आरपीएफ का स्निफर डॉग शेरा 9 साल 10 माह की सेवा कर बुधवार को रिटायर हो गया। उसे विस्फोटक व मादक पदार्थ का पता लगाने का प्रशिक्षण प्राप्त था। बुधवार को उसकी नीलामी की गई। नीलामी के लिए चार लोग पहुंचे। महात्मा गांधी कॉलोनी निवासी लाला भाई ने 4 हजार की बोली लगाई। बाद में हैंडलर हेड कांस्टेबल उदयसिंह ने शेरा को लाला भाई को सौंप दिया।
खानपान पर हर महीने खर्च होते थे 4 हजार: स्निफर डॉग जब तक आरपीएफ में रहा उसे प्रतिमाह 4 हजार 115 रुपए खानपान के लिए मिलते थे। ये पैसे हैंडलर को दिए जाते थे। डॉक्टर के बताए चार्ट के अनुसार ही शेरा को डाइट दी जाती थी।
10 साल तक सेवा देता है स्निफर डॉग
आरपीएफ में स्निफर व ट्रैकर डॉग की सेवा केवल 10 साल तक ही ली जा सकती है। इनके कार्यकाल के भी नियम बने हुए हैं। आरपीएफ कमाण्डेंट मनोज कुमार सिंह ने बताया कि आरपीएफ में स्निफर डॉग विस्फोटक व मादक पदार्थों का पता लगाने के लिए होते हैं। जबकि ट्रैकर चोरी की वारदातें खोलने में सहयोग करते हैं। कम उम्र में ही आरपीएफ एलसिशियन डॉग को लेकर उसे प्रशिक्षित करती है। इनके लिए प्रशिक्षण केंद्र दिल्ली व हैदराबाद में खुले हैं। सेवा के दौरान समय-समय पर डॉग का डॉक्टरों से चेकअप करवाया जाता है।
खानपान पर हर महीने खर्च होते थे 4 हजार: स्निफर डॉग जब तक आरपीएफ में रहा उसे प्रतिमाह 4 हजार 115 रुपए खानपान के लिए मिलते थे। ये पैसे हैंडलर को दिए जाते थे। डॉक्टर के बताए चार्ट के अनुसार ही शेरा को डाइट दी जाती थी।
10 साल तक सेवा देता है स्निफर डॉग
आरपीएफ में स्निफर व ट्रैकर डॉग की सेवा केवल 10 साल तक ही ली जा सकती है। इनके कार्यकाल के भी नियम बने हुए हैं। आरपीएफ कमाण्डेंट मनोज कुमार सिंह ने बताया कि आरपीएफ में स्निफर डॉग विस्फोटक व मादक पदार्थों का पता लगाने के लिए होते हैं। जबकि ट्रैकर चोरी की वारदातें खोलने में सहयोग करते हैं। कम उम्र में ही आरपीएफ एलसिशियन डॉग को लेकर उसे प्रशिक्षित करती है। इनके लिए प्रशिक्षण केंद्र दिल्ली व हैदराबाद में खुले हैं। सेवा के दौरान समय-समय पर डॉग का डॉक्टरों से चेकअप करवाया जाता है।
Job
Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai