श्रीनगर एनआईटी में बुधवार को शांति रही। केंद्र के दबाव के बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस को एनआईटी से दूर रखा गया है, साथ ही वहां तैनात सीआरपीएफ को उनकी सुरक्षा के संबंध में कड़े निर्देश दिए गए हैं। मानव संसाधन विकास मंत्रालय के तीन अधिकारियों का दल भी बुधवार दोपहर को एनआईटी पहुंचा और प्रोटेस्ट कर रहे स्टूडेंट्स से दो घंटे तक बात की। प्रोटेस्ट में शामिल कोटा के स्टूडेंट्स ने बताया कि हमने अधिकारियों के सामने तीन मांगें रखी हैं।
दूसरी NIT में पढ़ाया जाएगा
पहली यह कि इस एनआईटी को कहीं और शिफ्ट किया जाए। इस प्रक्रिया के पूरी होने तक उन्हें किसी दूसरी एनआईटी में पढ़ाया जाए। सभी गैर कश्मीरी स्टूडेंट्स को तत्काल पूरी सुरक्षा के साथ यहां से निकाला जाए, सभी घर पहुंचना चाहते हैं। एनआईटी के डायरेक्टर, लाठीचार्ज करने वाले एसएसपी, डीएसपी समेत उन तमाम अफसरों पर कार्रवाई की जाए, जिन्होंने गैर कश्मीरी छात्रों के साथ भेदभाव किया और बुरा बर्ताव किया। छात्रों से वार्ता के बाद एमएचआरडी के अधिकारियों ने एनआईटी के निदेशकों से बैठक भी की।
सोशल मीडिया को बनाया ताकत
स्टूडेंट्स को मीडिया से नहीं मिलने दिया जा रहा। ऐसे में उनकी आवाज सरकार तक पहुंचाने के लिए स्टूडेंट्स ने साेशल मीडिया को हथियार बनाया। फेसबुक पर Save the students of NITSrinagar के नाम से पेज बनाया। इसमें प्रोटेस्ट के फोटो, पुलिस की बर्बरता के वीडियो समेत हर मिनट का अपडेट शेयर किया जा रहा है। दाे दिन में ही इस पेज से 22 हजार लोग जुड़ चुके हैं और यहां की जा रही पोस्ट पर लाखों कमेंट आ रहे हैं। प्रोटेस्ट में बड़ी संख्या में छात्राएं भी हैं।
खूब खा ली लाठियां, अब न झुकेंगे, न डरेंगे
श्रीनगर एनआईटी में देश विरोधी तत्वों के खिलाफ डटकर खड़े होने वालों में कोटा के कई स्टूडेंट है। उन्होंने भास्कर से वहां के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि आधा दर्जन से ज्यादा स्टूडेंट्स अस्पताल में है। एक की सर्जरी होनी है, दो के फ्रेक्चर हैं। अब सब ने तय किया है कि या तो मर जाएंगे या भारत माता की अस्मिता बचा लेंगे। पुलिस ने उन्हें ढूंढ-ढूंढ़कर लाठियां मारी, जो गैर कश्मीरी हैं और देश का झंडा फहराकर शांति से आंदोलन कर रहे हैं।
टेस्ट होने तक एनआईटी में रहेंगे अधिकारी
आंदोलनरत स्टूडेंट्स ने एमएचआरडी दल को पुलिस की बर्बरता व देश विरोधी हरकत से जुड़े वीडियो दिखाए। कुछ स्टूडेंट्स के 11 अप्रैल से टेस्ट होने जा रहे हैं, फिलहाल उन्होंने कहा है कि वे टेस्ट नहीं देंगे। उधर, मिनिस्ट्री का कहना है कि टेस्ट पूरे होने तक अधिकारियों का दल एनआईटी में ही रहेगा।
दूसरी NIT में पढ़ाया जाएगा
पहली यह कि इस एनआईटी को कहीं और शिफ्ट किया जाए। इस प्रक्रिया के पूरी होने तक उन्हें किसी दूसरी एनआईटी में पढ़ाया जाए। सभी गैर कश्मीरी स्टूडेंट्स को तत्काल पूरी सुरक्षा के साथ यहां से निकाला जाए, सभी घर पहुंचना चाहते हैं। एनआईटी के डायरेक्टर, लाठीचार्ज करने वाले एसएसपी, डीएसपी समेत उन तमाम अफसरों पर कार्रवाई की जाए, जिन्होंने गैर कश्मीरी छात्रों के साथ भेदभाव किया और बुरा बर्ताव किया। छात्रों से वार्ता के बाद एमएचआरडी के अधिकारियों ने एनआईटी के निदेशकों से बैठक भी की।
सोशल मीडिया को बनाया ताकत
स्टूडेंट्स को मीडिया से नहीं मिलने दिया जा रहा। ऐसे में उनकी आवाज सरकार तक पहुंचाने के लिए स्टूडेंट्स ने साेशल मीडिया को हथियार बनाया। फेसबुक पर Save the students of NITSrinagar के नाम से पेज बनाया। इसमें प्रोटेस्ट के फोटो, पुलिस की बर्बरता के वीडियो समेत हर मिनट का अपडेट शेयर किया जा रहा है। दाे दिन में ही इस पेज से 22 हजार लोग जुड़ चुके हैं और यहां की जा रही पोस्ट पर लाखों कमेंट आ रहे हैं। प्रोटेस्ट में बड़ी संख्या में छात्राएं भी हैं।
खूब खा ली लाठियां, अब न झुकेंगे, न डरेंगे
श्रीनगर एनआईटी में देश विरोधी तत्वों के खिलाफ डटकर खड़े होने वालों में कोटा के कई स्टूडेंट है। उन्होंने भास्कर से वहां के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि आधा दर्जन से ज्यादा स्टूडेंट्स अस्पताल में है। एक की सर्जरी होनी है, दो के फ्रेक्चर हैं। अब सब ने तय किया है कि या तो मर जाएंगे या भारत माता की अस्मिता बचा लेंगे। पुलिस ने उन्हें ढूंढ-ढूंढ़कर लाठियां मारी, जो गैर कश्मीरी हैं और देश का झंडा फहराकर शांति से आंदोलन कर रहे हैं।
टेस्ट होने तक एनआईटी में रहेंगे अधिकारी
आंदोलनरत स्टूडेंट्स ने एमएचआरडी दल को पुलिस की बर्बरता व देश विरोधी हरकत से जुड़े वीडियो दिखाए। कुछ स्टूडेंट्स के 11 अप्रैल से टेस्ट होने जा रहे हैं, फिलहाल उन्होंने कहा है कि वे टेस्ट नहीं देंगे। उधर, मिनिस्ट्री का कहना है कि टेस्ट पूरे होने तक अधिकारियों का दल एनआईटी में ही रहेगा।
Job
Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai