सरकारी सिस्टम में आम आदमी के साथ कैसे मजाक होता है, देखिए- सरकारी काम के लिए एक व्यक्ति से 3 दफ्तरों के चक्कर कटवाए जाते हैं। वह शहर में 25 किमी से ज्यादा भटकता है। फिर पता चलता है कि कहीं जाने की जरूरत ही नहीं थी। कहानी सुनिए खुद उस “आम आदमी’ की जुबानी, जिसके लिए पूरा सरकारी सिस्टम बना है।
भामाशाह कार्ड के लिए ऑनलाइन आवेदन किया
इस आम आदमी का नाम है-प्रवीण कुमार सैनी। नयापुरा के मालीपाड़ा में रहते हैं। पढ़े-लिखे जागरूक है, लिहाजा कुछ माह पहले ई-मित्र पर जाकर पत्नी नीतू सैनी के भामाशाह कार्ड के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। प्रवीण बताते हैं, पत्नी के मोबाइल पर एसएमएस आया-”आपका भामाशाह कार्ड उपखंड अधिकारी कार्यालय, कोटा पर प्राप्त हो चुका है, कृपया उपखंड अधिकारी कार्यालय से प्राप्त करें।’
उपखंड अधिकारी के आफिस पहुंचा
मैसेज के बाद मैं कलेक्ट्रेट स्थित उपखंड अधिकारी कार्यालय पहुंचा तो वहां भीतर घुसने से पहले ही दरवाजे पर चस्पा सूचनाओं पर नजर गई। लिखा था-”भामाशाह कार्ड नगर निगम के कमरा नंबर-405 में मिलेगा, कृपया वहां से प्राप्त करें।’ पढ़े-लिखे प्रवीण बिना वहां के कर्मचारियों का समय खराब किए नगर निगम पहुंच गए। निगम के कमरा नंबर-405 के बाहर चस्पा सूचना में लिखा था- “भामाशाह कार्ड अपने सेक्टर कार्यालय से प्राप्त करें।’
निगम के सेक्टर कार्यालय पहुंचे
जब सूचना साफ शब्दों में लिखी थी तो फिर वे नयापुरा कायन हाउस स्थित निगम के सेक्टर कार्यालय पहुंचे। वहां मौजूद कर्मचारी का जवाब सुन प्रवीण हैरान थे, कर्मचारी बोला-भाईसाहब! आप जैसे सैकड़ों लोग रोजाना चक्कर लगा रहे हैं, किसी के भामाशाह कार्ड नहीं आ रहे। दो-चार माह बाद आकर पता कर लेना।
फिलहाल तो हमारे पास किसी के कार्ड नहीं आए। अब प्रवीण खुद यह नहीं समझ पा रहे कि उन्हें या उनके जैसे हजारों आम इंसानों को बेवजह 3 ऑफिसों के इस तरह चक्कर क्यों कटवाए जा रहे हैं? प्रवीण की सूचना के बाद भास्कर ने सभी जगह जाकर देखा, ठीक वैसी ही सूचनाएं चस्पा हैं और रोजाना दर्जनों लोग प्रवीण की तरह ही चक्कर काट रहे हैं।
बड़े सवाल?
- ऑफिसों पर सूचना चस्पा है, यानी यह बात स्पष्ट है कि अफसरों को समस्या पता है। लेकिन, हर ऑफिस ने समस्या को दूर करने की बजाय अपना पल्ला झाड़ने का काम कर रखा है।
- क्यों नहीं लोगों को यह सूचना दी जाती वे भामाशाह कार्ड के लिए कहीं नहीं जाएं, जब भी सरकार से प्राप्त होंगे, वे संबंधित सेक्टर ऑफिसों पर पहुंचा दिए जाएंगे।
- स्टेट लेवल से लोगों को यह मैसेज मिल रहे हैं। क्यों नहीं उससे बातचीत कर उचित समय पर मैसेज भेजने को कहा जाता?
भामाशाह कार्ड के लिए ऑनलाइन आवेदन किया
इस आम आदमी का नाम है-प्रवीण कुमार सैनी। नयापुरा के मालीपाड़ा में रहते हैं। पढ़े-लिखे जागरूक है, लिहाजा कुछ माह पहले ई-मित्र पर जाकर पत्नी नीतू सैनी के भामाशाह कार्ड के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। प्रवीण बताते हैं, पत्नी के मोबाइल पर एसएमएस आया-”आपका भामाशाह कार्ड उपखंड अधिकारी कार्यालय, कोटा पर प्राप्त हो चुका है, कृपया उपखंड अधिकारी कार्यालय से प्राप्त करें।’
उपखंड अधिकारी के आफिस पहुंचा
मैसेज के बाद मैं कलेक्ट्रेट स्थित उपखंड अधिकारी कार्यालय पहुंचा तो वहां भीतर घुसने से पहले ही दरवाजे पर चस्पा सूचनाओं पर नजर गई। लिखा था-”भामाशाह कार्ड नगर निगम के कमरा नंबर-405 में मिलेगा, कृपया वहां से प्राप्त करें।’ पढ़े-लिखे प्रवीण बिना वहां के कर्मचारियों का समय खराब किए नगर निगम पहुंच गए। निगम के कमरा नंबर-405 के बाहर चस्पा सूचना में लिखा था- “भामाशाह कार्ड अपने सेक्टर कार्यालय से प्राप्त करें।’
निगम के सेक्टर कार्यालय पहुंचे
जब सूचना साफ शब्दों में लिखी थी तो फिर वे नयापुरा कायन हाउस स्थित निगम के सेक्टर कार्यालय पहुंचे। वहां मौजूद कर्मचारी का जवाब सुन प्रवीण हैरान थे, कर्मचारी बोला-भाईसाहब! आप जैसे सैकड़ों लोग रोजाना चक्कर लगा रहे हैं, किसी के भामाशाह कार्ड नहीं आ रहे। दो-चार माह बाद आकर पता कर लेना।
फिलहाल तो हमारे पास किसी के कार्ड नहीं आए। अब प्रवीण खुद यह नहीं समझ पा रहे कि उन्हें या उनके जैसे हजारों आम इंसानों को बेवजह 3 ऑफिसों के इस तरह चक्कर क्यों कटवाए जा रहे हैं? प्रवीण की सूचना के बाद भास्कर ने सभी जगह जाकर देखा, ठीक वैसी ही सूचनाएं चस्पा हैं और रोजाना दर्जनों लोग प्रवीण की तरह ही चक्कर काट रहे हैं।
बड़े सवाल?
- ऑफिसों पर सूचना चस्पा है, यानी यह बात स्पष्ट है कि अफसरों को समस्या पता है। लेकिन, हर ऑफिस ने समस्या को दूर करने की बजाय अपना पल्ला झाड़ने का काम कर रखा है।
- क्यों नहीं लोगों को यह सूचना दी जाती वे भामाशाह कार्ड के लिए कहीं नहीं जाएं, जब भी सरकार से प्राप्त होंगे, वे संबंधित सेक्टर ऑफिसों पर पहुंचा दिए जाएंगे।
- स्टेट लेवल से लोगों को यह मैसेज मिल रहे हैं। क्यों नहीं उससे बातचीत कर उचित समय पर मैसेज भेजने को कहा जाता?
Job
Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai