जेकेलोन अस्पताल में सोमवार को एक गर्भवती की सोनोग्राफी रिपोर्ट ने परिजनों को चौंका दिया। रिपोर्ट जैसे ही गायनी विभाग के डॉक्टरों ने देखी तो बोले- तत्काल भर्ती कराओ, बच्चे की जान को खतरा है, ऑपरेशन करना पड़ेगा। 8 माह की गर्भवती कैथूनीपोल निवासी 24 वर्षीय महिला के परिजन यह सुन सन्न रह गए, क्योंकि गर्भावस्था के दौरान उसे कोई तकलीफ नहीं थी। शंका होने पर जब दूसरी जगह प्राइवेट में जाकर सोनोग्राफी कराई तो बताया गया कि सबकुछ सामान्य है।
विश्वास नहीं हुआ तो तीसरी जगह फिर प्राइवेट सोनोग्राफी सेंटर पर गए, वहां भी रिपोर्ट सामान्य आई। अब सवाल यह कि यदि पहली रिपोर्ट के आधार पर जल्दबाजी में डॉक्टर ऑपरेशन कर देते तो कौन जिम्मेदार था ? मामला एएफआई (गर्भाशय के चारों ओर रहने वाले पानी) का है। इसका पता सोनोग्राफी से ही चलता है। महिला के पति हरीश राठौर ने बताया कि जेकेलोन में सुबह 10 बजे सोनोग्राफी कराई थी। रिपोर्ट में एएफआई 5 सेमी से कम बताया गया। रिपोर्ट गायनीकोलॉजिस्ट को दिखाई तो ऑपरेशन को कहा। बाद में दो अलग-अलग प्राइवेट सोनोग्राफी सेंटरों पर जांच कराई। जहां एक में 13 सेमी और दूसरी में 11 से 12 सेमी के बीच बताया गया, जो सामान्य होता है।
ऐसा कैसे संभव ?
एएफआई गर्भाशय के आसपास रहने वाले पानी को बोलते हैं। सामान्य स्थिति में 8 माह की गर्भवती महिला में इसका स्तर 12 से 15 सेमी के बीच होना चाहिए। रेडियोलॉजिस्ट बताते हैं कि यह पानी 4 अलग-अलग पॉकेट में जमा रहता है। चारों काे जोड़कर यह तय किया जाता है। बहुत सी बार गर्भस्थ शिशु के अंग इन पॉकेट्स में से किसी में चले जाते हैं तो यह गड़बड़ होती है। लेकिन, विजुअल इंप्रेशन में सबकुछ स्पष्ट हो जाता है। जब भी ऐसा होता है तो अच्छा रेडियोलॉजिस्ट विजुअल इंप्रेशन जरूर देखता है। उसके बाद ही रिपोर्ट देता है। इस मामले में शायद ऐसा नहीं हुआ। ऐसे मामलों में उपलब्ध गायनीकोलॉजिस्ट को बुलाकर भी विजुअल इंप्रेशन दिखाया जा सकता है, ताकि एक राय बनाई जा सके।
- वैसे मैं इस विषय का एक्सपर्ट नहीं हूं, लेकिन फिर भी इतना डिफरेंस नहीं आना चाहिए। मैं इस मामले को दिखवाता हूं। डॉ. आरके गुलाटी, अधीक्षक, जेकेलोन अस्पताल
विश्वास नहीं हुआ तो तीसरी जगह फिर प्राइवेट सोनोग्राफी सेंटर पर गए, वहां भी रिपोर्ट सामान्य आई। अब सवाल यह कि यदि पहली रिपोर्ट के आधार पर जल्दबाजी में डॉक्टर ऑपरेशन कर देते तो कौन जिम्मेदार था ? मामला एएफआई (गर्भाशय के चारों ओर रहने वाले पानी) का है। इसका पता सोनोग्राफी से ही चलता है। महिला के पति हरीश राठौर ने बताया कि जेकेलोन में सुबह 10 बजे सोनोग्राफी कराई थी। रिपोर्ट में एएफआई 5 सेमी से कम बताया गया। रिपोर्ट गायनीकोलॉजिस्ट को दिखाई तो ऑपरेशन को कहा। बाद में दो अलग-अलग प्राइवेट सोनोग्राफी सेंटरों पर जांच कराई। जहां एक में 13 सेमी और दूसरी में 11 से 12 सेमी के बीच बताया गया, जो सामान्य होता है।
ऐसा कैसे संभव ?
एएफआई गर्भाशय के आसपास रहने वाले पानी को बोलते हैं। सामान्य स्थिति में 8 माह की गर्भवती महिला में इसका स्तर 12 से 15 सेमी के बीच होना चाहिए। रेडियोलॉजिस्ट बताते हैं कि यह पानी 4 अलग-अलग पॉकेट में जमा रहता है। चारों काे जोड़कर यह तय किया जाता है। बहुत सी बार गर्भस्थ शिशु के अंग इन पॉकेट्स में से किसी में चले जाते हैं तो यह गड़बड़ होती है। लेकिन, विजुअल इंप्रेशन में सबकुछ स्पष्ट हो जाता है। जब भी ऐसा होता है तो अच्छा रेडियोलॉजिस्ट विजुअल इंप्रेशन जरूर देखता है। उसके बाद ही रिपोर्ट देता है। इस मामले में शायद ऐसा नहीं हुआ। ऐसे मामलों में उपलब्ध गायनीकोलॉजिस्ट को बुलाकर भी विजुअल इंप्रेशन दिखाया जा सकता है, ताकि एक राय बनाई जा सके।
- वैसे मैं इस विषय का एक्सपर्ट नहीं हूं, लेकिन फिर भी इतना डिफरेंस नहीं आना चाहिए। मैं इस मामले को दिखवाता हूं। डॉ. आरके गुलाटी, अधीक्षक, जेकेलोन अस्पताल
Job
Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai