नगर निगम में नई भर्तियां व पदोन्नति नहीं होने से कई विभागों में कर्मचारियों की कमी हो गई है। इस साल अब तक 51 कर्मचारी रिटायर हो चुके हैं, 31 मार्च तक 4 और कर्मचारी रिटायर हो जाएंगे। अगले वित्तीय वर्ष में 62 और मंत्रालयिक कर्मचारी रिटायर होंगे।
हालत ये है कि सबसे महत्वपूर्ण विभाग राजस्व में 15 में से मात्र 1 इंस्पेक्टर है। वह भी सितंबर में रिटायर हो जाएंगे। इससे आने वाले समय में महत्वपूर्ण काम अटक सकते हैं। नगर निगम में कर्मचारियों में प्रमोशन को लेकर भारी असंतोष है। जुलाई में 3 दिन चली नगर निगम बोर्ड की बैठक में यह मामला उठा था। तब इसके लिए समिति का गठन करने व प्रमोशन प्रक्रिया शुरू करने के आदेश दिए थे। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट तैयार करके 19 नवंबर को फाइल आयुक्त के कक्ष में पहुंचा दी, लेकिन उस पर कोई निर्णय नहीं हो पा रहा। उनका कहना है कि कर्मचारी जिस पोस्ट पर नियुक्त हो रहा है, वह उसी पर रिटायर हो रहा है।
पिछले दिनों रिटायर हुए फूलचंद शर्मा व सुशील कुमार शर्मा एलडीसी के पद पर भर्ती हुए थे, इसी पर रिटायर हो गए। यह स्थिति कई कर्मचारियों की है।
यहां तो स्थिति और भी खराब
सबसे बुरी स्थिति निगम के राजस्व अनुभाग की है। यह विभाग निगम के लिए राजस्व जुटाता है जबकि इसमें ही कर्मचारी नहीं है। यहां 15 पद खाली पड़े हैं। एक मात्र इंसपेक्टर लक्ष्मीचंद अजमेरा भी सितंबर में रिटायर हो रहे हैं। कहने को यहां दो महिला आरओ हैं, लेकिन वे राजस्व वसूली में कोई जिम्मेदारी नहीं निभा पा रही। इसी प्रकार सफाई में भी स्वास्थ्य अधिकारी रमाकांत, मोहम्मद युनूस तथा देवेन्द्र शर्मा अगले वित्तीय वर्ष में रिटायर हो रहे हैं। यह पूरा विभाग बिना स्वास्थ्य अधिकारी के हो जाएगा। बाकी विभागों की भी यही स्थिति है। पांच ओएस के पोस्ट खाली हैं।
महापौर महेश विजय ने बताया कि सरकार को लिख चुके पत्र यह सही है कि निगम में लगातार स्टॉफ घटता जा रहा है। इस बारे में उन्होंने राज्य सरकार को लिखा है। वहां से नई भर्ती होने पर स्टॉफ देने की बात कही है। निगम में तो इलेक्ट्रिक, भवन निर्माण भी स्थिति खराब है। इस बारे में फिर से पत्र लिखा जाएगा।
हालत ये है कि सबसे महत्वपूर्ण विभाग राजस्व में 15 में से मात्र 1 इंस्पेक्टर है। वह भी सितंबर में रिटायर हो जाएंगे। इससे आने वाले समय में महत्वपूर्ण काम अटक सकते हैं। नगर निगम में कर्मचारियों में प्रमोशन को लेकर भारी असंतोष है। जुलाई में 3 दिन चली नगर निगम बोर्ड की बैठक में यह मामला उठा था। तब इसके लिए समिति का गठन करने व प्रमोशन प्रक्रिया शुरू करने के आदेश दिए थे। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट तैयार करके 19 नवंबर को फाइल आयुक्त के कक्ष में पहुंचा दी, लेकिन उस पर कोई निर्णय नहीं हो पा रहा। उनका कहना है कि कर्मचारी जिस पोस्ट पर नियुक्त हो रहा है, वह उसी पर रिटायर हो रहा है।
पिछले दिनों रिटायर हुए फूलचंद शर्मा व सुशील कुमार शर्मा एलडीसी के पद पर भर्ती हुए थे, इसी पर रिटायर हो गए। यह स्थिति कई कर्मचारियों की है।
यहां तो स्थिति और भी खराब
सबसे बुरी स्थिति निगम के राजस्व अनुभाग की है। यह विभाग निगम के लिए राजस्व जुटाता है जबकि इसमें ही कर्मचारी नहीं है। यहां 15 पद खाली पड़े हैं। एक मात्र इंसपेक्टर लक्ष्मीचंद अजमेरा भी सितंबर में रिटायर हो रहे हैं। कहने को यहां दो महिला आरओ हैं, लेकिन वे राजस्व वसूली में कोई जिम्मेदारी नहीं निभा पा रही। इसी प्रकार सफाई में भी स्वास्थ्य अधिकारी रमाकांत, मोहम्मद युनूस तथा देवेन्द्र शर्मा अगले वित्तीय वर्ष में रिटायर हो रहे हैं। यह पूरा विभाग बिना स्वास्थ्य अधिकारी के हो जाएगा। बाकी विभागों की भी यही स्थिति है। पांच ओएस के पोस्ट खाली हैं।
महापौर महेश विजय ने बताया कि सरकार को लिख चुके पत्र यह सही है कि निगम में लगातार स्टॉफ घटता जा रहा है। इस बारे में उन्होंने राज्य सरकार को लिखा है। वहां से नई भर्ती होने पर स्टॉफ देने की बात कही है। निगम में तो इलेक्ट्रिक, भवन निर्माण भी स्थिति खराब है। इस बारे में फिर से पत्र लिखा जाएगा।
Job
Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai