नए अस्पताल में सोमवार को नवजात शिशु की मौत पर परिजनों ने हंगामा कर दिया। डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए परिजनों ने शिशु रोग यूनिट में तोड़फोड़ कर दी। दरवाजों के शीशे तोड़ दिए। डॉक्टर व स्टाफ के साथ भी अभद्रता की। हंगामे को देखते हुए स्टाफ ने खुद को कमरे में बंद कर लिया।
सूचना पाकर पुलिस पहुंची तो हंगामा करने वाले भाग गए। अस्पताल अधीक्षक की तरफ से महावीर नगर थाने में सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की रिपोर्ट भी दर्ज करवाई है। एनएमसीएच के गायनी वार्ड में भर्ती आरती ने 22 जनवरी को शिशु को जन्म दिया था। रविवार शाम को उसकी तबीयत बिगड़ी तो शिशु रोग विभाग में डॉक्टरों को दिखाया। सोमवार की सुबह फिर उसकी तबीयत बिगड़ गई। परिजनों ने उसे डॉक्टरों को दिखाया तो डॉक्टर ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया।
परिजन उसे लेकर शिशु रोग विभाग गए, जहां रेजिडेंट डॉक्टर कुलदीप थे ने सीपीआर भी किया, लेकिन बच्चे की मौत हो चुकी थी। इसके बाद परिजन अस्पताल से उसे लेकर चले गए। कुछ देर बाद ही करीब 15-20 लोग पहुंचे और डॉक्टरों से अभद्रता करने लगे। उन्होंने समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे सुनने को तैयार नहीं थे। उन्होंने दरवाजों पर लगे कांच तोड़ दिए और भाग गए।
चेक करने से 4 घंटे पहले ही हो चुकी थी बच्चे की मौत
अस्पताल अधीक्षक डॉक्टर सीएस सुशील ने बताया कि शिशु का वजन काफी कम था, परिजनों को बता दिया था कि ऐसे बच्चों का जीवित रहने का काफी कम चांस होता है। उसे रात को दिखाया और सुबह जब रेजिडेंट डॉक्टर राउंड पर पहुंचे तो बच्चे के शरीर में हरकत नहीं हो रही थी। बच्चे को चेक किया, सीपीआर आदि के माध्यम से प्रयास भी किया, लेकिन बच्चा मर चुका था। संभवत: जिस समय डॉक्टर ने चेक किया उससे 3 से 4 घंटे पहले ही उसकी मौत हो चुकी थी।
सूचना पाकर पुलिस पहुंची तो हंगामा करने वाले भाग गए। अस्पताल अधीक्षक की तरफ से महावीर नगर थाने में सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की रिपोर्ट भी दर्ज करवाई है। एनएमसीएच के गायनी वार्ड में भर्ती आरती ने 22 जनवरी को शिशु को जन्म दिया था। रविवार शाम को उसकी तबीयत बिगड़ी तो शिशु रोग विभाग में डॉक्टरों को दिखाया। सोमवार की सुबह फिर उसकी तबीयत बिगड़ गई। परिजनों ने उसे डॉक्टरों को दिखाया तो डॉक्टर ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया।
परिजन उसे लेकर शिशु रोग विभाग गए, जहां रेजिडेंट डॉक्टर कुलदीप थे ने सीपीआर भी किया, लेकिन बच्चे की मौत हो चुकी थी। इसके बाद परिजन अस्पताल से उसे लेकर चले गए। कुछ देर बाद ही करीब 15-20 लोग पहुंचे और डॉक्टरों से अभद्रता करने लगे। उन्होंने समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे सुनने को तैयार नहीं थे। उन्होंने दरवाजों पर लगे कांच तोड़ दिए और भाग गए।
चेक करने से 4 घंटे पहले ही हो चुकी थी बच्चे की मौत
अस्पताल अधीक्षक डॉक्टर सीएस सुशील ने बताया कि शिशु का वजन काफी कम था, परिजनों को बता दिया था कि ऐसे बच्चों का जीवित रहने का काफी कम चांस होता है। उसे रात को दिखाया और सुबह जब रेजिडेंट डॉक्टर राउंड पर पहुंचे तो बच्चे के शरीर में हरकत नहीं हो रही थी। बच्चे को चेक किया, सीपीआर आदि के माध्यम से प्रयास भी किया, लेकिन बच्चा मर चुका था। संभवत: जिस समय डॉक्टर ने चेक किया उससे 3 से 4 घंटे पहले ही उसकी मौत हो चुकी थी।
Job
Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai