मरीज को आईसीयू की जरूरत, पैसे नहीं थे तो जनरल वार्ड में किया शिफ्ट

मरीज को आईसीयू की जरूरत, पैसे नहीं थे तो जनरल वार्ड में किया शिफ्ट

मरीज को आईसीयू की जरूरत, पैसे नहीं थे तो जनरल वार्ड में किया शिफ्ट

राजस्थान सरकार के एक तुगलकी फरमान के बाद सरकारी अस्पतालों में राज्य के बाहर के रोगियों से इलाज के नाम पर प्राइवेट हॉस्पिटलों की तर्ज पर वसूली शुरू हो चुकी है। इससे कोटा में इलाज की उम्मीद लेकर आने वाले एमपी व अन्य पड़ोसी राज्यों के गरीब रोगियों पर संकट खड़ा हो गया है।
पैसों के अभाव में लटका इलाज
मेडिकल कॉलेज के तीनों अस्पतालों में ऐसे दर्जनों रोगी हैं, जिनका पैसों के अभाव में इलाज अटका हुआ है। ये गरीब मरीज पैसे दे नहीं सकते, इसलिए गंभीर रोगियों के भी ऑपरेशन नहीं हो पा रहे। सामान्य वार्ड में 750 रुपए और आईसीयू में 1500 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से बेड चार्ज वसूला जा रहा है। अन्य राज्यों के रोगियों के इलाज के लिए तय पैकेज की राशि इतनी ज्यादा है, जितनी प्राइवेट हॉस्पिटल भी नहीं वसूलते। बेड चार्ज भी सामान्य श्रेणी के प्राइवेट हॉस्पिटलों से ज्यादा है। सीमावर्ती क्षेत्र होने से कोटा में इलाज के लिए एमपी के रोगी बड़ी संख्या में आते हैं।
क्या है आदेश
राज्य सरकार ने 6 जनवरी को दी गाइडलाइन में कहा है कि राजस्थान के बाहर के सभी रोगियों से भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना (बीएसबीवाई) में निर्धारित पैकेज राशि ली जाए। पैकेज में नहीं आने पर संबंधित अस्पताल की आरएमआरएस की दर से पैसा लिया जाए। मसलन-जांघ के फ्रैक्चर का पैकेज बीएसबीवाई में 18 हजार रुपए है। अस्थि रोग वार्ड में एमपी के किसी रोगी को ऑपरेशन के लिए यह पैसा देना होगा। इसके अलावा जनरल वार्ड का 750 रुपए और आईसीयू का 1500 रुपए प्रतिदिन शुल्क भी देना होगा।

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2 Comments

  1. Visitor Photo
    By : Amritlal

    Job

  2. Visitor Photo
    By : Devesh

    Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai

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