ईविंग सारकोमा कैंसर पीड़ित की जांघ का सफल ऑपरेशन

ईविंग सारकोमा कैंसर पीड़ित की जांघ का सफल ऑपरेशन

ईविंग सारकोमा कैंसर पीड़ित की जांघ का सफल ऑपरेशन

मेडिकल कॉलेज से जुड़े नए अस्पताल में एक युवक की कैंसर ग्रस्त जांघ की हड्डी का सफल ऑपरेशन किया गया। ईविंग सारकोमा नाम का ये कैंसर एक मिलियन व्यक्तियों में से एक को होता है। अटरू तहसील के करवालिया वासी पवन (21) का छोट उम्र में ही विवाह अहमदाबाद हो गया था। लेकिन उसका गौना नहीं हुआ था। पवन परिवार के सदस्यों से रूठकर अपने ससुराल चला गया था।
अंधविश्वास में फंसा था युवक
वहां डेढ़ साल पहले जांघ की हड्डी में परेशानी होने लगी। डॉक्टर ने अहमदाबाद में उसका परीक्षण किया बाद में ऑपरेशन कर हड्डी का कुछ हिस्सा निकाल दिया। लेकिन कुछ दिन बाद फिर उसे परेशानी होने लगी। ऐसे में पवन अपने गांव करवालिया आ गया और देवी देवताओं के चक्कर में लगा रहा। गत दिनों चिकित्सा विभाग के कैेंप में जब वो पहुंचा तो डॉक्टरों ने उसकी जांच कर उसे मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। जहां वो पहले कैंसर विभाग के डॉक्टर आरके.तंवर के पास पहुंचा। जहां उन्होंने जांच के बाद अस्थि रोग विभाग के डॉ. आरपी.मीणा के पास भेजा। डॉ. मीणा ने उसके जांघ की हड्डी में ईविंग सारकोमा डायग्नोस किया। उसका 16 अप्रैल को ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन में हिप ज्वाइंट से पैर को हटाना पड़ा। डेढ़ घंटे चले ऑपरेशन में निश्चेतना विभाग के डॉ. चेतन शुक्ला, डॉ. संजय कालानी का सहयोग रहा।
दूरबीन से 20 सेमी लंबा गॉल ब्लेडर निकाला
कोटा हार्ट इंस्टीट्यूट में सवाईमाधोपुर निवासी एक 35 वर्षीय महिला का दूरबीन विधि से 20 सेमी लंबा गॉल ब्लेडर निकाला है। महिला काफी दिनों से पेट व छाती में दर्द से पीड़ित थी। मरीज ने इस बीमारी को हृदय की बीमारी समझते हुए हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. राकेश जिंदल को दिखाया। इसके बाद सोनोग्राफी जांच में गॉल ब्लेडर में पथरी पाई गई। सर्जन डॉ. सीपी.सिंह ने 11 अप्रैल को दूरबीन से ऑपरेशन किया और नाभि तक पहुंचा 20 सेमी गॉल ब्लेडर निकाला।
बालक निगल गया सेफ्टी पिन
केलवाड़ा का दो साल का बालक सोनू खेलते-खेलते एक सेफ्टी पिन निगल गया। बालक के सांस में तकलीफ हुई तो परिजन तत्काल उसे एमबीएस अस्पताल लाए। ईएनटी विभाग के हैड डॉ. शिव कुमार ने बताया कि एक्स-रे में सेफ्टी पिन साफ नजर आ गया। इसके बाद सोमवार को सामान्य एनीस्थिसिया देकर एंडोस्कोप की मदद से यह सेफ्टी पिन निकाल दिया।
जांघ का कैंसर हाेता है दुर्लभ
डॉ. मीणा ने बताया कि ईविंग सारकोमा एक मिलियन (दस लाख) में से एक रोगी को होता है। ये कैंसर जांघ का दुर्लभ कैंसर है। पवन के ऑपरेशन के पहले जब उसकी जांच करवाई गई तो हीमोग्लोबिन केवल चार था। ऐसे में उसके ऑपरेशन से पहले और बाद में ब्लड चढ़ाया गया।

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2 Comments

  1. Visitor Photo
    By : Amritlal

    Job

  2. Visitor Photo
    By : Devesh

    Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai

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