आर्थिक संकट में चल रही कोटा की इंस्ट्रूमेंटेशन लिमिटेड (आईएल) को बड़ा झटका लगा है। हिस्सेदारी वाली जिस कंपनी रील (आरईआईएल) से बुरे समय में कोटा आईएल को उम्मीदें थीं, भारत सरकार की आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी (सीसीईए-कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स) ने उसे अलग कर दिया।
अब रील स्वतंत्र पब्लिक सेक्टर इंटरप्राइजेज के रूप में काम कर सकेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को दिल्ली में हुई बैठक में इस निर्णय को मंजूरी दे दी। आईएल को उसके शेयर के लिए महज 48.16 करोड़ रुपए मिलेंगे। भारत सरकार घाटे में चल रही आईएल को बंद करने की मंशा पहले ही जता चुकी थी। यह भी विकल्प दे चुकी थी कि चाहे तो राज्य सरकार इसे अधिग्रहित करके चलाए।
रीको और आईएल मिलकर बनी थी रील (आरईआईएल)
आरईआईएल राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं निवेश निगम (रीको) व आईएल कोटा की संयुक्त उद्यम कंपनी है, जो वर्ष 1981 में बनी थी। इसमें 51 फीसदी शेयर कोटा आईएल व 49 प्रतिशत शेयर रीको के थे। इसकी मदर यूनिट कोटा आईएल थी, जो मैनेजमेंट भी संभालती थी। वर्तमान में कोटा आईएल घाटे में है, जबकि रील फायदे में चल रही है। रील से कोटा आईएल को उम्मीदें थी, लेकिन इससे पहले ही भारत सरकार ने इसे आईएल से अलग कर दिया। रील भी इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद बनाती है, जिनकी बाजार में खासी डिमांड है।
^हमारी कंपनी ने बरसों पहले बड़ा निवेश कर आरईआईएल को खड़ा किया। सरकार को चाहिए था कि आईएल कोटा को लेकर भी कोई फैसला करती। हम इससे निराश हैं। रील में आईएल के 62 लाख 47 हजार 500 शेयर हैं, इनका मूल्यांकन ठीक से नहीं किया गया। यदि किया होता तो आईएल को अपनी हिस्सेदारी का 300 से 350 करोड़ रुपए मिलता और कंपनी एक झटके में मुनाफे में आ जाती। आईएल की करीब 250 करोड़ रुपए देनदारियां हैं। सरकार साजिश के तहत आईएल को बंद करने पर तुली है। हमने समय-समय पर भारत सरकार को लिखा, लेकिन उन पर कोई गौर नहीं किया गया। - राजेश पारीक, घनश्याम बैरवा, इंस्ट्रूमेंटेशन कर्मचारी संयुक्त मोर्चा
अब रील स्वतंत्र पब्लिक सेक्टर इंटरप्राइजेज के रूप में काम कर सकेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को दिल्ली में हुई बैठक में इस निर्णय को मंजूरी दे दी। आईएल को उसके शेयर के लिए महज 48.16 करोड़ रुपए मिलेंगे। भारत सरकार घाटे में चल रही आईएल को बंद करने की मंशा पहले ही जता चुकी थी। यह भी विकल्प दे चुकी थी कि चाहे तो राज्य सरकार इसे अधिग्रहित करके चलाए।
रीको और आईएल मिलकर बनी थी रील (आरईआईएल)
आरईआईएल राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं निवेश निगम (रीको) व आईएल कोटा की संयुक्त उद्यम कंपनी है, जो वर्ष 1981 में बनी थी। इसमें 51 फीसदी शेयर कोटा आईएल व 49 प्रतिशत शेयर रीको के थे। इसकी मदर यूनिट कोटा आईएल थी, जो मैनेजमेंट भी संभालती थी। वर्तमान में कोटा आईएल घाटे में है, जबकि रील फायदे में चल रही है। रील से कोटा आईएल को उम्मीदें थी, लेकिन इससे पहले ही भारत सरकार ने इसे आईएल से अलग कर दिया। रील भी इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद बनाती है, जिनकी बाजार में खासी डिमांड है।
^हमारी कंपनी ने बरसों पहले बड़ा निवेश कर आरईआईएल को खड़ा किया। सरकार को चाहिए था कि आईएल कोटा को लेकर भी कोई फैसला करती। हम इससे निराश हैं। रील में आईएल के 62 लाख 47 हजार 500 शेयर हैं, इनका मूल्यांकन ठीक से नहीं किया गया। यदि किया होता तो आईएल को अपनी हिस्सेदारी का 300 से 350 करोड़ रुपए मिलता और कंपनी एक झटके में मुनाफे में आ जाती। आईएल की करीब 250 करोड़ रुपए देनदारियां हैं। सरकार साजिश के तहत आईएल को बंद करने पर तुली है। हमने समय-समय पर भारत सरकार को लिखा, लेकिन उन पर कोई गौर नहीं किया गया। - राजेश पारीक, घनश्याम बैरवा, इंस्ट्रूमेंटेशन कर्मचारी संयुक्त मोर्चा
Job
Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai