सरकारी बिजली वितरण कंपनियां अपने सिस्टम व प्रबंधन में सुधार की बजाय हर साल बिजली रेट बढ़ा रही हैं। बिजली की छीजत व कर्ज के ब्याज का भार बिल के जरिए आम उपभोक्ताओं पर डाला जा रहा है। इससे लोगों का घरेलू बजट ही गड़बड़ा गया है। बिजली वितरण कंपनियों ने राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग (आरईआरसी) में याचिका लगा कर पिछले 5 साल में घरेलू कनेक्शनों के टैरिफ में 57 फीसदी तक बढ़ोतरी करवा ली। वहीं मौजूदा याचिका में 10 से 15 फीसदी बढ़ाने का प्रस्ताव है। माना जा रहा है कि यदि आम उपभोक्ताओं ने बिजली रेट बढ़ाने के खिलाफ आरईआरसी के सामने आपत्तियां नहीं कीं तो उसका भार बिल में भुगतना पड़ेगा। दूसरी ओर बिजली कंपनी की टैरिफ बढ़ाने की याचिका के खिलाफ बुधवार को 10 लोगों ने आपत्तियां दर्ज करवाईं तथा सुझाव भी दिए। पहली बार एक ही दिन में इतनी आपत्ति दर्ज हुई हैं। विनियामक आयोग ने सभी आपत्तियों को दफ्तर दाखिल किया है।
विशेषज्ञों की दो सलाह -
1.बिजली कंपनी सही फैसला ले इसीलिए जरूरी हैं आपकी आपत्ति
आरएसईबी से रिटायर्ड कॉमर्शियल ऑफिसर जी. एल. शर्मा का मानना है कि बिजली वितरण कंपनियों ने पिछले 5 साल में 57 से 70 फीसदी तक बिजली की रेट बढ़ाई है। सुधार कार्यों के नाम पर प्रोजेक्ट व योजनाओं पर करोड़ों रुपए खर्च किया। इसके बावजूद छीजत ज्यादा कम नहीं हुई। कर्ज व घाटा भी बढ़ गया। इस घाटे व कर्ज को कम करने के लिए टैरिफ बढ़ाने की याचिका लगाई है। ऐसे में आम जनता को इस पर आपत्ति व सुझाव देना चाहिए, ताकि आरईआरसी को सही फैसला करना में सुविधा रहे।
2.अधूरे आंकड़ों से पेश याचिका खारिज हो
बिजली प्रसारण कंपनी के रिटायर्ड चीफ इंजीनियर डी.पी.चिरानिया का कहना है कि एपटेल के आदेश के बावजूद डिस्कॉम्स ने अधूरे आंकड़ों व गलत तथ्यों पर टैरिफ की याचिका दाखिल की है। ऐसे में यह याचिका खारिज होनी चाहिए।
सस्ती बिजली चाहिए तो आपत्तियां करनी ही होंगी
बिजली रेट बढ़ाने की याचिका के बारे में आपत्तियां, सुझाव, टिप्पणी भेजने के लिए लोग सहायक प्रपत्रों और आरईआरसी (कार्य संपादन) विनियम 2005 के फार्म नं. 3 में शपथ पत्र के साथ दे सकते हैं। यह आपत्ति व सुझाव आरईआरसी के सहकार मार्ग स्थित कार्यालय (विनियामक भवन, सहकार मार्ग, जयपुर - 302001) में 6 कॉपियों में दे या भेज सकते हैं। साथ ही ई-मेल भी कर सकते हंै। टैरिफ याचिका पर आमजन, उपभोक्ता, संगठन, व्यापार संघ, इंडस्ट्रियल एसोसिएशन, संस्था, एनजीओ, राजनैतिक पार्टी या यूनियन सहित अन्य लोग अपनी आपत्ति व सुझाव दे सकते हैं।
विशेषज्ञों की दो सलाह -
1.बिजली कंपनी सही फैसला ले इसीलिए जरूरी हैं आपकी आपत्ति
आरएसईबी से रिटायर्ड कॉमर्शियल ऑफिसर जी. एल. शर्मा का मानना है कि बिजली वितरण कंपनियों ने पिछले 5 साल में 57 से 70 फीसदी तक बिजली की रेट बढ़ाई है। सुधार कार्यों के नाम पर प्रोजेक्ट व योजनाओं पर करोड़ों रुपए खर्च किया। इसके बावजूद छीजत ज्यादा कम नहीं हुई। कर्ज व घाटा भी बढ़ गया। इस घाटे व कर्ज को कम करने के लिए टैरिफ बढ़ाने की याचिका लगाई है। ऐसे में आम जनता को इस पर आपत्ति व सुझाव देना चाहिए, ताकि आरईआरसी को सही फैसला करना में सुविधा रहे।
2.अधूरे आंकड़ों से पेश याचिका खारिज हो
बिजली प्रसारण कंपनी के रिटायर्ड चीफ इंजीनियर डी.पी.चिरानिया का कहना है कि एपटेल के आदेश के बावजूद डिस्कॉम्स ने अधूरे आंकड़ों व गलत तथ्यों पर टैरिफ की याचिका दाखिल की है। ऐसे में यह याचिका खारिज होनी चाहिए।
सस्ती बिजली चाहिए तो आपत्तियां करनी ही होंगी
बिजली रेट बढ़ाने की याचिका के बारे में आपत्तियां, सुझाव, टिप्पणी भेजने के लिए लोग सहायक प्रपत्रों और आरईआरसी (कार्य संपादन) विनियम 2005 के फार्म नं. 3 में शपथ पत्र के साथ दे सकते हैं। यह आपत्ति व सुझाव आरईआरसी के सहकार मार्ग स्थित कार्यालय (विनियामक भवन, सहकार मार्ग, जयपुर - 302001) में 6 कॉपियों में दे या भेज सकते हैं। साथ ही ई-मेल भी कर सकते हंै। टैरिफ याचिका पर आमजन, उपभोक्ता, संगठन, व्यापार संघ, इंडस्ट्रियल एसोसिएशन, संस्था, एनजीओ, राजनैतिक पार्टी या यूनियन सहित अन्य लोग अपनी आपत्ति व सुझाव दे सकते हैं।
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Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai