भारत सरकार के उपक्रम इंस्ट्रूमेंटेशन लिमिटेड (आईएल) की केरल में स्थित पलक्कड़ यूनिट को चलाने के लिए वहां की सरकार तैयार हो गई है। दो दिन पहले हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद वहां की सरकार ने इस उद्योग को अधिग्रहित करने की सैद्धांतिक सहमति भी दे दी। वहीं, आईएल की कोटा यूनिट को लेकर राज्य सरकार की अब तक कोई बैठक नहीं हुई। इन दोनों संकटग्रस्त यूनिटों को चलाने से केंद्र सरकार पहले ही हाथ खड़े कर चुकी है। केंद्रीय भारी उद्योग मंत्रालय ने इसे लेकर गत दिनों दोनों राज्यों की सरकारों को पत्र लिखा था कि यदि वे चाहें तो इन उद्योगों को अधिग्रहित कर लें और चलाएं। इसके बाद केरल सरकार हरकत में आ गई और वहां के सीएम से लेकर उद्योग मंत्री ने एक के बाद एक बैठकें लेकर दो दिन पहले यह तय कर दिया कि पलक्कड़ यूनिट को राज्य सरकार अधिग्रहित करेगी। जबकि कोटा यूनिट को राजस्थान सरकार द्वारा अधिग्रहित किया जाना तो दूर, कोई बैठक भी नहीं हुई है। हालांकि राजस्थान उद्योग विभाग के संयुक्त सचिव ने एक पत्र लिख कोटा यूनिट से कुछ ब्यौरा मांगा था, जो भी करीब एक माह पहले ही भेजा जा चुका।
कर्मचारियों ने बनाया संयुक्त मोर्चा
आईएल को बचाने के लिए कर्मचारियों ने अब संयुक्त मोर्चा बनाया है। संगठन का एक प्रतिनिधिमंडल बारी-बारी से स्थानीय जनप्रतिनिधियों से मिल रहा है और इस उद्योग को बचाने की मांग कर रहा है। पदाधिकारी बुधवार को लाड़पुरा विधायक भवानी सिंह राजावत से भी मिले और सारी स्थिति से अवगत कराया। सांसद ओम बिरला और विधायक प्रहलाद गुंजल से भी मिले हैं।
पहले भी बंद हो चुके कोटा के बड़े उद्योग
भारत सरकार स्पष्ट कर चुकी है कि राज्य सरकार द्वारा अधिग्रहित नहीं किए जाने की स्थिति में कोटा यूनिट को बंद कर दिया जाएगा। यदि यह उद्योग बंद होता है तो कोटा के लिए बड़ा नुकसान होगा। क्योंकि पिछले कई दशकों में कोटा में कोई नया उद्योग लगना तो दूर जेके और सेमटेल जैसे बड़े उद्योग एक-एक कर बंद ही हुए हैं। इससे हजारों कर्मचारी बेरोजगार हुए हैं। आईएल की कोटा यूनिट में भी करीब 1 हजार स्थायी और अस्थायी कर्मचारी हैं।
- मुझे पता चला है कि केरल सरकार वहां की यूनिट को अधिग्रहित करने को तैयार हो गई है। हम भी यही चाहते हैं कि कोटा यूनिट को राज्य सरकार अधिग्रहित करे। इस मामले को लेकर हम सभी जनप्रतिनिधि सीएम और उद्योग मंत्री से मिलेंगे। मैं मानता हूं कि राज्य सरकार इसे बंद नहीं होने देगी, क्योंकि मुख्यमंत्री उद्योगों को लेकर काफी गंभीर हैं। आज भी आईएल के कर्मचारी मेरे पास आए थे। - भवानी सिंह राजावत, विधायक, लाड़पुरा
- मैं लगातार आईएल मामले पर नजर बनाए हुए हूं। केंद्र सरकार के स्तर पर बात की। संसद में भी इस विषय को उठाया है। आईएल के कर्मचारियों की भी मंत्रालय के अधिकारियों से वार्ता कराई थी। अब राज्य सरकार से बात करेंगे। कोई भी उद्योग बंद नहीं होना चाहिए। - ओम बिरला, सांसद
- पार्षद से लेकर प्रधानमंत्री तक भाजपा का है। पीएम मेक इन इंडिया की बात कहते हैं और राज्य सरकार रिसर्जेंट राजस्थान के जरिए उद्योग लगाने के न्यौते देती है। लेकिन उद्योगों को बंद होने से बचाने के कोई प्रयास नहीं हो रहे। यूनिट आज भी चल रही है, ऑर्डर भी आ रहे हैं। इसे चलाने में कहीं कोई दिक्कत नहीं है। बस, हमारे पास वर्किंग कैपिटल की कमी है। आईएल के पास कोटा में ही अरबों की संपत्ति है। हम उम्मीद कर रहे हैं कि कोटा के जनप्रतिनिधि व आमजन आगे आएं और इस उद्योग को बचाएं। - राजेश पारीक, इंस्ट्रूमेंटेशन कर्मचारी संयुक्त मोर्चा
कर्मचारियों ने बनाया संयुक्त मोर्चा
आईएल को बचाने के लिए कर्मचारियों ने अब संयुक्त मोर्चा बनाया है। संगठन का एक प्रतिनिधिमंडल बारी-बारी से स्थानीय जनप्रतिनिधियों से मिल रहा है और इस उद्योग को बचाने की मांग कर रहा है। पदाधिकारी बुधवार को लाड़पुरा विधायक भवानी सिंह राजावत से भी मिले और सारी स्थिति से अवगत कराया। सांसद ओम बिरला और विधायक प्रहलाद गुंजल से भी मिले हैं।
पहले भी बंद हो चुके कोटा के बड़े उद्योग
भारत सरकार स्पष्ट कर चुकी है कि राज्य सरकार द्वारा अधिग्रहित नहीं किए जाने की स्थिति में कोटा यूनिट को बंद कर दिया जाएगा। यदि यह उद्योग बंद होता है तो कोटा के लिए बड़ा नुकसान होगा। क्योंकि पिछले कई दशकों में कोटा में कोई नया उद्योग लगना तो दूर जेके और सेमटेल जैसे बड़े उद्योग एक-एक कर बंद ही हुए हैं। इससे हजारों कर्मचारी बेरोजगार हुए हैं। आईएल की कोटा यूनिट में भी करीब 1 हजार स्थायी और अस्थायी कर्मचारी हैं।
- मुझे पता चला है कि केरल सरकार वहां की यूनिट को अधिग्रहित करने को तैयार हो गई है। हम भी यही चाहते हैं कि कोटा यूनिट को राज्य सरकार अधिग्रहित करे। इस मामले को लेकर हम सभी जनप्रतिनिधि सीएम और उद्योग मंत्री से मिलेंगे। मैं मानता हूं कि राज्य सरकार इसे बंद नहीं होने देगी, क्योंकि मुख्यमंत्री उद्योगों को लेकर काफी गंभीर हैं। आज भी आईएल के कर्मचारी मेरे पास आए थे। - भवानी सिंह राजावत, विधायक, लाड़पुरा
- मैं लगातार आईएल मामले पर नजर बनाए हुए हूं। केंद्र सरकार के स्तर पर बात की। संसद में भी इस विषय को उठाया है। आईएल के कर्मचारियों की भी मंत्रालय के अधिकारियों से वार्ता कराई थी। अब राज्य सरकार से बात करेंगे। कोई भी उद्योग बंद नहीं होना चाहिए। - ओम बिरला, सांसद
- पार्षद से लेकर प्रधानमंत्री तक भाजपा का है। पीएम मेक इन इंडिया की बात कहते हैं और राज्य सरकार रिसर्जेंट राजस्थान के जरिए उद्योग लगाने के न्यौते देती है। लेकिन उद्योगों को बंद होने से बचाने के कोई प्रयास नहीं हो रहे। यूनिट आज भी चल रही है, ऑर्डर भी आ रहे हैं। इसे चलाने में कहीं कोई दिक्कत नहीं है। बस, हमारे पास वर्किंग कैपिटल की कमी है। आईएल के पास कोटा में ही अरबों की संपत्ति है। हम उम्मीद कर रहे हैं कि कोटा के जनप्रतिनिधि व आमजन आगे आएं और इस उद्योग को बचाएं। - राजेश पारीक, इंस्ट्रूमेंटेशन कर्मचारी संयुक्त मोर्चा
Job
Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai