कोहरे के कारण रेल मंत्रालय ने बांद्रा से देहरादून जाने वाली देहरादून एक्सप्रेस को 8 जनवरी से 29 फरवरी तक सप्ताह में दो दिन सोमवार व गुरुवार को बंद कर रखा है। इन दो दिन ट्रेन के नहीं चलने से हाड़ौती के कोटा, बूंदी, बारां व झालावाड़ के हरिद्वार, देहरादून जाने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस ट्रेन के अलावा रोजाना हरिद्वार जाने के लिए कोटा से कोई सीधी ट्रेन नहीं हैं।
गाड़ी संख्या 19019 बांद्रा-देहरादून ट्रेन 8 जनवरी से पहले रोजाना कोटा होकर चलती थी। कोहरे के नाम देहरादून एक्सप्रेस को तो बंद कर दिया, लेकिन दिल्ली की तरफ कोटा होकर रोजाना दर्जनों ट्रेनें जा रही हैं। देहरादून एक्सप्रेस कोटा से हरिद्वार जाती है। हाड़ौती के लोग इस ट्रेन से अपने मृत परिजनों की अस्थियां लेकर हरिद्वार गंगा नदी में विसर्जित करने जाते हैं, लेकिन इन दिनों जिन लोगों को सोमवार व गुरुवार को छोड़ना पड़ रहा है। उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है। वे दो दिन तक इंतजार कर रहे हैं।
ज्यादातर यात्री अस्थियां ले जाने वाले होते हैं
देहरादून एक्सप्रेस ट्रेन 20 कोच की हैं। इनमें से 6 डिब्बे मेरठ में इस ट्रेन से अलग हो जाते हैं। शेष 14 डिब्बों की ट्रेन हरिद्वार व देहरादून जाती है। इस ट्रेन में सामान्य कोच व स्लीपर कोच होते हैं। हाड़ौती के लगभग 160 लोग ट्रेन से हर रोज हरिद्वार जाते हैं। जिसमें से अधिकतर अपने परिजनों की अस्थियां ले जाने वाले होते हैं
रेलवे बोर्ड को ही करना है फैसला
- बांद्रा से देहरादून जाने वाली देहरादून एक्सप्रेस, इंटरसिटी को सप्ताह में सातों दिन चलाया जाए। इस बारे में सीपीटीएम को पत्र भेजा गया है। सीपीटीएम रेलवे बोर्ड से चर्चा करेंगे। इसके बाद ही ट्रेन के संचालन के बारे में रेलवे बोर्ड निर्णय ले सकेगा। - वाईके.चौधरी,सीनियर डीसीएम
- इंतजार करना पड़ा : श्रीपुरा निवासी दिनेश रावल एडवोकेट की माताजी शांति देवी की मृत्यु 29 जनवरी को हो गई थी। उनकी अस्थियों को लेकर उनके पौते लोकेश रावल को सोमवार को देहरादून एक्सप्रेस से हरिद्वार जाना था। रावल एडवोकेट ने बताया कि सोमवार को देहरादून एक्सप्रेस के नहीं चलने के कारण उन्हें अस्थियां हरिद्वार ले जाने के लिए एक दिन का इंतजार करना पड़ा। मंगलवार को वे हरिद्वार के लिए रवाना हुए।
मेंबर ट्रैफिक काे लिखा पत्र
- बांद्रा से देहरादून जाने वाली देहरादून एक्सप्रेस के नहीं चलने से हाड़ौती के लोगों को होने वाली परेशानी से रेलवे बोर्ड के मेम्बर ट्रैफिक को अवगत करवाया गया है। उन्हें पत्र भेजा गया है जिसमें कहा गया है कि जब कोहरे में दूसरी ट्रेनों का संचालन हो रहा है तो इस ट्रेन को भी चलाया जाए। क्योंकि इस ट्रेन से लोग अपने परिजनों की अस्थियां लेकर हरिद्वार जाते हैं। - मुकेश गालव, सहायक महामंत्री एआईआरएफ
गाड़ी संख्या 19019 बांद्रा-देहरादून ट्रेन 8 जनवरी से पहले रोजाना कोटा होकर चलती थी। कोहरे के नाम देहरादून एक्सप्रेस को तो बंद कर दिया, लेकिन दिल्ली की तरफ कोटा होकर रोजाना दर्जनों ट्रेनें जा रही हैं। देहरादून एक्सप्रेस कोटा से हरिद्वार जाती है। हाड़ौती के लोग इस ट्रेन से अपने मृत परिजनों की अस्थियां लेकर हरिद्वार गंगा नदी में विसर्जित करने जाते हैं, लेकिन इन दिनों जिन लोगों को सोमवार व गुरुवार को छोड़ना पड़ रहा है। उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है। वे दो दिन तक इंतजार कर रहे हैं।
ज्यादातर यात्री अस्थियां ले जाने वाले होते हैं
देहरादून एक्सप्रेस ट्रेन 20 कोच की हैं। इनमें से 6 डिब्बे मेरठ में इस ट्रेन से अलग हो जाते हैं। शेष 14 डिब्बों की ट्रेन हरिद्वार व देहरादून जाती है। इस ट्रेन में सामान्य कोच व स्लीपर कोच होते हैं। हाड़ौती के लगभग 160 लोग ट्रेन से हर रोज हरिद्वार जाते हैं। जिसमें से अधिकतर अपने परिजनों की अस्थियां ले जाने वाले होते हैं
रेलवे बोर्ड को ही करना है फैसला
- बांद्रा से देहरादून जाने वाली देहरादून एक्सप्रेस, इंटरसिटी को सप्ताह में सातों दिन चलाया जाए। इस बारे में सीपीटीएम को पत्र भेजा गया है। सीपीटीएम रेलवे बोर्ड से चर्चा करेंगे। इसके बाद ही ट्रेन के संचालन के बारे में रेलवे बोर्ड निर्णय ले सकेगा। - वाईके.चौधरी,सीनियर डीसीएम
- इंतजार करना पड़ा : श्रीपुरा निवासी दिनेश रावल एडवोकेट की माताजी शांति देवी की मृत्यु 29 जनवरी को हो गई थी। उनकी अस्थियों को लेकर उनके पौते लोकेश रावल को सोमवार को देहरादून एक्सप्रेस से हरिद्वार जाना था। रावल एडवोकेट ने बताया कि सोमवार को देहरादून एक्सप्रेस के नहीं चलने के कारण उन्हें अस्थियां हरिद्वार ले जाने के लिए एक दिन का इंतजार करना पड़ा। मंगलवार को वे हरिद्वार के लिए रवाना हुए।
मेंबर ट्रैफिक काे लिखा पत्र
- बांद्रा से देहरादून जाने वाली देहरादून एक्सप्रेस के नहीं चलने से हाड़ौती के लोगों को होने वाली परेशानी से रेलवे बोर्ड के मेम्बर ट्रैफिक को अवगत करवाया गया है। उन्हें पत्र भेजा गया है जिसमें कहा गया है कि जब कोहरे में दूसरी ट्रेनों का संचालन हो रहा है तो इस ट्रेन को भी चलाया जाए। क्योंकि इस ट्रेन से लोग अपने परिजनों की अस्थियां लेकर हरिद्वार जाते हैं। - मुकेश गालव, सहायक महामंत्री एआईआरएफ
Job
Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai