सरकारी हॉस्पिटल में गैर-राजस्थानियों से भेद, पैसा नहीं तो इलाज रोका

सरकारी हॉस्पिटल में गैर-राजस्थानियों से भेद, पैसा नहीं तो इलाज रोका

सरकारी हॉस्पिटल में गैर-राजस्थानियों से भेद, पैसा नहीं तो इलाज रोका

 भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना लागू होने के बाद राजस्थान के अस्पतालों में बाहरी प्रदेशों के मरीजों का मुफ्त इलाज बंद कर दिया गया है। ऐसे में उनसे मोटी वसूली हो रही है। पैसा न होने के चलते ऐसे दर्जनों मरीज इलाज नहीं करा पा रहे हैं। सरकार ने ऐसी व्यवस्था कर दी है कि इलाज से पहले मरीजों से पहचान संबंधी दस्तावेज लेना जरूरी है। जो राजस्थान के मरीज हैं, उनका इलाज मुफ्त हो रहा है।

भामाशाह योजना में आ रहे मरीजों को क्लेम मिल रहा है। लेकिन, हरियाणा, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और गुजरात के हजारों मरीजों के साथ मराठी-बिहारी जैसा भेदभाव होने लगा है। कोटा में ही मध्यप्रदेश के दर्जनों मरीज पैसा नहीं होने के कारण इलाज के इंतजार में तड़प रहे हैं। कई के ऑपरेशन नहीं हो रहे।
मध्यप्रदेश का मरीज
18 हजार लाओ तो होगा ऑपरेशन
बेड नं. 64 पर भर्ती दमोह के विजयसिंह छबड़ा में मजदूर हैं। दुर्घटना में पैर फ्रैक्चर हो गया। पूरा परिवार दिनभर में 500 रुपए कमाता है और जनरल वार्ड का एक दिन का बेड चार्ज ही 750 रुपए है। पूरे ऑपरेशन में 18 हजार खर्च बताया गया है। पैसा नहीं होने से डॉक्टर ऑपरेशन नहीं कर रहे।
राजस्थान का मरीज
मुफ्त हो गए 3 ऑपरेशन
इसी वार्ड में बेड नं. 63 पर भर्ती कोटा के कनवास निवासी प्रहलाद के हाथ-उंगलियों के तीन ऑपरेशन हो चुके हैं। 15 दिन से भर्ती है, लेकिन एक पैसा भी खर्च नहीं हुआ।
सरकारें आपस में बात करें, इलाज से मना कैसे कर सकते हैं?
मध्यप्रदेश और गुजरात सरकारों ने भी अस्पतालों में मुफ्त जांच और दवाओं की योजनाएं लागू कर रखी हैं। इनका फायदा देश के किसी भी कोने से आने वाले मरीजों के लिए बराबर है। फिर, केवल राजस्थान में ही ये भेद कैसे किया जा सकता है। जबकि, शिक्षा और चिकित्सा तो मूलभूत जरूरतें हैं। इनमें फायदे और नुकसान की बात करना 21वीं सदी में तालिबानी फरमान जैसा है। भौतिक रूप से यह संभव भी नहीं है। किसी गरीब गंभीर मरीज का केवल इसलिए इलाज से मना कर देना कि वह गैर राजस्थानी है आैर उसके पास पैसा नहीं है।
राजस्थान में रोजी-रोटी कमाने आए हरियाणा, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और गुजरात के लोगों की संख्या लाखों में है। पधाराे म्हारे देश वाली संस्कृति में तो हम पाकिस्तान से आस लेकर आए मरीजों काे भी सहारा देेते हैं। ऐसे में एक आदेश से किसी भी भारतीय को इलाज से महरूम करने की बजाय कोई रास्ता निकाला जाना चाहिए। जब पानी और परिवहन सेवा जैसे झगड़ों में हम पड़ोसी सरकारों से बात कर सकते हैं तो इलाज तो सबसे प्राथमिक जरूरत है। कोई भी समाधान निकलने तक सरकार को सबसे पहले इस आदेश को वापस लेना चाहिए।

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2 Comments

  1. Visitor Photo
    By : Amritlal

    Job

  2. Visitor Photo
    By : Devesh

    Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai

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