कोटा यूनिवर्सिटी के 3 कोर्सेज में इस साल एक भी स्टूडेंट का कैंपस प्लेसमेंट नहीं हुआ। फिजिक्स, सोशल साइंस और एमकॉम का सिलेक्शन जीरो रहा। केवल केमेस्ट्री की स्थिति ही थोड़ी बेहतर है। इसके फाइनल ईयर के 15 स्टूडेंट्स का सिलेक्शन हुआ।
आलम ये है कि बुलाने के बावजूद कंपनियां कैंपस इंटरव्यू लेने नहीं आतीं। प्लेसमेंट एंड काउंसलिंग सेल ने इस साल करीब 100 कंपनियों को बुलाया था, लेकिन प्लेसमेंट के लिए करीब 20 कंपनियां ही आईं। कंप्यूटर साइंस के 7 और एमबीए से भी केवल 3 स्टूडेंट्स का सिलेक्शन हुआ। हालांकि पिछले साल प्लेसमेंट का आंकड़ा काफी बेहतर रहा था।
डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. रीना दाधीच के अनुसार इसका कारण जॉॅब की कमी और इंडस्ट्री के आर्थिक स्थिति है। इसके विपरीत कंप्यूटर साइंस में ही इस साल आरटीयू का प्लेसमेंट जबरदस्त था। यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग ने प्लेसमेंट देने में प्रदेश ने पहला स्थान हासिल किया था।
पर्सनालिटी डेवलपमेंट पर फोकस नहीं
यूनिवर्सिटी अपने ही कामों में उलझती नजर आती है। बच्चों की पर्सनालिटी डेवलपमेंट, कम्यूनिकेशन स्किल्स, इंटरव्यू स्किल्स पर भी ध्यान नहीं दिया जाता। लैंग्वेज लैब में भी रेगुलर क्लासेज नहीं लग रही हैं। बच्चों के डेवलपमेंट से ज्यादा इंफ्रास्ट्रक्चर पर यूनिवर्सिटी का फोकस नजर आ रहा है।
और आपसी खींचतान भी: बच्चों के पिछड़ने के पीछे फैकल्टी की आपसी खींचतान भी है। हेड ऑफ डिपार्टमेंट के लिए तत्कालीन कार्यवाहक वीसी ओंकार सिंह के निर्णय के बाद कुछ विभागों में प्रोफेसर्स और एसोसिएट प्रोफेसर्स के बीच समन्वय नहीं रहा। अब डीन साइंस के चार्ज को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
Job
Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai