एग्जाम को कंसलटेंसी फंड बता छह साल में 55 लाख रुपए उठा लिए

एग्जाम को कंसलटेंसी फंड बता छह साल में 55 लाख रुपए उठा लिए

एग्जाम को कंसलटेंसी फंड बता छह साल में 55 लाख रुपए उठा लिए


इनका जवाब मिलने के बाद वसूली की कार्रवाई की जाएगी। जानकारी के मुताबिक राजकीय अभियांत्रिकी कॉलेज में वर्ष 2008-09, 2009-10, 2011-12 एवं 2012-13 में कंसलटेंसी फंड बताकर राजस्थान राज्य विद्युत प्रसारण उत्पादन एवं वितरण निगम लिमिटेड की भर्ती परीक्षा करवाई गई थी। जबकि कॉलेज प्रशासन का मानना है कि एग्जाम अलग होती है, कंसलटेंसी फंड अलग होता है। कंसलटेंसी में केवल टेस्टिंग संबंधित व प्लांट निर्माण संबंधी कार्य होते हैं।
तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रमुख शासन सचिव ने अपनी जांच रिपोर्ट में इन प्राचार्यों को एग्जाम को कंसलडेंसी फंड बताकर लाखों रुपए का भुगतान उठाकर फर्जीवाड़ा करने का दोषी माना है। इनमें से एक प्राचार्य पर तो नियमों को ताक पर रखकर 5-5 लाख रुपए के दो भुगतान उठाने का भी आरोप है। जबकि 5 लाख से अधिक के भुगतान पर प्रमुख शासन सचिव के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं।
साथ ही इस मामले को दबाए रखने के लिए इन प्राचार्यों ने हर साल ऑडिट टीम से भी कंसलटेंसी फंड को अलग रखा। कंसलटेंसी का व्यय प्राप्त घटकों के अनुपात में नहीं किया गया, जो 15 प्रतिशत से अधिक है। इस मामले में दोषी अधिकारियों में से कुछ ने कोर्ट की शरण ली है। फिलहाल ये मामला कोर्ट में विचाराधीन है।

शासन सचिव के हस्ताक्षर से बचने के लिए एेसे किया खेल

रिपोर्ट के मुताबिक सत्र 2011-12 में राजस्थान राज्य विद्युत प्रसारण उत्पादन एवं वितरण निगम लिमिटेड की विभिन्न भर्ती परीक्षाएं करवाई गई। इन परीक्षाओं में आयोजन के लिए तत्कालीन प्राचार्य नेमीचंदसिंह ने 2 अगस्त 2011 को चार-चार लाख रुपए की अग्रिम राशि उठाई। इसके बाद दिनांक 23 अगस्त 2011 को 5 लाख की बिना आवश्यकता के चेक जारी किया गया। यदि राशि की आवश्यकता होती तो उस दिन राशि आहरित की जाती।
24 अगस्त को दोनों चेकों की राशि रुपए 10 लाख एक साथ आहरित की गई। इससे स्पष्ट होता है कि प्रमुख शासन सचिच के हस्ताक्षरों से बचने के लिए ऐसा किया गया। इससे शिकायतकर्ता द्वारा कही गई बात की पुष्टि होती है। जबकि प्राचार्य को केवल 1 लाख का चेक साइन करने का अधिकार है।

साॅफ्टवेयर के नाम पर हर साल उठाया भुगतान

कंसलटेंसी फंड से कराई जा रही परीक्षा के लिए ऑनलाइन सॉफ्टवेयर बनाया गया था, जो कॉलेज स्टाफ ने ही बनाया था। भर्ती परीक्षा में प्रयोग में लिए जाने वाले साफ्टवेयर निर्माण के लिए प्रथम बार हुई परीक्षा के लिए सॉफ्टवेयर निर्माण का व्यय हो चुका था। मूल सॉफ्टवेयर भी तैयार हो चुका था। इसके बावजूद इसके बाद अयोजित की गई परीक्षाओं के लिए पृथक-पृथक निरंतर सॉफ्टवेयर का निर्माण कराया जाना दर्शाकर भुगतान उठाया गया। जबकि साॅफ्टवेयर में बदलाव कर काम चलाया जा सकता था।
 

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2 Comments

  1. Visitor Photo
    By : Amritlal

    Job

  2. Visitor Photo
    By : Devesh

    Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai

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