श्रीनाथपुरम स्थित फायर ऑफिस के मोड़ पर शुक्रवार दोपहर एक स्कूल के बच्चों को घर ले जा रहे मैजिक का अचानक दरवाजा खुल गया। इससे मैजिक में बैठी एक मासूम बच्ची गिर पड़ी। हादसे में बुरी तरह घायल बच्ची मौके पर ही बेहोश हो गई। मैजिक में सवार बच्ची की बड़ी बहन भी ऑटो से उतरकर उससे लिपट कर रोने लगी। उसकी चीख-पुकार सुन उधर से गुजर रहे एक राहगीर बेहोश बच्ची को लेकर नए अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचे तो वहां के नर्सिंग स्टाफ ने उसे देखने से मना कर दिया। ओपीडी में पहुंचे तो डॉक्टरों ने पहले पर्ची कटवाने को कहा। काफी जद्दोजहद के बाद बच्ची का इलाज शुरू हुआ।
इधर, भाग रहे मैजिक चालक महेंद्र को लोगों ने पकड़कर पुलिस के हवाले किया, लेकिन थाना पुलिस ने चालक को छोड़ दिया। श्रीनाथपुरम सीआई जयप्रकाश बेनीवाल का तर्क है कि मामले की रिपोर्टर दर्ज नहीं हुई। इस लिए चालक को छोड़ दिया। श्रीनाथपुरम निवासी न्यायिक कर्मचारी गोपाल जैन की दो बेटियां रिद्धि और भक्ति महावीर नगर स्थित शिव ज्योति कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ती हैं। शुक्रवार को स्कूल की छुट्टी होने पर दोनों मैजिक से घर जा रही थीं। श्रीनाथपुरम स्थित फायर ऑफिस के मोड़ पर अचानक मैजिक का गेट खुल गया। इससे रिद्धि नीचे गिरकर घायल हो गई। यह देख बहन भक्ति भी ऑटो से उतर गई और उससे लिपटकर जोर-जोर से रोने लगी। उधर से गुजर रहे पंकज खंडेलवाल बच्ची को अपनी कार से नए अस्पताल लेकर गए जहां फिलहाल उसका उपचार चल रहा है। हादसे के बाद मैजिक चालक महेंद्र वहां से भागने लगा। इस दौरान अभिभावक संघ अध्यक्ष क्रांति तिवारी साथी मनीष गुर्जर के साथ उधर से गुजर रहे थे। गुर्जर ने मैजिक के पीछे कार दौड़ा दी और कुछ ही दूरी पर चालक को पकड़ लिया। उन्होंने चालक महेन्द्र को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया।
सड़क पर मासूम बच्ची को खून से सना देखा तो होश उड़ गए
प्रत्यक्षदर्शी पंकज खंडेलवाल के मुताबिक, मैं कार में पेट्रोल भरवाने के लिए घर से निकला ही था कि फायर स्टेशन के मोड़ पर बच्ची की रोने-बिलखने की आवाज सुनकर में भी वहां रुक गया। देखा तो बच्ची की ड्रेस खून से सनी थी। दूसरी उससे लिपटकर रो रही थी। लोग उन्हें रोता देख रहे थे, लेकिन कोई मदद नहीं कर रहा था। मैं तुरंत दोनों बच्चियों को कार में बैठाकर मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले गया। जहां पहले तो स्ट्रेचर नहीं मिली। मैं बच्ची को गोद में लेकर इमरजेंसी में गया तो वहां कोई डॉक्टर नहीं था। नर्सिंग स्टाफ ने देखने से मना किया तो मैं रूम नंबर 2 में गया। जहां डॉक्टरों ने देखने से पहले पर्चा कटवाने को बोला। मैं चिल्लाया- मैं पर्ची बना लाता हूं, आप एक बार मासूम को देख तो लो। उसे कुछ हो जाएगा तो क्या होगा? लेकिन, वे नहीं माने। मैं वापस पर्ची कटवाने गया और आकर दिखवाया, जिसके बाद बच्ची को ट्रॉमा वार्ड में शिफ्ट किया गया।
स्कूल निदेशक- ऑटो से स्कूल का लेना-देना नहीं
मैजिक बच्चों को घर छोड़ने जा रहा था, उस समय किसी बच्चे ने उसका दरवाजा खोल दिया। इससे रिद्धि नीचे गिर गई। मैजिक व उसके चालक से स्कूल का कोई लेना-देना नहीं है। अभिभावकों ने स्वयं उसे बच्ची को घर से लाने ले जाने के लिए लगवाया होगा। घटना की सूचना मिलते ही मैं खुद अस्पताल जाकर बच्ची से मिलकर आया हूं, वो स्वस्थ है। - महेश गुप्ता, निदेशक, शिव ज्योति स्कूल ग्रुप
शिक्षा विभाग- स्कूल की ही है पूरी जिम्मेदारी
पढ़ाई के साथ बच्चों को सुरक्षित स्कूल लाने और ले जाने की जिम्मेदारी स्कूल संचालकों की है। इसमें स्पीड का भी पूरा ध्यान रखना है। निदेशालय से भी इस संबंध में सख्त निर्देश हैं। शिकायत मिलने पर इस मामले की जांच भी करवाएंगे।
-नरेंद्र कुमार गहलोत, शैक्षिक प्रकोष्ठ अधिकारी, शिक्षा विभाग
जोधपुर और कोटा के पिछले हादसों से नहीं लेते सबक
चार दिन पहले जोधपुर के एक कान्वेंट स्कूल की बालवाहिनी पलट गई थी। हादसे में मासूम जिया (7) का हाथ कट गया, जबकि 24 छात्र-छात्राएं घायल हो गई थीं। कोटा में 5 नवंबर को गिरधरपुरा स्थित संदीप पब्लिक सीनियर सेकंडरी स्कूल की बस पलटने से 12 बच्चे घायल हुए थे। वहीं, दिसंबर माह में ही विद्या मंदिर स्कूल का ऑटो पलट गया था।
इधर, भाग रहे मैजिक चालक महेंद्र को लोगों ने पकड़कर पुलिस के हवाले किया, लेकिन थाना पुलिस ने चालक को छोड़ दिया। श्रीनाथपुरम सीआई जयप्रकाश बेनीवाल का तर्क है कि मामले की रिपोर्टर दर्ज नहीं हुई। इस लिए चालक को छोड़ दिया। श्रीनाथपुरम निवासी न्यायिक कर्मचारी गोपाल जैन की दो बेटियां रिद्धि और भक्ति महावीर नगर स्थित शिव ज्योति कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ती हैं। शुक्रवार को स्कूल की छुट्टी होने पर दोनों मैजिक से घर जा रही थीं। श्रीनाथपुरम स्थित फायर ऑफिस के मोड़ पर अचानक मैजिक का गेट खुल गया। इससे रिद्धि नीचे गिरकर घायल हो गई। यह देख बहन भक्ति भी ऑटो से उतर गई और उससे लिपटकर जोर-जोर से रोने लगी। उधर से गुजर रहे पंकज खंडेलवाल बच्ची को अपनी कार से नए अस्पताल लेकर गए जहां फिलहाल उसका उपचार चल रहा है। हादसे के बाद मैजिक चालक महेंद्र वहां से भागने लगा। इस दौरान अभिभावक संघ अध्यक्ष क्रांति तिवारी साथी मनीष गुर्जर के साथ उधर से गुजर रहे थे। गुर्जर ने मैजिक के पीछे कार दौड़ा दी और कुछ ही दूरी पर चालक को पकड़ लिया। उन्होंने चालक महेन्द्र को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया।
सड़क पर मासूम बच्ची को खून से सना देखा तो होश उड़ गए
प्रत्यक्षदर्शी पंकज खंडेलवाल के मुताबिक, मैं कार में पेट्रोल भरवाने के लिए घर से निकला ही था कि फायर स्टेशन के मोड़ पर बच्ची की रोने-बिलखने की आवाज सुनकर में भी वहां रुक गया। देखा तो बच्ची की ड्रेस खून से सनी थी। दूसरी उससे लिपटकर रो रही थी। लोग उन्हें रोता देख रहे थे, लेकिन कोई मदद नहीं कर रहा था। मैं तुरंत दोनों बच्चियों को कार में बैठाकर मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले गया। जहां पहले तो स्ट्रेचर नहीं मिली। मैं बच्ची को गोद में लेकर इमरजेंसी में गया तो वहां कोई डॉक्टर नहीं था। नर्सिंग स्टाफ ने देखने से मना किया तो मैं रूम नंबर 2 में गया। जहां डॉक्टरों ने देखने से पहले पर्चा कटवाने को बोला। मैं चिल्लाया- मैं पर्ची बना लाता हूं, आप एक बार मासूम को देख तो लो। उसे कुछ हो जाएगा तो क्या होगा? लेकिन, वे नहीं माने। मैं वापस पर्ची कटवाने गया और आकर दिखवाया, जिसके बाद बच्ची को ट्रॉमा वार्ड में शिफ्ट किया गया।
स्कूल निदेशक- ऑटो से स्कूल का लेना-देना नहीं
मैजिक बच्चों को घर छोड़ने जा रहा था, उस समय किसी बच्चे ने उसका दरवाजा खोल दिया। इससे रिद्धि नीचे गिर गई। मैजिक व उसके चालक से स्कूल का कोई लेना-देना नहीं है। अभिभावकों ने स्वयं उसे बच्ची को घर से लाने ले जाने के लिए लगवाया होगा। घटना की सूचना मिलते ही मैं खुद अस्पताल जाकर बच्ची से मिलकर आया हूं, वो स्वस्थ है। - महेश गुप्ता, निदेशक, शिव ज्योति स्कूल ग्रुप
शिक्षा विभाग- स्कूल की ही है पूरी जिम्मेदारी
पढ़ाई के साथ बच्चों को सुरक्षित स्कूल लाने और ले जाने की जिम्मेदारी स्कूल संचालकों की है। इसमें स्पीड का भी पूरा ध्यान रखना है। निदेशालय से भी इस संबंध में सख्त निर्देश हैं। शिकायत मिलने पर इस मामले की जांच भी करवाएंगे।
-नरेंद्र कुमार गहलोत, शैक्षिक प्रकोष्ठ अधिकारी, शिक्षा विभाग
जोधपुर और कोटा के पिछले हादसों से नहीं लेते सबक
चार दिन पहले जोधपुर के एक कान्वेंट स्कूल की बालवाहिनी पलट गई थी। हादसे में मासूम जिया (7) का हाथ कट गया, जबकि 24 छात्र-छात्राएं घायल हो गई थीं। कोटा में 5 नवंबर को गिरधरपुरा स्थित संदीप पब्लिक सीनियर सेकंडरी स्कूल की बस पलटने से 12 बच्चे घायल हुए थे। वहीं, दिसंबर माह में ही विद्या मंदिर स्कूल का ऑटो पलट गया था।
Job
Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai