6 माह का कोर्स 2 माह में पूरा करना था अंजली को, माता पिता ने प्रशासन से लगाई गुहार

6 माह का कोर्स 2 माह में पूरा करना था अंजली को, माता पिता ने प्रशासन से लगाई गुहार

6 माह का कोर्स 2 माह में पूरा करना था अंजली को, माता पिता ने प्रशासन से लगाई गुहार

पढ़ाई के तनाव में शनिवार देर रात सुसाइड करने वाली एलन कोचिंग की स्टूडेंट अंजली के माता-पिता मुरादाबाद से सोमवार को कोटा पहुंचे। एमबीएस के पोस्टमार्टम रूम के बाहर फफकते हुए मां बोलीं कि 2 दिन पहले अंजली से बात हुई थी। वो कह रही थी उसे 6 माह का कोर्स 2 माह में पूरा करना है। कोर्स की टेंशन उसे इतनी ज्यादा थी कि उसने दीपावली पर घर आने से मना कर दिया था। हमने समझाया कि कोर्स छूटे तो कोई बात नहीं पर घर जरूर आना। परिजन बोले- हमारी अंजली के साथ दीपावली मनाने की बेहद इच्छा थी। इस दौरान अंजली की मां पूरे समय चुप रही, बस वो अंजली, अंजली बोलते-बोलते बार-बार दहाड़े मार-मार कर रो रही थीं।
सरकार जागे, रातों-रात खड़ा नहीं हुआ सवाल
कोटा कहीं सुसाइड सिटी के रूप में बदनाम न हो जाए। यह सवाल अचानक ही नहीं खड़ा हो गया है। स्टूडेंट्‌स द्वारा सुसाइड के लगातार बढ़ते मामले यह चिंता बढ़ा रहे हैं। इस साल जून से नवंबर तक के सेशन में 9 छात्र-छात्राओं ने सुसाइड किया। बीते 30 दिन में ही 5 स्टूडेंट सुसाइड कर चुके हैं। फैक्ट्री में दिन रात जुटे रहने वाले मजदूरों और कोचिंग स्टूडेंट्‌स का जीवन एक जैसा हो गया है। एमबीबीएस, ट्रिपलआईटी, आईआईटी जैसे तमगे हासिल करने में सफलता पाने के लिए स्टूडेंट्स कोचिंग रूपी फैक्ट्री में दिन-रात जुटे रहते हैं।

डेढ़ लाख से ज्यादा बच्चे कोचिंग ले रहे हैं कोटा में
2014
बेंगलुरू49
भोपाल46
कोटा45
दिल्ली45
पूना40
मुंबई35
2013
कानपुर89
बेंगलुरू74
मुंबई53
दिल्ली42
कोटा33
तीन स्तरों पर बदलाव रोक सकता है ऐसी घटनाएं
सरकार यह करे
-कोटा में कोचिंग व हॉस्टल के आर्थिक योगदान को देखते हुए बायलाॅज बनाएं।
-टैक्स से मिलने वाली राशि में से कुछ हिस्सा खर्च कर बच्चों के लिए एम्यूजमेंट जोन बनाएं।
-काउंसिलिंग सेंटर खोलें।
कोचिंग और हॉस्टल
-बड़े एग्जाम में फाइट नहीं कर सकने वाले छात्रों को छोटे एग्जाम के लिए तैयार करें। पैरेंट्स को भी सच बताएं।
-क्लास में बच्चों की संख्या सीमित हो।
-लक्ष्य पाने के लिए बच्चों को इतना प्रेरित न करें कि वो अवसाद में आ जाएं।
पैरेंट्स और समाज
-बच्चे की क्षमता समझें, उन्हें अपने सपनों के लिए बड़ी प्रतियोगी परीक्षा के तनाव में न झोंके। बच्चा जो बनना चाहता है वही बनने दें।
-अन्य बच्चों से तुलना कर या उनके जैसा बनने का प्रेशर न डालें।

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2 Comments

  1. Visitor Photo
    By : Amritlal

    Job

  2. Visitor Photo
    By : Devesh

    Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai

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