सफाई में महाझूठ के बाद अब डीजल की पर्चियों में सामने आया भ्रष्टाचार

सफाई में महाझूठ के बाद अब डीजल की पर्चियों में सामने आया भ्रष्टाचार

सफाई में महाझूठ के बाद अब डीजल की पर्चियों में सामने आया भ्रष्टाचार

नगर निगम गैराज से वाहन रोज निकलते हैं और फील्ड में नजर भी आते हैं, लेकिन कचरा फिर भी पूरा नहीं उठता। कचरा प्वाइंट से लेकर कॉलोनियां तक कचरे से अटी रहती हैं। भास्कर टीम ने शनिवार को नगर निगम गैराज पर छापा मार तो डंपरों के डीजल में भी भ्रष्टाचार मिला। अधिकतर डंपर चालक डीजल कम भरवाते हैं। बचे डीजल का पैसा आपस में बांट लेते हैं। इस दौरान पकड़े गए डंपरों के ड्राइवरों ने ही स्वीकार किया कि वो दूसरे राउंड में पेट्रोल पंप पर केवल नंबर नोट करवाकर पर्ची देते हैं डीजल नहीं भरवाते हैं। इसके बदले पंप कर्मचारी से 32 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से नकद पैसे मिलते हैं, जबकि डीजल का रेट 49.50 रुपए है। 17.50 रुपए पंप कर्मियों की जेब में जाता है। निगम के गैराज अनुभाग के जेसीबी, डंपर, बिंस प्लेसर समेत 74 वाहन कचरा परिवहन में लगे हुए हैं। इनमें से अधिकांश वाहन पूरा डीजल नहीं भरवाते हैं और निगम से डीजल का पूरा भुगतान होता है।

दूसरी पारी में गड़बड़ी करते हैं डंपर चालक
निगम के डंपर और जेसीबी को प्रति ट्रिप 10 लीटर डीजल दिया जाता है। उन्हें 4 ट्रिप लगानी होती है। यानि 40 लीटर डीजल रोज भरवाना होता है। ये डीजल दो राउंड में निर्धारित पेट्रोल पंप से ही भरवाना होता है। इसके लिए निगम गैराज के टाइम कीपर मुरली शर्मा द्वारा पर्ची दी जाती है। वाहन चालक पहले राउंड में तो सुबह 8 बजे 20 लीटर डीजल भरवाते हैं। गड़बड़ी दूसरे राउंड में होती है। अधिकतर चालक डीजल नहीं भरवाते हैं। सीधे पंप पर जाकर पर्ची देते हैं और उसके बदले में नकद राशि ले लेते हैं।

ऐसे हुआ खुलासा
दोपहर 3.09 बजे निगम का डंपर पेट्रोल पंप पर पहुंचा। चालक ने डंपर पंप पर खड़ा किया और वहां बने केबिन में गया। केबिन से लौटकर बाहर खड़े कर्मचारी से बात की। कर्मचारी ने उसे दो बार में रुपए दिए। उसने रुपए सीधे जेब में रखे और डंपर में बैठकर वहां से निकल गया। इस दौरान उसने डीजल भी नहीं भरवाया। शाम को 5.45 बजे यही डंपर वापस गैराज आया तो भास्कर की टीम ने उस चालक को पकड़ा। लॉग बुक देखी तो उसने 172035 से लेकर 172096 की रीडिंग भरी थी। यानि वो दिनभर में 61 किलोमीटर चला। वहां खड़े टाइम कीपर ने उससे कहा कि तुम्हारी गाड़ी का तो मीटर बंद है, तो उसका कहना था कि अंदाज से भरा है। भास्कर रिपोर्टर ने उससे पूछा कि केबिन में क्यों गया और कर्मचारी से उसने पैसे क्यों लिए तो उसने पूरे घोटाले का सच उगल दिया और बताया कि पंप कर्मचारी ने उसे 660 रुपए दिए हैं।
जीपीएस सिस्टम कहां गया पता नहीं
इन वाहनों की मॉनिटरिंग के लिए पिछली महापौर डॉ. रत्ना जैन ने डंपर व जेसीबी में जीपीएस सिस्टम लगाया था ताकि उनकी लोकेशन का पता चलता रहे। उस सिस्टम को उखाड़ दिया गया। ये जीपीएस कहां गया गैराज में किसी को पता नहीं। जबकि, इस पर काफी पैसा खर्च हुआ था।
मैं तो यहां से सुबह पर्ची दे देता हूं और शाम को पंप पर जाकर पर्ची देता हूं। इस बीच चालक पूरा डीजल भरवा रहे हैं या नहीं, और कहां जा रहे हैं इसकी मॉनिटरिंग का कोई सिस्टम नहीं है। वाहन हमारे अनुभाग के हैं और काम स्वास्थ्य अनुभाग में करते हैं।
- मुरलीधर शर्मा, गैराज टाइमकीपर

^डीजल की गड़बड़ी का शक तो हमें पहले से ही था। इस पर निगरानी के लिए कई बार अधिकारियों को कहा भी था। इस सिस्टम को बदलने के लिए नई व्यवस्था की जाएगी। साथ ही डंपरों में जीपीएस सिस्टम फिर से लगवाया जाएगा।
-गोपाल मंडा, अध्यक्ष सफाई समिति

^पहले भी शिकायत मिली थी। एक कर्मचारी को हटाया गया था। पूर्व एक्सईएन चोकनीवाल से मैंने खुद शिकायत की थी और चालकों द्वारा डीजल निकालकर बेचते हुए फोटो भी दिए थे। आगे से ऐसा नहीं होने दूंगा। - संजय जैन, पेट्रोल पंप मालिक

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2 Comments

  1. Visitor Photo
    By : Amritlal

    Job

  2. Visitor Photo
    By : Devesh

    Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai

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