नकली घी बनाकर सप्लाई करने वाले गिरोह को पकड़कर पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। पकड़े गए दोनों ठिकानों से दो साल में 10 हजार किलो नकली घी शहर में सप्लाई किया जा चुका है। इस जानलेवा घी को बेचने के लिए भी सप्लायरों को कोई मशक्कत नहीं करनी पड़ी।
नकली घी पहचानना मुश्किल
बड़े ब्रांड की पैकिंग के कारण इतनी बड़ी मात्रा में नकली घी आसानी से बाजार में चल गया। पैकिंग भी ऐसी कि आम आदमी के लिए इसे पहचानना लगभग मुश्किल है। इस घी को बनाने में सोया तेल, वनस्पति घी, कुछ मात्रा में असली देशी घी और खुशबू के लिए एसेंस का इस्तेमाल होता था।
एक किलो में ही बचते थे 300 रुपए
डीएसपी सिद्धांत शर्मा ने बताया कि स्वामी विवेकानंद नगर स्थित कारखाने से झालावाड़ के सरड़ा निवासी दो भाइयों हेमंत व आशीष को गिरफ्तार किया। दोनों ने मकान किराए से ले रखा है और परिवार सहित यहीं रहते हैं। इनका पहले मंडी में आढ़त का कारोबार था, लेकिन फेल होने के बाद लालच में यह काम शुरू कर दिया। पूछताछ के बाद इनके माल की सप्लाई करने वाले टेकचंद लालवानी को अरेस्ट किया, उसकी टिपटा में किराने की दुकान है। इसी तरह कंसुआ में किराने की दुकान लगाने वाले संजय जैन ने घी पर पारस ब्रांड के रैपर लगा रखे थे।
कारखानों का था गंदा माहौल
रात को संजय के भाई मनीष को भी गिरफ्तार कर लिया गया। यह घी 90 से 100 रुपए किलो पड़ता था और बाजार में 350 से 400 रुपए प्रति किलो बिकता था। चारों तरफ गंदगी, बाथरूम तक में बना रहे थे घी। एएसपी अनंत कुमार ने बताया कि कारखानों पर बेहद गंदा माहौल था। टॉयलेट-बाथरूम में सामान रखे थे। चारों तरफ गंदगी थी। गंदे बर्तन में घी रखा था। वहीं कपड़े सूख रहे थे। बरसों पुराने पीपों में ही घी मिक्सिंग का काम चल रहा था।
दिल्ली से खरीदे रैपर
आरोपियों ने दिल्ली से रैपर खरीदना बताया है, लेकिन पुलिस अभी इसका सत्यापन कर रही है। इनसे दो-दो बोरे डिब्बों के रैपर व थैलियां बरामद हुए हैं। एगमार्का, तिथि व दरों की सीलें भी मिले हैं। आरोपियों के मोबाइल से मिले नंबरों के आधार पर कई अहम खुलासों की उम्मीद है। वहीं एसेंस पुराने शहर की किसी दुकान से खरीदना बताया है। अब इनकी चेन ऑफ सप्लाई के बारे में पता किया जा रहा है। सूचना पर खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीम ने सैंपलिंग की। कोटा डेयरी के एमडी भी पहुंचे।
पैकिंग में होता है अंतर
सरस डेयरी के एमडी श्याम बाबू वर्मा ने कहा है कि सरस और नकली घी की पैकिंग में अंतर साफ होता है। नकली घी की पॉलीथिन की पैकिंग ऊपर एक से दूसरे सिरे तक थी, जबकि सरस घी की पॉलीथीन पर पैकिंग खड़ी होती है। सरस की पैकिंग मशीन से, जबकि नकली घी की पैकिंग लोहे की पत्ती को गर्म कर होती है। ध्यान से देखने पर मोनो में भी अंतर पता लग सकता है। नकली घी बेचने वाला बिल देने से बचता है।
नकली घी पहचानना मुश्किल
बड़े ब्रांड की पैकिंग के कारण इतनी बड़ी मात्रा में नकली घी आसानी से बाजार में चल गया। पैकिंग भी ऐसी कि आम आदमी के लिए इसे पहचानना लगभग मुश्किल है। इस घी को बनाने में सोया तेल, वनस्पति घी, कुछ मात्रा में असली देशी घी और खुशबू के लिए एसेंस का इस्तेमाल होता था।
एक किलो में ही बचते थे 300 रुपए
डीएसपी सिद्धांत शर्मा ने बताया कि स्वामी विवेकानंद नगर स्थित कारखाने से झालावाड़ के सरड़ा निवासी दो भाइयों हेमंत व आशीष को गिरफ्तार किया। दोनों ने मकान किराए से ले रखा है और परिवार सहित यहीं रहते हैं। इनका पहले मंडी में आढ़त का कारोबार था, लेकिन फेल होने के बाद लालच में यह काम शुरू कर दिया। पूछताछ के बाद इनके माल की सप्लाई करने वाले टेकचंद लालवानी को अरेस्ट किया, उसकी टिपटा में किराने की दुकान है। इसी तरह कंसुआ में किराने की दुकान लगाने वाले संजय जैन ने घी पर पारस ब्रांड के रैपर लगा रखे थे।
कारखानों का था गंदा माहौल
रात को संजय के भाई मनीष को भी गिरफ्तार कर लिया गया। यह घी 90 से 100 रुपए किलो पड़ता था और बाजार में 350 से 400 रुपए प्रति किलो बिकता था। चारों तरफ गंदगी, बाथरूम तक में बना रहे थे घी। एएसपी अनंत कुमार ने बताया कि कारखानों पर बेहद गंदा माहौल था। टॉयलेट-बाथरूम में सामान रखे थे। चारों तरफ गंदगी थी। गंदे बर्तन में घी रखा था। वहीं कपड़े सूख रहे थे। बरसों पुराने पीपों में ही घी मिक्सिंग का काम चल रहा था।
दिल्ली से खरीदे रैपर
आरोपियों ने दिल्ली से रैपर खरीदना बताया है, लेकिन पुलिस अभी इसका सत्यापन कर रही है। इनसे दो-दो बोरे डिब्बों के रैपर व थैलियां बरामद हुए हैं। एगमार्का, तिथि व दरों की सीलें भी मिले हैं। आरोपियों के मोबाइल से मिले नंबरों के आधार पर कई अहम खुलासों की उम्मीद है। वहीं एसेंस पुराने शहर की किसी दुकान से खरीदना बताया है। अब इनकी चेन ऑफ सप्लाई के बारे में पता किया जा रहा है। सूचना पर खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीम ने सैंपलिंग की। कोटा डेयरी के एमडी भी पहुंचे।
पैकिंग में होता है अंतर
सरस डेयरी के एमडी श्याम बाबू वर्मा ने कहा है कि सरस और नकली घी की पैकिंग में अंतर साफ होता है। नकली घी की पॉलीथिन की पैकिंग ऊपर एक से दूसरे सिरे तक थी, जबकि सरस घी की पॉलीथीन पर पैकिंग खड़ी होती है। सरस की पैकिंग मशीन से, जबकि नकली घी की पैकिंग लोहे की पत्ती को गर्म कर होती है। ध्यान से देखने पर मोनो में भी अंतर पता लग सकता है। नकली घी बेचने वाला बिल देने से बचता है।
Job
Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai