कोटा शहर में लगातार कोचिंग स्टूडेंट्स की आत्महत्या के मामले सामने आने के बाद अब सरकार के प्रतिनिधि, प्रशासन और कोचिंग संचालक आत्महत्या रोकने की बातें कर रहे हैं। लेकिन, इन बच्चों को आखिर ऐसी कौन सी परेशानी थी कि नौबत आत्महत्या तक पहुंच गई।
भास्कर ने अब तक का सबसे बड़ा इनीशिएटिव लेते हुए छह बच्चों के सुसाइड नोट की स्टडी शहर के तीन प्रमुख मनोचिकित्सकों से करवाई। भास्कर के एक्सपर्ट पैनल ने तीन दिनों तक छह सुसाइड नोट की गहनता से स्टडी की ताकि ये पता चल सके कि ये नोट लिखते वक्त स्टूडेंट्स की मनोस्थिति क्या थी। आखिर किन कारणों से वे ऐसा कदम उठाने को मजबूर हुए। इन सुसाइड नोट्स में हर सवाल का जवाब है। इन सुसाइड नोट्स में एक बात कॉमन है कि इन सभी बच्चों को कोचिंग संस्थान, टीचर्स और हॉस्टल से किसी भी प्रकार का लगाव नहीं था। किसी भी नोट में बच्चों ने इनमें से किसी एक के प्रति संवेदना व्यक्त नहीं की है।
सॉरी मम्मी
मुझे याद करके कभी मत रोना। क्योंकि मैं आपका अच्छा बेटा नहीं हूं। यार मम्मी बहुत प्रेशर था मेरे ऊपर। सब यही कहते थे कि 70% से कम नहीं आने चाहिए-70% से कम नहीं आने चाहिए। मेरे दिमाग में एक ही चीज आती थी कि अगर मेहनत करने के बाद भी 70% से ऊपर नहीं आए तो क्या होगा-मैं इस टेंशन को नहीं झेल सका। -आत्महत्या करने वाले एक छात्र के सुसाइड नोट का अंश
1- फाइंडिंग
->कॅरियर बनाने का प्रेशर और बड़ी उम्मीदें।
->लाइफ के प्रति नेगेटिव एप्रोच।
->सिलेक्शन नहीं होने का डर, एग्जाम में खराब परफाॅरमेंस का डर।
सुझाव
->सही टाइम पर काउंसलिंग।
->काउंसलिंग के जरिए एप्रोच को बदलना।
->सीवियर डिप्रेशन का मेडिकल ट्रीटमेंट।
फाइंडिंग- 2
->अकेलेपन का बढ़ता अहसास।
->अपने आप को दुनिया से कटा हुआ मानना।
->अपनी पहचान बनाने की तमन्ना की जद्दोजहद।
सुझाव
->हॉस्टल में कॉमन रूम की व्यवस्था।
->सोसायटी की ओर संवाद स्थापित किया जाना।
->प्रेशर की जगह सही कॅरियर काउंसलिंग।
फाइंडिंग- 3
->खुद के बारे में ही नकारात्मक सोच बना लेना।
->लगातार कोचिंग में गिरती हुई परफॉरमेंस।
->घर से दूरी, मोटिवेशन की कमी।
सुझाव
->मोटिवेशन और काउंसलिंग समय पर दी जाती।
->बच्चे की क्षमता का आकलन सही किया जाए।
->तनाव से दूर करने के उपाय किए जाते।
फाइंडिंग- 4
->लगातार बढ़ता आत्मग्लानि का अहसास।
->कॅरियर को लेकर कन्फ्यूजन।
->एक निर्णय गलत लेने पर उस पर बार-बार सोचना।
सुझाव
->एक गलती पर बार-बार पछताने की जगह आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया जाता।
->आत्मग्लानि को काउंसलिंग से दूर किया जाता।
फाइंडिंग- 5
->दोस्तों से नाराजगी और बढ़ती दूरियां।
->पढ़ाई से ध्यान हटकर अन्य चीजों पर लगना।
->खुद की गलती का अहसास होने पर खुद को दोषी ठहराना।
सुझाव
->परिजनों को साथ बैठाकर काउंसलिंग की जाती।
->हॉस्टल संचालक एक्टीविटी पर ध्यान रखते।
->बच्ची की समस्या पर ध्यान देकर समाधान होता।
फाइंडिंग- 6
->अच्छे करियर का बढ़ता प्रेशर और पढ़ाई में खराब परफॉरमेंस की चिंता।
->कॉम्पटीशन और दूसरों से खुद की तुलना पर ध्यान देना।
->आकलन बिना कोचिंग में दाखिला।
सुझाव
->पॉजीटिव सोच की काउंसलिंग की जाती।
->टीचर्स से अपनी समस्याओं का जिक्र करना।
->एकेडमिक बैकग्राउंड पर ही कोर्स का चयन।
भास्कर एक्सपर्ट पैनल ने इन घटनाओं को रोकने के लिए सभी की अलग-अलग जिम्मेदारी बताई-
क्या करें कोचिंग संचालक
->स्क्रीनिंग करें: एडमिशन से पहले एप्टीट्यूड व एटीट्यूड टेस्ट लें। यदि बच्चा उस स्तर का नहीं है तो उसे एडमिशन ही नहीं दें।
->बच्चे के साथ पैरेंट्स को भी बुलाएं और उनकी भी काउंसलिंग करें। उन्हें समझाएं कि बच्चे पर अनावश्यक दबाव न डालें।
->खेलकूद गतिविधियां कराएं: यह महत्वपूर्ण पार्ट है, लेकिन कोई भी कोचिंग ऐसी एक्टिविटी नहीं कराता।
भास्कर ने अब तक का सबसे बड़ा इनीशिएटिव लेते हुए छह बच्चों के सुसाइड नोट की स्टडी शहर के तीन प्रमुख मनोचिकित्सकों से करवाई। भास्कर के एक्सपर्ट पैनल ने तीन दिनों तक छह सुसाइड नोट की गहनता से स्टडी की ताकि ये पता चल सके कि ये नोट लिखते वक्त स्टूडेंट्स की मनोस्थिति क्या थी। आखिर किन कारणों से वे ऐसा कदम उठाने को मजबूर हुए। इन सुसाइड नोट्स में हर सवाल का जवाब है। इन सुसाइड नोट्स में एक बात कॉमन है कि इन सभी बच्चों को कोचिंग संस्थान, टीचर्स और हॉस्टल से किसी भी प्रकार का लगाव नहीं था। किसी भी नोट में बच्चों ने इनमें से किसी एक के प्रति संवेदना व्यक्त नहीं की है।
सॉरी मम्मी
मुझे याद करके कभी मत रोना। क्योंकि मैं आपका अच्छा बेटा नहीं हूं। यार मम्मी बहुत प्रेशर था मेरे ऊपर। सब यही कहते थे कि 70% से कम नहीं आने चाहिए-70% से कम नहीं आने चाहिए। मेरे दिमाग में एक ही चीज आती थी कि अगर मेहनत करने के बाद भी 70% से ऊपर नहीं आए तो क्या होगा-मैं इस टेंशन को नहीं झेल सका। -आत्महत्या करने वाले एक छात्र के सुसाइड नोट का अंश
1- फाइंडिंग
->कॅरियर बनाने का प्रेशर और बड़ी उम्मीदें।
->लाइफ के प्रति नेगेटिव एप्रोच।
->सिलेक्शन नहीं होने का डर, एग्जाम में खराब परफाॅरमेंस का डर।
सुझाव
->सही टाइम पर काउंसलिंग।
->काउंसलिंग के जरिए एप्रोच को बदलना।
->सीवियर डिप्रेशन का मेडिकल ट्रीटमेंट।
फाइंडिंग- 2
->अकेलेपन का बढ़ता अहसास।
->अपने आप को दुनिया से कटा हुआ मानना।
->अपनी पहचान बनाने की तमन्ना की जद्दोजहद।
सुझाव
->हॉस्टल में कॉमन रूम की व्यवस्था।
->सोसायटी की ओर संवाद स्थापित किया जाना।
->प्रेशर की जगह सही कॅरियर काउंसलिंग।
फाइंडिंग- 3
->खुद के बारे में ही नकारात्मक सोच बना लेना।
->लगातार कोचिंग में गिरती हुई परफॉरमेंस।
->घर से दूरी, मोटिवेशन की कमी।
सुझाव
->मोटिवेशन और काउंसलिंग समय पर दी जाती।
->बच्चे की क्षमता का आकलन सही किया जाए।
->तनाव से दूर करने के उपाय किए जाते।
फाइंडिंग- 4
->लगातार बढ़ता आत्मग्लानि का अहसास।
->कॅरियर को लेकर कन्फ्यूजन।
->एक निर्णय गलत लेने पर उस पर बार-बार सोचना।
सुझाव
->एक गलती पर बार-बार पछताने की जगह आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया जाता।
->आत्मग्लानि को काउंसलिंग से दूर किया जाता।
फाइंडिंग- 5
->दोस्तों से नाराजगी और बढ़ती दूरियां।
->पढ़ाई से ध्यान हटकर अन्य चीजों पर लगना।
->खुद की गलती का अहसास होने पर खुद को दोषी ठहराना।
सुझाव
->परिजनों को साथ बैठाकर काउंसलिंग की जाती।
->हॉस्टल संचालक एक्टीविटी पर ध्यान रखते।
->बच्ची की समस्या पर ध्यान देकर समाधान होता।
फाइंडिंग- 6
->अच्छे करियर का बढ़ता प्रेशर और पढ़ाई में खराब परफॉरमेंस की चिंता।
->कॉम्पटीशन और दूसरों से खुद की तुलना पर ध्यान देना।
->आकलन बिना कोचिंग में दाखिला।
सुझाव
->पॉजीटिव सोच की काउंसलिंग की जाती।
->टीचर्स से अपनी समस्याओं का जिक्र करना।
->एकेडमिक बैकग्राउंड पर ही कोर्स का चयन।
भास्कर एक्सपर्ट पैनल ने इन घटनाओं को रोकने के लिए सभी की अलग-अलग जिम्मेदारी बताई-
क्या करें कोचिंग संचालक
->स्क्रीनिंग करें: एडमिशन से पहले एप्टीट्यूड व एटीट्यूड टेस्ट लें। यदि बच्चा उस स्तर का नहीं है तो उसे एडमिशन ही नहीं दें।
->बच्चे के साथ पैरेंट्स को भी बुलाएं और उनकी भी काउंसलिंग करें। उन्हें समझाएं कि बच्चे पर अनावश्यक दबाव न डालें।
->खेलकूद गतिविधियां कराएं: यह महत्वपूर्ण पार्ट है, लेकिन कोई भी कोचिंग ऐसी एक्टिविटी नहीं कराता।
->क्लास रूम छोटे हों, ताकि एक साथ कम बच्चे बैठें। बच्चे कम होंगे तो टीचर का प्रत्येक बच्चे पर अटेंशन रहेगा।
Job
Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai