ढाई साल पहले दुर्घटना में दौलतराम का एक पैर मौके कट गया, दूसरा पैर बुरी तरह जख्मी हो गया था। हालत इतनी खराब थी कि कोटा से जयपुर तक सभी डॉक्टरों ने जीवन बचाने के लिए एक ही सलाह दी कि दूसरा पैर भी काटना ही पड़ेगा। दोनों पैर कट जाने के बाद जीवनयापन का संकट सोचकर ही टेम्पो चालक दौलतराम हिम्मत हार गए।
और डॉक्टर ने कहा- ठीक करके रहूंगा पैर
ऐसे में नए अस्पताल के ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. राजेश गोयल ने उनका पैर बचाने का संकल्प लिया। उनके इस निर्णय से उनकी ही यूनिट के जूनियर व रेजिडेंट डॉक्टर तक सहमत नहीं थे। क्योंकि मेडिकल साइंस में अभी तक इस तरह के जख्मी पैर को काटने का ही उल्लेख है। फिर भी डॉ. गोयल ने हिम्मत नहीं हिम्मत नहीं हारी। दौलतराम ने भी धैर्य रखा और उसका नतीजा ये निकला कि ढाई साल बाद उनका पैर ठीक हो गया और अगले 15 दिन में वो चलने लगेंगे।
ट्राला से हुआ था एक्सीडेंट
दौलतराम टेम्पो चालक हैं और नर्सिंग के संविदा कर्मचारियों को कोटा से अरनेठा ले जाते थे। इसी दौरान जून 2013 में उनका ट्रॉले से एक्सीडेंट हो गया था। इसमें उनका एक पैर कट गया था और दूसरे पैर की चमड़ी और मांस पूरी तरह खत्म हो गया। इसमें इंफेक्शन हो गया था।
ये था बड़ा रिस्क
पहले एमबीएस और फिर जयपुर में दौलतराम का इलाज हुआ। जयपुर एसएमएस तक के डॉक्टरों ने कह दिया कि जान बचानी है तो पैर काटना पड़ेगा। दौलतराम वहां से कोटा आए और डॉ. गोयल को दिखाया। डॉ. गोयल बताते हैं कि फ्रैक्चर और इंफेक्शन होने पर उस अंग को रखना जीवन को खतरे में डालने जैसा होता है। एक पैर पहले ही कट चुका था जिससे वो डिप्रेशन में थे। दूसरा पैर भी काटते तो उसकी हालत और ज्यादा बिगड़ती।
नर्सिंगकर्मियों ने भी दिखाया जज्बा
दौलतराम के इलाज के बदले में कुछ मिलने की उम्मीद किसी को नहीं थी। भास्कर की पहल पर शहरवासियों ने खुलकर उनकी मदद की। जो नर्सिंगकर्मी उनके टेम्पो में जाते थे उन्होंने भी उनका साथ नहीं छोड़ा। शशिकांत खुद उनके घर जाकर ड्रेसिंग करते। उसे अस्पताल आने-ले जाने में मदद की। वे उन्हें लेकर जयपुर तक लेकर गए। दौलतराम की बेटी की पढ़ाई व रहने का खर्च वहीं के एक आश्रम ने उठाया वो अब बीसीए कर रही हैं।
एक बार पूरी मेहनत हो गई थी फेल
दौलतराम का पैर बचाने के लिए सबसे पहले डॉक्टर ने उनके पैर पर एक्सटर्नल फिक्सर लगाया ताकि इन्फेक्शन कंट्रोल हो। इन्फेक्शन कंट्रोल होने के बाद बोन ग्राफ्टिंग के लिए ऑपरेशन किया, लेकिन बोन में ब्लड की सप्लाई नहीं होने के कारण 5 माह बाद वो तरीका फेल हो गया। तब भी सभी ने कहा पैर काट दो, बाद में भी पैर काटना पड़ेगा तब मरीज के परिजन काफी नाराज होंगे, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। प्लास्टिक सर्जन डॉ. रितेश जैन की मदद ली।
डॉ. जैन ने पैर में फ्लैप ग्राफ्टिंग के लिए ऑपरेशन किया। वो भी पहले घबराए, लेकिन डॉ. गोयल ने कहा यदि गड़बड़ी हुई तो सारी जिम्मेदारी मैं अपने ऊपर लूंगा। ये आपरेशन सफल हो गया। मांस व चमड़ी सही होने के बाद ऑपरेशन कर फ्रैक्चर जोड़ा गया। अब 15 दिन बाद प्लास्टर खुल जाएगा। उसके बाद उसके कटे हुए पैर का नकली पैर बनवा दिया जाएगा।
और डॉक्टर ने कहा- ठीक करके रहूंगा पैर
ऐसे में नए अस्पताल के ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. राजेश गोयल ने उनका पैर बचाने का संकल्प लिया। उनके इस निर्णय से उनकी ही यूनिट के जूनियर व रेजिडेंट डॉक्टर तक सहमत नहीं थे। क्योंकि मेडिकल साइंस में अभी तक इस तरह के जख्मी पैर को काटने का ही उल्लेख है। फिर भी डॉ. गोयल ने हिम्मत नहीं हिम्मत नहीं हारी। दौलतराम ने भी धैर्य रखा और उसका नतीजा ये निकला कि ढाई साल बाद उनका पैर ठीक हो गया और अगले 15 दिन में वो चलने लगेंगे।
ट्राला से हुआ था एक्सीडेंट
दौलतराम टेम्पो चालक हैं और नर्सिंग के संविदा कर्मचारियों को कोटा से अरनेठा ले जाते थे। इसी दौरान जून 2013 में उनका ट्रॉले से एक्सीडेंट हो गया था। इसमें उनका एक पैर कट गया था और दूसरे पैर की चमड़ी और मांस पूरी तरह खत्म हो गया। इसमें इंफेक्शन हो गया था।
ये था बड़ा रिस्क
पहले एमबीएस और फिर जयपुर में दौलतराम का इलाज हुआ। जयपुर एसएमएस तक के डॉक्टरों ने कह दिया कि जान बचानी है तो पैर काटना पड़ेगा। दौलतराम वहां से कोटा आए और डॉ. गोयल को दिखाया। डॉ. गोयल बताते हैं कि फ्रैक्चर और इंफेक्शन होने पर उस अंग को रखना जीवन को खतरे में डालने जैसा होता है। एक पैर पहले ही कट चुका था जिससे वो डिप्रेशन में थे। दूसरा पैर भी काटते तो उसकी हालत और ज्यादा बिगड़ती।
नर्सिंगकर्मियों ने भी दिखाया जज्बा
दौलतराम के इलाज के बदले में कुछ मिलने की उम्मीद किसी को नहीं थी। भास्कर की पहल पर शहरवासियों ने खुलकर उनकी मदद की। जो नर्सिंगकर्मी उनके टेम्पो में जाते थे उन्होंने भी उनका साथ नहीं छोड़ा। शशिकांत खुद उनके घर जाकर ड्रेसिंग करते। उसे अस्पताल आने-ले जाने में मदद की। वे उन्हें लेकर जयपुर तक लेकर गए। दौलतराम की बेटी की पढ़ाई व रहने का खर्च वहीं के एक आश्रम ने उठाया वो अब बीसीए कर रही हैं।
एक बार पूरी मेहनत हो गई थी फेल
दौलतराम का पैर बचाने के लिए सबसे पहले डॉक्टर ने उनके पैर पर एक्सटर्नल फिक्सर लगाया ताकि इन्फेक्शन कंट्रोल हो। इन्फेक्शन कंट्रोल होने के बाद बोन ग्राफ्टिंग के लिए ऑपरेशन किया, लेकिन बोन में ब्लड की सप्लाई नहीं होने के कारण 5 माह बाद वो तरीका फेल हो गया। तब भी सभी ने कहा पैर काट दो, बाद में भी पैर काटना पड़ेगा तब मरीज के परिजन काफी नाराज होंगे, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। प्लास्टिक सर्जन डॉ. रितेश जैन की मदद ली।
डॉ. जैन ने पैर में फ्लैप ग्राफ्टिंग के लिए ऑपरेशन किया। वो भी पहले घबराए, लेकिन डॉ. गोयल ने कहा यदि गड़बड़ी हुई तो सारी जिम्मेदारी मैं अपने ऊपर लूंगा। ये आपरेशन सफल हो गया। मांस व चमड़ी सही होने के बाद ऑपरेशन कर फ्रैक्चर जोड़ा गया। अब 15 दिन बाद प्लास्टर खुल जाएगा। उसके बाद उसके कटे हुए पैर का नकली पैर बनवा दिया जाएगा।
Job
Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai