ऐ भला मानुष नाटक का हुआ मंचन, अकेली महिला की कहानी को रंगमंच पर दिखाया

ऐ भला मानुष नाटक का हुआ मंचन, अकेली महिला की कहानी को रंगमंच पर दिखाया

ऐ भला मानुष नाटक का हुआ मंचन, अकेली महिला की कहानी को रंगमंच पर दिखाया

अजी समाज में लुगायां अर मिनख एक दूजा की कानी झांके ही है- बातां करे ही है..., हर घर की लुगायां, मणखारों जीणा दूभर कर देवे...., कुछ यूं राजस्थानी में बोलते युवा कलाकार बुजुर्गों के रोल में खास दिख रहे थे। आयोजन था आर्ट गैलरी में रंग राजस्थान फेस्टीवल की आेर से जयंत दलवी द्वारा लिखित नाटक ऐ भला मानुष का मंचन का। नाटक में खास था कि जयपुर के 20 से 25 साल के बीबीए, बीसीए, एमबीए स्टूडेंट्स ने 70-75 साल के बुजुर्गों का रोल किया।
औरत-आदमी समाज के एक पहलु
नाटक में मुंबई की चाल में रहने वाले इन परिवारों में बुजुर्गों की एक महिला के प्रति मन की मनोस्थिति राजस्थानी परिवेश में बातों से बताई गई। जिसमें समाज को बताया कि एक अकेली औरत कैसे आंखों की किरकिरी बन जाती है। नाटक के माध्यम से संदेश दिया कि औरत-आदमी समाज के एक पहलु है। इंसान को इनमें अंतर नहीं समझना चाहिए। क्योंकि, महिला भी एक इंसान है।
मैकअप आर्टिस्ट ने यूं बखान किया
जयपुर के वरिष्ठ मैकअप आर्टिस्ट राधेलाल बांका ने इस नाटक के बारे में बताया कि हंसी और ठहाकों के बीच इस नाटक में समाज का एक पहलू सामने आया है। इसमें पुरुष अकेली महिला पर बुरी नजर रखते हैं। मुंबई की चाल में रहने वाले तीन मध्यमवर्गीय परिवारों में परिस्थितिजन्य का मनोरंजन है।
शालीनता के साथ दिखाई गई नोक-झोंक
नाटक में पति-पत्नी की नोक-झोंक बहुत ही शालीनता के साथ दिखाई है। जो श्रोताओं को सुखद हास्य का आनंद देती है। नाटक के माध्यम से सिर्फ हास्य पैदा करना ही नहीं अपितु पति-पत्नी में आपसी समझ व व्यावहारिकता का ज्ञान भी समाज को देना है। नाटक के सभी किरदार ने अपने अपने चरित्रों को जीवंत किया है।

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2 Comments

  1. Visitor Photo
    By : Amritlal

    Job

  2. Visitor Photo
    By : Devesh

    Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai

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