बीटेक कर रहे सिद्धार्थ के इंजीनियर बनने का इंतजार पूरे परिवार को था, लेकिन गुरुवार को सड़क हादसे में उसकी मौत हो गई। परिजनों के लिए ये सदमा बर्दाश्त करना मुश्किल था। लेकिन, ऐसी परिस्थिति में भी परिवार ने परोपकार का संदेश दिया और बेटे का नेत्रदान करवाया।
बालापुरा कुन्हाड़ी निवासी सिद्धार्थ सोलंकी और उसके दोस्त अंकित सक्सेना की बाइक बूंदी रोड पर रामगंज बालाजी के पास सड़क पर खड़ी ट्रॉली से टकरा गई थी। सिद्धार्थ की गुरुवार को मृत्यु हो गई थी। उनके पारिवारिक मित्र और नेत्रदान के लिए काम कर रहे अमित सिंह राठौड़ ने सिद्धार्थ के चाचा थर्मल में एईएन महेंद्र सिंह सोलंकी को समझाया कि वो अपने बीच नहीं रहा, लेकिन उसकी आंखें दो नेत्रहीनों को जीवनभर रोशनी देकर उसके जीवित होने का आभास करवाती रहेगी।
चाचा ने यह बात उसके माता-पिता को समझाई और परिवार के सभी लोग सहमत हो गए। उन्होंने शाइन इंडिया फाउंडेशन को सूचना दी। उनके तकनीशियन विकास कुमार व टिंकू ओझा ने मोर्चरी पहुंचकर नेत्रदान लिया। इधर, शुक्रवार को अंकित सक्सेना की भी मृत्यु हो गई।
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Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai