शहर में रिहायशी, गैर रिहायशी व कॉमर्शियल मकानों की जानकारी लेने के लिए राज्य सरकार द्वारा करवाया जा रहा प्रॉपर्टी सर्वे पूरा होने से पहले ही विवाद में आ गया। सर्वे कंपनी को भुगतान के पहले निगम ने रिपोर्ट मांगी।
कई बार हीलाहवाली करने के बाद कंपनी ने 6 वार्डों की सूची नगर निगम को सौंपी। निगम ने जब उस सर्वे रिपोर्ट में की जांच करवाई तो पता चला कि कई तथ्य गलत हैं।
अधिकांश मकानों की साइज गलत है तो कहीं मकान मालिक का नाम गलत है। कई वार्डों में कोई सर्वे करने ही नहीं पहुंचा तो कुछ स्थानों पर बिना सर्वे के ही रसीद मकान में डाल दी गई। इस तरह की गड़बड़ियां सामने आने पर राजस्व समिति ने इसकी रिपोर्ट बनाकर उपायुक्त को भिजवा दी है।
अब उपायुक्त द्वारा इसकी जांच करवाई जाएगी। राज्य सरकार ने प्रॉपर्टी सर्वे का कांट्रैक्ट जयपुर की फोर्थ डायमेंशन सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड को दिया था। इस कंपनी ने कोटा में सर्वे का काम स्थानीय कंपनी लिमरा सर्विसेज को दिया है। इस सर्वे पर जो 5 करोड़ रुपए का खर्च आ रहा है। इसका भुगतान नगर निगमों को अपने स्तर पर ही करना है।
कोटा में नगर निगम के राजस्व अनुभाग को भुगतान करना है। ऐसे में राजस्व अनुभाग ने लिमरा सर्विसेज से सर्वे की रिपोर्ट मांगी। कंपनी ने 6 वार्डों 20, 21, 46, 47, 55 व 57 का सर्वे कर रिपोर्ट सौंप दी। बाकी वार्डों में सर्वे अभी चल रहा है। समिति अध्यक्ष महेश गौतम लल्ली ने जब इस रिपोर्ट में दर्ज मकान वालों से पूछताछ की तो कई गड़बड़ियां सामने आईं। इस पर उन्होंने उपायुक्त राजेंद्र सिंह चारण को रिपोर्ट सौंप दी है।
सर्वे की रसीद आंगन में फेंक गए, साइन भी फर्जी
मकान नंबर 3 एफ 18 महावीर नगर में रहने वाले प्रवीण शर्मा का कहना है कि 4-5 दिन पूर्व उनके मकान के आंगन में एक व्यक्ति रसीद फेंक गया था। जब रसीद देखी तो उसमें कुछ समझ नहीं आया। नाम-पता मेरा ही लिखा हुआ था। आसपास पूछताछ करने पर पता चला कि नगर निगम से संबंधित सर्वे है। निगम में पता किया तो प्रॉपर्टी सर्वे का पता चला, लेकिन हमारे घर पर कोई भी व्यक्ति सर्वे करने नहीं आया।
इस तरह की गड़बड़ी सामने आई
1- वार्ड 46- मकान नंबर 2-भ- 15 दादाबाड़ी की साइज 60×15 वर्गफीट बताई।
हकीकत- इस मकान की साइज 20×50 वर्गफीट है।
2- वार्ड 46- मकान नंबर 2-ख-21 दादाबाड़ी की साइज 60×30 वर्गफीट बता रखी है।
हकीकत- इस मकान की साइज 25 गुणा 50 वर्गफीट है।
3- वार्ड 46- मकान नंबर 2-ख-5 दादाबाड़ी के मकान मालिक का नाम वीपी कुमार लिखा है।
हकीकत- ये मकान अमित कुमार के नाम से है।
4- मकान नंबर 1531 बसंत विहार की साइज 12×35 और मालिक का नाम रामचंद्र कुमार बता रखा है।
हकीकत- मकान की साइज 11.5×35 वर्गफीट है और धापू सुमन के नाम से है।
5- वार्ड 21-शिवपुरा में मकान साइज 10×12 बता व नाम मनीष कुमार बता रखा है।
हकीकत- जो मोबाइल नंबर लिखे हैं उस पर फोन किया तो पता चला कि नंबर ही गलत है। फोन उठाने वाले ने बताया कि उसका नाम हेमेंद्र है और वो जालौर में रहता है।
कई बार हीलाहवाली करने के बाद कंपनी ने 6 वार्डों की सूची नगर निगम को सौंपी। निगम ने जब उस सर्वे रिपोर्ट में की जांच करवाई तो पता चला कि कई तथ्य गलत हैं।
अधिकांश मकानों की साइज गलत है तो कहीं मकान मालिक का नाम गलत है। कई वार्डों में कोई सर्वे करने ही नहीं पहुंचा तो कुछ स्थानों पर बिना सर्वे के ही रसीद मकान में डाल दी गई। इस तरह की गड़बड़ियां सामने आने पर राजस्व समिति ने इसकी रिपोर्ट बनाकर उपायुक्त को भिजवा दी है।
अब उपायुक्त द्वारा इसकी जांच करवाई जाएगी। राज्य सरकार ने प्रॉपर्टी सर्वे का कांट्रैक्ट जयपुर की फोर्थ डायमेंशन सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड को दिया था। इस कंपनी ने कोटा में सर्वे का काम स्थानीय कंपनी लिमरा सर्विसेज को दिया है। इस सर्वे पर जो 5 करोड़ रुपए का खर्च आ रहा है। इसका भुगतान नगर निगमों को अपने स्तर पर ही करना है।
कोटा में नगर निगम के राजस्व अनुभाग को भुगतान करना है। ऐसे में राजस्व अनुभाग ने लिमरा सर्विसेज से सर्वे की रिपोर्ट मांगी। कंपनी ने 6 वार्डों 20, 21, 46, 47, 55 व 57 का सर्वे कर रिपोर्ट सौंप दी। बाकी वार्डों में सर्वे अभी चल रहा है। समिति अध्यक्ष महेश गौतम लल्ली ने जब इस रिपोर्ट में दर्ज मकान वालों से पूछताछ की तो कई गड़बड़ियां सामने आईं। इस पर उन्होंने उपायुक्त राजेंद्र सिंह चारण को रिपोर्ट सौंप दी है।
सर्वे की रसीद आंगन में फेंक गए, साइन भी फर्जी
मकान नंबर 3 एफ 18 महावीर नगर में रहने वाले प्रवीण शर्मा का कहना है कि 4-5 दिन पूर्व उनके मकान के आंगन में एक व्यक्ति रसीद फेंक गया था। जब रसीद देखी तो उसमें कुछ समझ नहीं आया। नाम-पता मेरा ही लिखा हुआ था। आसपास पूछताछ करने पर पता चला कि नगर निगम से संबंधित सर्वे है। निगम में पता किया तो प्रॉपर्टी सर्वे का पता चला, लेकिन हमारे घर पर कोई भी व्यक्ति सर्वे करने नहीं आया।
इस तरह की गड़बड़ी सामने आई
1- वार्ड 46- मकान नंबर 2-भ- 15 दादाबाड़ी की साइज 60×15 वर्गफीट बताई।
हकीकत- इस मकान की साइज 20×50 वर्गफीट है।
2- वार्ड 46- मकान नंबर 2-ख-21 दादाबाड़ी की साइज 60×30 वर्गफीट बता रखी है।
हकीकत- इस मकान की साइज 25 गुणा 50 वर्गफीट है।
3- वार्ड 46- मकान नंबर 2-ख-5 दादाबाड़ी के मकान मालिक का नाम वीपी कुमार लिखा है।
हकीकत- ये मकान अमित कुमार के नाम से है।
4- मकान नंबर 1531 बसंत विहार की साइज 12×35 और मालिक का नाम रामचंद्र कुमार बता रखा है।
हकीकत- मकान की साइज 11.5×35 वर्गफीट है और धापू सुमन के नाम से है।
5- वार्ड 21-शिवपुरा में मकान साइज 10×12 बता व नाम मनीष कुमार बता रखा है।
हकीकत- जो मोबाइल नंबर लिखे हैं उस पर फोन किया तो पता चला कि नंबर ही गलत है। फोन उठाने वाले ने बताया कि उसका नाम हेमेंद्र है और वो जालौर में रहता है।
Job
Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai