राज्य की सबसे बड़ा सरकारी महकमा शिक्षा विभाग भी पॉलीथिन के दुष्प्रभाव को खत्म करने के लिए आगे आया है। पॉलीथिन हटाकर शहर को साफ सुथरा रखने में अब सभी सरकारी स्कूलों के बच्चे भी सहभागिता निभाएंगे।
अतिरिक्त निदेशक प्रशासन (प्रारंभिक शिक्षा) अजीत सिंह ने राजस्थान के सभी डीईओ इस अभियान की गाइडलाइन भी भेज दी है। नागौर में पहले भी स्कूल के बच्चों ने यह मुहिम छेड़ी थी। वहां पर काफी सफलता भी मिली थी। इसी कारण से वहां की गाइडलाइन डीईओ को भेजी गई है। पॉलीथिन फ्री कैंपेन में शिक्षा विभाग ने क्या-क्या काम किए हैं। इसकी जानकारी हर डीईओ को बीकानेर निदेशालय को भेजनी होगी।
अब पालना हमारे शिक्षा विभाग के हाथों में
कोटा को पॉलीथिन फ्री सिटी बनाने के लिए दैनिक भास्कर ने पहल की थी। इस पहल के साथ जिला प्रशासन ने भी पॉलीथिन फ्री बनाने के लिए कार्रवाई की। कई स्थानों पर छापामार कार्रवाई करके हजारों किलो पॉलीथिन भी जब्त की। अब कोटा के शिक्षा विभाग के इस आदेशों की पालना करवानी होगी। शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी है कि इस गाइडलाइन की लाइन-टू-लाइन पालना करवाएं।
गाइडलाइन...कोटा को ऐसे बनाएंगे पॉलीथिन फ्री सिटी
सरकारी और गैर सरकारी स्कूल के बच्चे हर शनिवार को घर में उपयोग की जानी वाली पॉलीथिन को स्कूलों में जमा करवाएंगे।
दस स्कूलों के बीच एक स्कूल को कलेक्शन सेंटर बनाया जाएगा। प्रभारी उसको तौलकर सेनेटरी इंस्पेक्टर को देंगे। उसकी रसीद भी लेंगे।
हर शनिवार को समाजोपयोगी उत्पादन और सामाजिक कार्य के तहत छात्र-छात्राओं द्वारा कागज, पुराने कपड़े और जूट की थैली और थैले बनाए जाएंगे।
शनिवार को बनाई जाने वाले थैलों को विद्यालय विकास समिति की ओर से खुदरा व्यापारियों को बेचकर मिलने वाले राशि को समिति के खाते में जमा कराया जाएगा।
खुदरा व्यापारियों को पॉलीथिन नहीं बेचने के लिए प्रोत्साहित करेंगे।
वाद विवाद, चित्रकला और निबंध प्रतियोगिता आयोजित करके विजेताओं को गणतंत्र दिवस समारोह में सम्मानित करेंगे।
सीएम ने भी सराहा था अभियान
भास्कर के पॉलीथिन फ्री अभियान को सीएम वसुंधरा राजे ने भी झालावाड़ दौरे के समय काफी सराहा था। उन्होंने गायों की मौत पर चिंता भी प्रकट की थी।
10 जनवरी को छुट्टियां समाप्त होने के बाद स्कूलों में कैंपेन शुरू कर दिया जाएगा। हर स्कूल में एक व्यक्ति की जिम्मेदारी तय की जाएगी। नोडल अधिकारी भी इस कैंपेन की मॉनिटरिंग करेगा। डीईओ के निरीक्षण के दौरान पालना रिपोर्ट ली जाएगी। -किशनलाल देवतवाल, कार्यवाहक डीडी और डीईओ प्रारंभिक
कुल्हड़ में दो या डिब्बे में, पॉलीथिन में सामान दिया तो होगी कार्रवाई
शहर में कचौरी पैकिंग करवाकर ले जाने वालों को पॉलीथिन में चटनी देने की परंपरा को बंद करना होगा। ग्राहक चटनी मांगता है तो या तो उसे कुल्हड़ में दो या फिर प्लास्टिक के डिब्बे में, विकल्प तलाशना आपका काम है, लेकिन पॉलीथिन में चटनी दी तो कार्रवाई होगी। ये स्पष्ट चेतावनी बुधवार को कलेक्टर डॉ. रवि कुमार सुरपुर ने कचौरी व मीट शॉप के व्यापारियों को दी। मीट व्यवसायियों ने भी आश्वासन दिया कि वे पॉलीथिन का उपयोग नहीं करेंगे।
पॉलीथिन फ्री कोटा के लिए कलेक्टर डॉ. सुरपुर ने बुधवार को शहर के कचौरी व मीट शॉप के व्यापारियों को बुलाया था। बैठक में कलेक्टर ने कहा कि पॉलीथिन के नुकसान को देखते हुए इसे बंद करना हमारा कर्तव्य भी है। कोटा के सभी व्यावसायिक संगठनों द्वारा पॉलीथिन उपयोग को बंद करने का निर्णय लिया जा चुका है। कचौरी व मीट व्यवसायियों द्वारा पॉलीथिन उपयोग अभी भी हो रहा है। इसे तत्काल बंद कर दिया जाए। कुछ कचौरी व्यवसायियों ने कहा कि ग्राहक चटनी मांगता है उसे कैसे दें। इस पर उन्होंने कहा कि कुल्हड़ या डिब्बे का उपयोग करो, लेकिन पॉलीथिन नहीं। इसी तरह मीट व्यवसायियों ने तर्क दिया कि लोग खुद पॉलीथिन में मांगते हैं। कागज में दे नहीं सकते। इस पर उन्होंने कहा कि गत्ते या पैकिंग डिब्बे रखो और उसी में दो। समझाईश के बाद पॉलीथिन उपयोग पाया जाने पर संबंधित व्यवसायी के खिलाफ नियमानुसार कार्यवाही के साथ दुकान को भी दो दिन के लिए सीज किया जाएगा।
एडीएम सुनीता डागा ने कहा कि पहले की तरह थैला लेकर बाजार जाने की परंपरा जीवित करनी होगी। उन्होंने कपड़े अथवा कागज के थैले का मीट की दुकानों पर उपयोग करने के निर्देश दिए। नगर निगम उपायुक्त राजेश डागा ने बताया कि कोई भी व्यापारी निगम के अंबेडकर भवन में पॉलीथिन जमा करा सकता है।
कलेक्टर ने पॉलीथिन व्यापारियों को 10 दिन का समय दिया
कोटा व्यापार महासंघ के प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को कलेक्टर रविकुमार सुरपुर और एडीएम सिटी सुनीता डागा से भेंट की और पॉलीथिन व्यापारियों को हो रहे भारी नुकसान के बारे अवगत कराया। प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर को बताया कि पूर्व में प्लास्टिक के कई उत्पाद बेचने की अनुमति थी। इसके चलते थैली व्यवसायियों के पास काफी मात्रा में स्टॉक जमा रहता था। स्टॉक वापस भिजवाने के लिए समय दिया जाए। इस पर कलेक्टर ने व्यवसायियों को 10 दिन का समय दिया है। इस दौरान अशोक माहेश्वरी और क्रांति
जैन मौजूद रहे।
अतिरिक्त निदेशक प्रशासन (प्रारंभिक शिक्षा) अजीत सिंह ने राजस्थान के सभी डीईओ इस अभियान की गाइडलाइन भी भेज दी है। नागौर में पहले भी स्कूल के बच्चों ने यह मुहिम छेड़ी थी। वहां पर काफी सफलता भी मिली थी। इसी कारण से वहां की गाइडलाइन डीईओ को भेजी गई है। पॉलीथिन फ्री कैंपेन में शिक्षा विभाग ने क्या-क्या काम किए हैं। इसकी जानकारी हर डीईओ को बीकानेर निदेशालय को भेजनी होगी।
अब पालना हमारे शिक्षा विभाग के हाथों में
कोटा को पॉलीथिन फ्री सिटी बनाने के लिए दैनिक भास्कर ने पहल की थी। इस पहल के साथ जिला प्रशासन ने भी पॉलीथिन फ्री बनाने के लिए कार्रवाई की। कई स्थानों पर छापामार कार्रवाई करके हजारों किलो पॉलीथिन भी जब्त की। अब कोटा के शिक्षा विभाग के इस आदेशों की पालना करवानी होगी। शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी है कि इस गाइडलाइन की लाइन-टू-लाइन पालना करवाएं।
गाइडलाइन...कोटा को ऐसे बनाएंगे पॉलीथिन फ्री सिटी
सरकारी और गैर सरकारी स्कूल के बच्चे हर शनिवार को घर में उपयोग की जानी वाली पॉलीथिन को स्कूलों में जमा करवाएंगे।
दस स्कूलों के बीच एक स्कूल को कलेक्शन सेंटर बनाया जाएगा। प्रभारी उसको तौलकर सेनेटरी इंस्पेक्टर को देंगे। उसकी रसीद भी लेंगे।
हर शनिवार को समाजोपयोगी उत्पादन और सामाजिक कार्य के तहत छात्र-छात्राओं द्वारा कागज, पुराने कपड़े और जूट की थैली और थैले बनाए जाएंगे।
शनिवार को बनाई जाने वाले थैलों को विद्यालय विकास समिति की ओर से खुदरा व्यापारियों को बेचकर मिलने वाले राशि को समिति के खाते में जमा कराया जाएगा।
खुदरा व्यापारियों को पॉलीथिन नहीं बेचने के लिए प्रोत्साहित करेंगे।
वाद विवाद, चित्रकला और निबंध प्रतियोगिता आयोजित करके विजेताओं को गणतंत्र दिवस समारोह में सम्मानित करेंगे।
सीएम ने भी सराहा था अभियान
भास्कर के पॉलीथिन फ्री अभियान को सीएम वसुंधरा राजे ने भी झालावाड़ दौरे के समय काफी सराहा था। उन्होंने गायों की मौत पर चिंता भी प्रकट की थी।
10 जनवरी को छुट्टियां समाप्त होने के बाद स्कूलों में कैंपेन शुरू कर दिया जाएगा। हर स्कूल में एक व्यक्ति की जिम्मेदारी तय की जाएगी। नोडल अधिकारी भी इस कैंपेन की मॉनिटरिंग करेगा। डीईओ के निरीक्षण के दौरान पालना रिपोर्ट ली जाएगी। -किशनलाल देवतवाल, कार्यवाहक डीडी और डीईओ प्रारंभिक
कुल्हड़ में दो या डिब्बे में, पॉलीथिन में सामान दिया तो होगी कार्रवाई
शहर में कचौरी पैकिंग करवाकर ले जाने वालों को पॉलीथिन में चटनी देने की परंपरा को बंद करना होगा। ग्राहक चटनी मांगता है तो या तो उसे कुल्हड़ में दो या फिर प्लास्टिक के डिब्बे में, विकल्प तलाशना आपका काम है, लेकिन पॉलीथिन में चटनी दी तो कार्रवाई होगी। ये स्पष्ट चेतावनी बुधवार को कलेक्टर डॉ. रवि कुमार सुरपुर ने कचौरी व मीट शॉप के व्यापारियों को दी। मीट व्यवसायियों ने भी आश्वासन दिया कि वे पॉलीथिन का उपयोग नहीं करेंगे।
पॉलीथिन फ्री कोटा के लिए कलेक्टर डॉ. सुरपुर ने बुधवार को शहर के कचौरी व मीट शॉप के व्यापारियों को बुलाया था। बैठक में कलेक्टर ने कहा कि पॉलीथिन के नुकसान को देखते हुए इसे बंद करना हमारा कर्तव्य भी है। कोटा के सभी व्यावसायिक संगठनों द्वारा पॉलीथिन उपयोग को बंद करने का निर्णय लिया जा चुका है। कचौरी व मीट व्यवसायियों द्वारा पॉलीथिन उपयोग अभी भी हो रहा है। इसे तत्काल बंद कर दिया जाए। कुछ कचौरी व्यवसायियों ने कहा कि ग्राहक चटनी मांगता है उसे कैसे दें। इस पर उन्होंने कहा कि कुल्हड़ या डिब्बे का उपयोग करो, लेकिन पॉलीथिन नहीं। इसी तरह मीट व्यवसायियों ने तर्क दिया कि लोग खुद पॉलीथिन में मांगते हैं। कागज में दे नहीं सकते। इस पर उन्होंने कहा कि गत्ते या पैकिंग डिब्बे रखो और उसी में दो। समझाईश के बाद पॉलीथिन उपयोग पाया जाने पर संबंधित व्यवसायी के खिलाफ नियमानुसार कार्यवाही के साथ दुकान को भी दो दिन के लिए सीज किया जाएगा।
एडीएम सुनीता डागा ने कहा कि पहले की तरह थैला लेकर बाजार जाने की परंपरा जीवित करनी होगी। उन्होंने कपड़े अथवा कागज के थैले का मीट की दुकानों पर उपयोग करने के निर्देश दिए। नगर निगम उपायुक्त राजेश डागा ने बताया कि कोई भी व्यापारी निगम के अंबेडकर भवन में पॉलीथिन जमा करा सकता है।
कलेक्टर ने पॉलीथिन व्यापारियों को 10 दिन का समय दिया
कोटा व्यापार महासंघ के प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को कलेक्टर रविकुमार सुरपुर और एडीएम सिटी सुनीता डागा से भेंट की और पॉलीथिन व्यापारियों को हो रहे भारी नुकसान के बारे अवगत कराया। प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर को बताया कि पूर्व में प्लास्टिक के कई उत्पाद बेचने की अनुमति थी। इसके चलते थैली व्यवसायियों के पास काफी मात्रा में स्टॉक जमा रहता था। स्टॉक वापस भिजवाने के लिए समय दिया जाए। इस पर कलेक्टर ने व्यवसायियों को 10 दिन का समय दिया है। इस दौरान अशोक माहेश्वरी और क्रांति
जैन मौजूद रहे।
Job
Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai