हाल ही सूचना प्रोद्योगिकी विभाग की ओर से भामाशाह कार्ड बनकर तैयार हुए है। इन भामाशाह कार्डों के वितरण की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत को दी गई है। सरकार की ओर से पिछले साल साल से ही चलाई गई इस योजना में एक कार्ड़ में सभी प्रकार की सूचनाएं मुद्रित है। इसी कार्ड में आधार कार्ड नम्बर, बैंक खाता संख्या, पहचान पत्र संख्या, जांब कार्ड संख्या, मुखिया की जन्म तिथि अंकित होती है। सरकार के अनुसार राज्य सरकार की समस्त योजनाएं इसी कार्ड से ही मिलेगी।
यहां तक की हाल ही में उच्च शिक्षण संस्थाओं में मिलने वाली छात्रवृति के लिए भी इसकी नामांकन संख्या मांगी जा रही है। ग्राम पंचायत सूत्रों के अनुसार कस्बे में 690 परिवारों ने भामाशाह बनवाने के लिए नामांकन करवाया था। उनमें से 560 परिवारों के भामाशाह कार्ड बन चुके है। अब ग्राम पंचायत के कार्मिकों का उनको बाटां जा रहा है लेकिन, 80 फीसदी भामाशाह कार्ड में जन्मतिथि गलत मुद्रित है। उन सभी कार्डो में एक जनवरी ही अंकित है। भविष्य में सभी प्रकार की योजनाओं में काम आने वाला महत्वपूर्ण कार्ड में इतनी बड़ी गलती होना सूचना प्रोद्योगिकी विभाग की तकनीकी की बड़ी चूक को दर्शाता है।
अधिकारी कहते है नहीं दिए उचित दस्तावेज
जब इसको लेकर जिला सूचना प्रोद्योगिकी विभाग के उपनिदेशक महेंद्रपाल से पूछा तो बताया कि जब यह कार्ड बनाया गया था तो उस समय लोगों ने जन्मतिथि से संबधी दस्तावेज जमा नहीं करवाए। राशन कार्ड में जो उम्र लिखी थी। आॅपरेटरों ने उसी के अनुसार आयु बनाकर कम्प्यूटर में भर दी है। लोगों को जन्मतिथि में सुधार करवाना है तो नजदीकी ई-मित्र पर जाकर सही करवा ले।
कार्ड में त्रुटि तो कैसे बनेगा पहचान का आधार
जब यह कार्ड बनाए गए थे। उस समय सरकार की ओर से करोेंड़ों रूपए खर्च कर शिविर लगाकर भामाशाह में नामांकन करवाया था। तब लोगों को बताया गया था कि भविष्य में राजस्थान सरकार की ओर से चलाई जाने वाली सभी योजनाओं में यह महत्पूर्ण आधार होगा। वर्तमान में भी राज्य सरकार की ओर से संचालित कई योजनाओं में इसे लागू कर भी दिया है, लेकिन अपनी पहचान के लिए एक आवश्यक दस्तावेज माने जाने वाले भामाशाह कार्ड में जन्मतिथि में त्रुटी होना बहुत बड़ी बात है। कार्ड में गलत जानकारी के कारण यह कैसे पहचान का आधार बनेगा। यह इसके आधार पर सवाल उठता है।
यहां तक की हाल ही में उच्च शिक्षण संस्थाओं में मिलने वाली छात्रवृति के लिए भी इसकी नामांकन संख्या मांगी जा रही है। ग्राम पंचायत सूत्रों के अनुसार कस्बे में 690 परिवारों ने भामाशाह बनवाने के लिए नामांकन करवाया था। उनमें से 560 परिवारों के भामाशाह कार्ड बन चुके है। अब ग्राम पंचायत के कार्मिकों का उनको बाटां जा रहा है लेकिन, 80 फीसदी भामाशाह कार्ड में जन्मतिथि गलत मुद्रित है। उन सभी कार्डो में एक जनवरी ही अंकित है। भविष्य में सभी प्रकार की योजनाओं में काम आने वाला महत्वपूर्ण कार्ड में इतनी बड़ी गलती होना सूचना प्रोद्योगिकी विभाग की तकनीकी की बड़ी चूक को दर्शाता है।
अधिकारी कहते है नहीं दिए उचित दस्तावेज
जब इसको लेकर जिला सूचना प्रोद्योगिकी विभाग के उपनिदेशक महेंद्रपाल से पूछा तो बताया कि जब यह कार्ड बनाया गया था तो उस समय लोगों ने जन्मतिथि से संबधी दस्तावेज जमा नहीं करवाए। राशन कार्ड में जो उम्र लिखी थी। आॅपरेटरों ने उसी के अनुसार आयु बनाकर कम्प्यूटर में भर दी है। लोगों को जन्मतिथि में सुधार करवाना है तो नजदीकी ई-मित्र पर जाकर सही करवा ले।
कार्ड में त्रुटि तो कैसे बनेगा पहचान का आधार
जब यह कार्ड बनाए गए थे। उस समय सरकार की ओर से करोेंड़ों रूपए खर्च कर शिविर लगाकर भामाशाह में नामांकन करवाया था। तब लोगों को बताया गया था कि भविष्य में राजस्थान सरकार की ओर से चलाई जाने वाली सभी योजनाओं में यह महत्पूर्ण आधार होगा। वर्तमान में भी राज्य सरकार की ओर से संचालित कई योजनाओं में इसे लागू कर भी दिया है, लेकिन अपनी पहचान के लिए एक आवश्यक दस्तावेज माने जाने वाले भामाशाह कार्ड में जन्मतिथि में त्रुटी होना बहुत बड़ी बात है। कार्ड में गलत जानकारी के कारण यह कैसे पहचान का आधार बनेगा। यह इसके आधार पर सवाल उठता है।
Job
Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai