मंजिल तक हर हाल में पहुंचने का जज्बा हो तो कोई भी संकल्प मुश्किल नहीं होता। गोविंद नगर राप्रावि संस्कृत स्कूल के प्रधानाध्यापक शिवलाल मीणा ने अपने दम पर स्कूल भवन तैयार कर दिया। 4 साल के संघर्ष के बाद अब स्कूल की बिल्डिंग तैयार हो चुकी है। इसके लिए पैसों की कमी पड़ी तो उन्होंने अपनी जेब से 1 लाख 30 हजार रुपए खर्च कर दिए।
गणतंत्र दिवस के मौके पर वो पहली बार नए स्कूल भवन में तिरंगा फहराएंगे। नए स्कूल भवन में एक चौकीदार क्वार्टर, दो क्लास, एक प्रधानाध्यापक कक्ष, किचन और छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग टॉयलेट बनाए हैं। स्कूल में कुल 74 बच्चों का नामांकन है और 2 शिक्षक नियुक्त हैं।
बजट कम, खर्च ज्यादा
संभवत: शहर का यह अनूठा स्कूल है जिसका बजट कम मिला हो और खर्च ज्यादा होकर बिल्डिंग बनी हो। सूचना बोर्ड में भी इसका उल्लेख है। बोर्ड में कुल स्वीकृत राशि 14 लाख 35 हजार है। जबकि खर्च राशि 15 लाख 25 हजार रुपए लिखी है।
स्कूल में खास
मिड-डे मील बनाने के लिए सुविधायुक्त रसोई बनवाई है। हैंडपंप की जगह बोरवेल खुदवाया है। प्रिंसिपल रूम से लेकर क्लासरूम में रोशनदान बनवाए हैं। फर्श पर कोटा स्टोन लगवाया है। छत पर उल्टा प्लास्टर किया हुआ है। स्टील की रेलिंग लगी है।
संघर्ष: भवन की तराई से लेकर चौकीदारी तक खुद की
13 जनवरी 2012 से स्कूल जमीन आवंटन के लिए प्रधानाध्यापक शिवलाल मीणा ने प्रयास शुरू किया। जमीन आवंटन में काफी संघर्ष करना पड़ा। 2 बार तो जमीन आवंटन की फाइल ही गुम हो गई। विभाग का भी कोई विशेष सहयोग नहीं मिला। यूआईटी के बार-बार चक्कर काटने के बाद ये जमीन मिली। निर्माण सामग्री की सुरक्षा के लिए यहां बनी पानी की टंकी पर भी सोए। भवन की तराई और चौकीदारी भी खुद ने की।
अन्य शिक्षक भी प्रेरणा लें
सर्वशिक्षा अभियान की एडीपीसी जगदीश कुमार ने बताया कि यह शिक्षक का अच्छा प्रयास है। उन्होंने संघर्ष कर यूआईटी से जमीन आवंटन करवाकर सराहनीय स्कूल बनवाया है। अन्य शिक्षकों को भी इससे प्रेरणा लेनी चाहिए।
गणतंत्र दिवस के मौके पर वो पहली बार नए स्कूल भवन में तिरंगा फहराएंगे। नए स्कूल भवन में एक चौकीदार क्वार्टर, दो क्लास, एक प्रधानाध्यापक कक्ष, किचन और छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग टॉयलेट बनाए हैं। स्कूल में कुल 74 बच्चों का नामांकन है और 2 शिक्षक नियुक्त हैं।
बजट कम, खर्च ज्यादा
संभवत: शहर का यह अनूठा स्कूल है जिसका बजट कम मिला हो और खर्च ज्यादा होकर बिल्डिंग बनी हो। सूचना बोर्ड में भी इसका उल्लेख है। बोर्ड में कुल स्वीकृत राशि 14 लाख 35 हजार है। जबकि खर्च राशि 15 लाख 25 हजार रुपए लिखी है।
स्कूल में खास
मिड-डे मील बनाने के लिए सुविधायुक्त रसोई बनवाई है। हैंडपंप की जगह बोरवेल खुदवाया है। प्रिंसिपल रूम से लेकर क्लासरूम में रोशनदान बनवाए हैं। फर्श पर कोटा स्टोन लगवाया है। छत पर उल्टा प्लास्टर किया हुआ है। स्टील की रेलिंग लगी है।
संघर्ष: भवन की तराई से लेकर चौकीदारी तक खुद की
13 जनवरी 2012 से स्कूल जमीन आवंटन के लिए प्रधानाध्यापक शिवलाल मीणा ने प्रयास शुरू किया। जमीन आवंटन में काफी संघर्ष करना पड़ा। 2 बार तो जमीन आवंटन की फाइल ही गुम हो गई। विभाग का भी कोई विशेष सहयोग नहीं मिला। यूआईटी के बार-बार चक्कर काटने के बाद ये जमीन मिली। निर्माण सामग्री की सुरक्षा के लिए यहां बनी पानी की टंकी पर भी सोए। भवन की तराई और चौकीदारी भी खुद ने की।
अन्य शिक्षक भी प्रेरणा लें
सर्वशिक्षा अभियान की एडीपीसी जगदीश कुमार ने बताया कि यह शिक्षक का अच्छा प्रयास है। उन्होंने संघर्ष कर यूआईटी से जमीन आवंटन करवाकर सराहनीय स्कूल बनवाया है। अन्य शिक्षकों को भी इससे प्रेरणा लेनी चाहिए।
Job
Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai