाइड की वजह पर सवाल
सीआई हरीश भारती ने बताया कि कृति अपने नंबरों से संतुष्ट नहीं थी। इस बात का जिक्र उसने सुसाइड नोट में भी किया है। हालांकि कृति के जेईई मेन्स में अच्छे नंबर आए थे। इस वजह से पढ़ाई में तनाव के तर्क पर भी सवाल उठ रहे हैं। उसके पिता भी ऐसी कोई वजह नहीं बता सके।
रिजर्व नेचर की थी कृति: पिता
कृति के पिता अंशुमान ने बताया कि कृति रिजर्व नेचर की थी। वो मोबाइल भी पुराना ही यूज करती थी। एएसआई अवधेश ने बताया कि अंशुमान का कहना है कि वो साइंटिस्ट बनना चाहती थी और इसरो में जाना उसका लक्ष्य था। अंशुमान सिर्फ 15 दिन पहले ही कोटा उसके पास रहने आए थे। इसके पहले कृति के पास उसकी मां रहती थी। कृति ने सुसाइड क्यों किया इसके बारे में तो पिता भी कुछ खास नहीं बता सके।
142 अंकों पर मिल जाता अच्छा कॉलेज: छात्रा ने जेईई मेन्स में 142 अंक हासिल किए थे। कॅरियर काउंसलर्स के मुताबिक इतने अंक हासिल करने वाले स्टूडेंट्स बोर्ड में भी 75 प्रतिशत अंक लाने की तो योग्यता रखते हैं। इस छात्रा के 142 अंक और बोर्ड के 75 अंकों के वेटेज काे मिलाकर जो रैंक आती, उसके आधार पर उसको अच्छा इंजीनियरिंग कॉलेज मिल जाता। एनआईटी श्रीनगर, जमशेदपुर, अगरतला और रायपुर में कोई न कोई ब्रांच जरूर मिल जाती। ऐसे भी मामले सामने आए हैं जब बच्चों ने मात्र मेन्स का कटऑफ क्रॉस करके ही जेईई एडवांस क्रैक कर आईआईटी में दाखिला लिया है।
सुसाइड का विचार आए तो अपने प्रियजनों के बारे में जरूर सोचें
वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. एमएल अग्रवाल का कहना है कि सुसाइड का विचार मन में आए या तनाव में हों तो जिसे आप सबसे ज्यादा चाहते उनको याद करते हुए सोचें कि आपके जाने के बाद उनका क्या होगा? कुछ देर लंबी सांस लेकर छोड़ें और मन में सोचें कि हर अंधेरी रात के बाद उजियाली सुबह आती है। आप सुसाइड करने जा रहे हो तो प्लीज, एक बार होप सोसायटी के नंबर 0744-2333666 पर कॉल करें।
Job
Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai