सरकारी अस्पतालों में गैर राजस्थानियों से मराठी-बिहारी जैसा भेद अब मरीजों की जिंदगी पर भारी पड़ने लगा है। गंभीर हालत और ऑपरेशन के इंतजार में दर्जनों मरीज अस्पताल में भर्ती हैं, लेकिन पैसे के अभाव में इलाज शुरू नहीं हो पा रहा है।
पैर में फ्रैक्चर के बाद एमबीएस में भर्ती हुए मध्यप्रदेश के अशोक नगर निवासी राज गिरी महाराज ने ऑपरेशन में लगने वाली राशि सुनी तो सामान वहीं छोड़कर चले गए। ऑपरेशन के लिए ईएनटी वार्ड में भर्ती गुना की रुखसार भी सोमवार को चली गई।
पैसे जमा नहीं कराए तो दो दिन तक इलाज ही शुरू नहीं किया: फीमेल सर्जिकल वार्ड में भर्ती अशोक नगर की संगीता विश्वकर्मा (28) का तो डॉक्टरों ने 2 दिन तक इसलिए इलाज शुरू नहीं किया, क्योंकि वह बाहरी थीं। 5 हजार रुपए जमा कराने पर ऑपरेशन हुआ। पति विष्णु ने बताया कि एक गांठ का ऑपरेशन कराना था। इलाज के लिए कोटा पर भरोसा है, इसलिए 25 जनवरी को कोटा आ गए। बाहरी होने से दो दिन मामला अटका रहा।
डॉक्टरों ने बताया कि ऑपरेशन के लिए 5 हजार रुपए जमा होंगे। मैं इतने पैसे नहीं लाया था। बाद में लगा कि वापस जाऊंगा तो भी काफी पैसा खर्च होगा। यहीं 5 हजार रुपए की व्यवस्था की और गांठ निकलवाई। मैंने यहां आकर ही गलती कर दी, क्योंकि यह ऑपरेशन तो मध्यप्रदेश में ही निशुल्क हो जाता। कोटा में हमारे साथ धोखा हो गया।
मार्गदर्शन मांगा: जिसके पास पैसा नहीं, उसका क्या करें?
एमबीएस अस्पताल प्रशासन ने मामले में सरकार से मार्गदर्शन मांगा है। अधीक्षक डॉ. विजय सरदाना ने माना कि आदेश को लागू करने में कई प्रैक्टिकल दिक्कतें हैं। भर्ती होने के बाद बाहर के जो रोगी कह देते हैं कि मेरे पास पैसा नहीं है। ऐसे रोगियों का क्या किया जाए? इस बारे में प्रिंसिपल के माध्यम से सरकार से मार्गदर्शन मांगा है। हालांकि फिलहाल तय किया है कि ऐसे निर्धन रोगियों का मानवीय आधार पर मुझसे हस्ताक्षर कराकर इलाज किया जाए।
तीनों भाजपा विधायकों ने अमानवीय बताया आदेश
गैर राजस्थानियों से इलाज के पैसे की वसूली के आदेश को सत्ताधारी पार्टी के विधायकों ने ही गलत बताया है। भास्कर से बातचीत में विधायकों ने एक सुर में कहा कि मरीज-मरीज है, वह देश-दुनिया का कहीं का भी हो। विधायक भवानी सिंह राजावत ने तो यहां तक कह दिया कि आदेश अमानवीय व तुगलकी है, इसे हर हाल में वापस करवाएंगे। इसके लिए चिकित्सा मंत्री व सचिव से बात करेंगे। विधायक प्रहलाद गुंजल ने भी इसे अव्यवहारिक बताते हुए कहा कि मंगलवार को जयपुर में मंत्री से बात करेंगे। विधायक संदीप शर्मा ने कहा कि मरीज-मरीज में भेद नहीं किया जा सकता। सांसद ओम बिरला ने कहा कि मैं इसे लेकर बात करूंगा कि क्या कारण रहे, जो ऐसी व्यवस्था लागू करनी पड़ी।
बीपीएल और निर्धन को मुफ्त कर सकते हैं : मंत्री
भास्कर ने इस मुद्दे पर सोमवार को चिकित्सा मंत्री राजेंद्र राठौड़ से बात कर उन्हें कोटा में पैदा हुई सारी स्थिति बताई। मंत्री ने कहा कि इस पर पुनर्विचार कर रहे हैं। इसे गंभीरता से दिखवा रहे हैं, हमारे पास भी यह बात आई है।
हमारी प्राथमिकता राजस्थान के लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की है। इसीलिए इतना पैसा खर्च कर रहे हैं। बाहरी रोगियों का इलाज रोकने जैसी बात नहीं है। हम यह दिखवा रहे हैं कि इसमें क्या किया जा सकता है। यह भी कर सकते हैं कि वहां के बीपीएल या निर्धन तबके के लोगों काे फ्री कर दें। आपका धन्यवाद जो आपने यह इश्यू हम तक पहुंचाया।
पैर में फ्रैक्चर के बाद एमबीएस में भर्ती हुए मध्यप्रदेश के अशोक नगर निवासी राज गिरी महाराज ने ऑपरेशन में लगने वाली राशि सुनी तो सामान वहीं छोड़कर चले गए। ऑपरेशन के लिए ईएनटी वार्ड में भर्ती गुना की रुखसार भी सोमवार को चली गई।
पैसे जमा नहीं कराए तो दो दिन तक इलाज ही शुरू नहीं किया: फीमेल सर्जिकल वार्ड में भर्ती अशोक नगर की संगीता विश्वकर्मा (28) का तो डॉक्टरों ने 2 दिन तक इसलिए इलाज शुरू नहीं किया, क्योंकि वह बाहरी थीं। 5 हजार रुपए जमा कराने पर ऑपरेशन हुआ। पति विष्णु ने बताया कि एक गांठ का ऑपरेशन कराना था। इलाज के लिए कोटा पर भरोसा है, इसलिए 25 जनवरी को कोटा आ गए। बाहरी होने से दो दिन मामला अटका रहा।
डॉक्टरों ने बताया कि ऑपरेशन के लिए 5 हजार रुपए जमा होंगे। मैं इतने पैसे नहीं लाया था। बाद में लगा कि वापस जाऊंगा तो भी काफी पैसा खर्च होगा। यहीं 5 हजार रुपए की व्यवस्था की और गांठ निकलवाई। मैंने यहां आकर ही गलती कर दी, क्योंकि यह ऑपरेशन तो मध्यप्रदेश में ही निशुल्क हो जाता। कोटा में हमारे साथ धोखा हो गया।
मार्गदर्शन मांगा: जिसके पास पैसा नहीं, उसका क्या करें?
एमबीएस अस्पताल प्रशासन ने मामले में सरकार से मार्गदर्शन मांगा है। अधीक्षक डॉ. विजय सरदाना ने माना कि आदेश को लागू करने में कई प्रैक्टिकल दिक्कतें हैं। भर्ती होने के बाद बाहर के जो रोगी कह देते हैं कि मेरे पास पैसा नहीं है। ऐसे रोगियों का क्या किया जाए? इस बारे में प्रिंसिपल के माध्यम से सरकार से मार्गदर्शन मांगा है। हालांकि फिलहाल तय किया है कि ऐसे निर्धन रोगियों का मानवीय आधार पर मुझसे हस्ताक्षर कराकर इलाज किया जाए।
तीनों भाजपा विधायकों ने अमानवीय बताया आदेश
गैर राजस्थानियों से इलाज के पैसे की वसूली के आदेश को सत्ताधारी पार्टी के विधायकों ने ही गलत बताया है। भास्कर से बातचीत में विधायकों ने एक सुर में कहा कि मरीज-मरीज है, वह देश-दुनिया का कहीं का भी हो। विधायक भवानी सिंह राजावत ने तो यहां तक कह दिया कि आदेश अमानवीय व तुगलकी है, इसे हर हाल में वापस करवाएंगे। इसके लिए चिकित्सा मंत्री व सचिव से बात करेंगे। विधायक प्रहलाद गुंजल ने भी इसे अव्यवहारिक बताते हुए कहा कि मंगलवार को जयपुर में मंत्री से बात करेंगे। विधायक संदीप शर्मा ने कहा कि मरीज-मरीज में भेद नहीं किया जा सकता। सांसद ओम बिरला ने कहा कि मैं इसे लेकर बात करूंगा कि क्या कारण रहे, जो ऐसी व्यवस्था लागू करनी पड़ी।
बीपीएल और निर्धन को मुफ्त कर सकते हैं : मंत्री
भास्कर ने इस मुद्दे पर सोमवार को चिकित्सा मंत्री राजेंद्र राठौड़ से बात कर उन्हें कोटा में पैदा हुई सारी स्थिति बताई। मंत्री ने कहा कि इस पर पुनर्विचार कर रहे हैं। इसे गंभीरता से दिखवा रहे हैं, हमारे पास भी यह बात आई है।
हमारी प्राथमिकता राजस्थान के लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की है। इसीलिए इतना पैसा खर्च कर रहे हैं। बाहरी रोगियों का इलाज रोकने जैसी बात नहीं है। हम यह दिखवा रहे हैं कि इसमें क्या किया जा सकता है। यह भी कर सकते हैं कि वहां के बीपीएल या निर्धन तबके के लोगों काे फ्री कर दें। आपका धन्यवाद जो आपने यह इश्यू हम तक पहुंचाया।
Job
Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai