संभाग मुख्यालय कोटा को दरकिनार कर झालावाड़ में राज्य का नया हवाई अड्डा बनेगा। सिविल एविएशन निदेशालय ने इसके लिए तर्क दिया है कि कोटा में मौजूदा एयरपोर्ट का विस्तार नहीं हो पा रहा। कोटा एयरपोर्ट पर 4000 फीट की हवाई पट्टी है, जबकि जेट श्रेणी के विमान उतरने के लिए 9 हजार फीट की हवाई पट्टी होनी चाहिए। विस्तार के लिए जमीन का अभाव बताया गया है।
छठा बड़ा हवाई अड्डा होगा
जयपुर, उदयपुर, कोटा, जोधपुर और जैसलमेर के बाद झालावाड़ में प्रदेश का छठा बड़ा हवाई अड्डा होगा। फिलहाल सरकार के पास झालावाड़ में 5 हजार फीट की हवाई पट्टी है, जहां चार्टर श्रेणी के विमान उतर सकते हैं। हवाई अड्डा बनाने के लिए इसका 12000 फीट तक विस्तार किया जाएगा।
बजट एस्टीमेट भी मांग लिया है
झालावाड़ में हवाई अड्डा बनाने के लिए सरकारी कंसलटेंसी कंपनी राइट्स से भौगोलिक सर्वे भी करवाया था। सर्वे रिपोर्ट मंगलवार को सिविल एविएशन निदेशालय को सौंप दी गई है। इसमें झालावाड़ को एयरपोर्ट बनाने के लिए फिजिबल माना है। निदेशालय ने राइट्स से झालावाड़ में एयरपोर्ट के लिए बजट एस्टीमेट भी मांग लिया है।
कोटा में अड़चन, झालावाड़ में संभावना
झालावाड़ मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का विधानसभा क्षेत्र भी है। सिविल एविएशन निदेशालय का तर्क है कि कोटा हवाई अड्डे के विस्तार में दिक्कतें आ रही हैं, इसलिए सरकार विकल्प के तौर पर झालावाड़ में नया हवाई अड्डा बनाना चाहती है। कोटा में मौजूदा एयरपोर्ट पर हवाई पट्टी की लंबाई 4000 फीट ही है और जेट श्रेणी के विमान उतारने के लिए 9 हजार फीट की हवाई पट्टी होनी चाहिए। छोटी हवाई पट्टी होने के चलते कोटा में सिर्फ 14 सीटर विमान ही उतर सकते हैं।
हर तरफ से कोटा सही तो बिना उपयोगिता के झालवाड़ क्यों?
1 झालावाड़ के मुकाबले कोटा 20 गुना बढ़ा है। जब नेता हवाई सेवा के मुद्दे पर कोटा में एयर ट्रैफिक कम होने का बहाना बनाते रहे हैं तो झालावाड़ में एयर ट्रैफिक कहां से मिलेगा?
2 कोटा में जमीन है तो सरकार कोटा में नया एयरपोर्ट बनाने के बजाय झालावाड़ क्यों जाना चाहती है?
3 कोटा से जयपुर साढ़े 3 घंटे और दिल्ली साढ़े 4 घंटे (राजधानी से) में पहुंच जाते हैं। कोटा या संभाग के अन्य जिलों का व्यक्ति 2.30-3 घंटे का सफर कर झालावाड़ जाकर विमान क्यों पकड़ेगा?
4 संभाग में सबसे ज्यादा विदेशी पर्यटक बूंदी में आते हैं, जहां की कोटा से रोड कनेक्टिविटी काफी अच्छी है। अब बूंदी आने वाले पर्यटक हवाई मार्ग से झालावाड़ पहुंचकर कोटा होते हुए बूंदी क्यों जाना चाहेंगे?
विस्तार के बहाने ले गए झालावाड़
कोटा में विस्तार के लिए जमीन नहीं
सिविल एविएशन निदेशालाय के निदेशक केसरी सिंह ने कहा है कि राइट्स से झालावाड़ एयरपोर्ट के लिए बजट एस्टीमेशन मांगा गया है। फिलहाल यहां हवाई पट्टी से जुड़ी काफी जमीन सरकारी है, इसलिए भूमि अधिग्रहण में ज्यादा समस्या नहीं आएगी। कोटा में एयरपोर्ट विस्तार के लिए जमीन की दिक्कत है, इसलिए झालावाड़ को विकल्प के रूप में चुना है।
नए के लिए पर्याप्त जमीन
कलेक्टर डॉ. रवि कुमार सुरपुर ने कहा है कि कोटा में नए एयरपोर्ट के लिए पर्याप्त जमीन है। पिछले दिनों जयपुर में हुई बैठक में पुराने एयरपोर्ट से ही विमान चलाने की बात हुई है। इसके लिए तकनीकी विशेषज्ञों की टीम कोटा आने वाली थी, लेकिन किसी कारण से इसका समय बदला गया है। इसी एयरपोर्ट के विस्तार के लिए नाले उसके आगे की जमीन यूआईटी एयरपोर्ट को दे रहा है।
यूआईटी के सचिव डॉ मोहनलाल यादव ने कहा है कि कोटा में एयरपोर्ट का उच्च स्तरीय मामला है। हां, यदि एयरपोर्ट के लिए नई जमीन मांगी जाएगी तो कोटा में जमीन पर्याप्त है। शहरी क्षेत्र में चाहें तो वहां और ग्रामीण क्षेत्र में चाहें तो वहां भी जमीन उपलब्ध है।
शंभुपुरा के पास बहुत है जमीन
वहीं पूर्व यूआईटी सचिव आरडी मीणा का कहना है कि नए एयरपोर्ट के लिए हाइवे 76 से 12 को जोड़ने वाले बाईपास पर कोटा की तरफ काफी जमीन है। मैंने यूआईटी सचिव रहते अधिकारियों के साथ इस का अवलोकन किया था। यहां नए एयरपोर्ट के लिए पर्याप्त जमीन है। आसपास कोई आबादी भी नहीं है। हाइवे से भी जुड़ा हुआ है।
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