एक ओर जहां शहर को स्मार्ट बनाने की कवायद चल रही है, वहीं दूसरी ओर शहर से निकलने वाले 288 एमएलडी गंदे पानी को ट्रीट करके शुद्ध करने की योजना प्रशासन के पास नहीं है। अभी सिर्फ एक ही एसटीपी धाकड़खेड़ी से मात्र 20 एमएलडी गंदा पानी ही ट्रीट हो रहा है। जबकि साजीदेहड़ा में 30 एमएलडी और बालिता में 6 एमएलडी पानी को ट्रीट करने के लिए एसटीपी बनाए जा रहे हैं।
इनमें साजीदेहड़ा के प्लांट में अभी एक नाले को जोड़कर गंदे पानी को ट्रीट करने का रिहर्सल हो रहा है। तीनों प्लांट चलने लगेंगे तो भी सिर्फ 56 एमएलडी गंदा पानी ही ट्रीट हो सकेगा। बाकी पानी को कैसे रोका जाएगा, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। यूआईटी के अधिकारी कह रहे हैं इसके लिए बड़ी योजना बनाई जाएगी।
चंबल में गिरने वाले नालों को रोकने की योजना को लेकर एनजीटी ने पूरा दबाव बनाया हुआ है। इसे देखते हुए यूआईटी प्रशासन एसटीपी व लाइन बिछाने के काम को जल्द पूरा करने में जुटा है। इसके लिए साजीदेहड़ा नाले को एसटीपी से जोड़ा गया है। इसके बावजूद इस नाले से साजीदेहड़ा से आगे जो पानी निकल रहा है, वह सीधा चंबल में जा रहा है। बाकी नालों को रोकने पर अभी कोई काम नहीं हो रहा। हालांकि स्टेशन इलाके में आरयूआईडीपी योजना में डाली गई लाइन से दस नालों को जोड़ने का काम किया जा रहा है।
सफाई के लिए योजना पर्याप्त नहीं
217करोड़ रुपए खर्च आए हैं 3 एसटीपी बनाने में, इससे केवल 56 एमएलडी पानी साफ होगा
>360 एमएलडी पानी रोज हो रहा सप्लाई
>288 एमएलडी नालों से निकलता है वेस्ट
>20 एमएलडी गंदा पानी हो रहा है ट्रीट
>36 एमएलडी और गंदा पानी ट्रीट करने के लिए बन रहे दो प्लांट
कैसे शुद्ध होगा गंदा पानी
यूआईटी के ही एक इंजीनियर की माने तो जो एसटीपी शहर में लगाए जा रहे हैं, उससे पूरे शहर से निकलने वाले गंदे पानी को साफ नहीं किया जा सकता। इसके लायक तो इनकी क्षमता ही नहीं है। कोटा में अकेलगढ़ व मिनी अकेलगढ़ से 360 एमएलडी पानी की सप्लाई की जाती है। मानकों के अनुसार इसका 80 प्रतिशत करीब 288 एमएलडी गंदा पानी 22 नालों से होते हुए सीधे चंबल में गिर रहा है। उनका मानना है कि जब तक बड़ी योजना नहीं बनती, शहर के गंदे पानी को चंबल में जाने से नहीं रोका जा सकता।
दस नालों को रोकने की चल रही कवायद
यूआईटी के एसई अनिल विजय के अनुसार स्टेशन इलाके के खेड़ली फाटक पंप हाउस से दो नालों को जोड़ दिया गया है। दो और नालों को जोड़ने की कवायद चल रही है। इसी क्रम में नयापुरा पंप हाउस से भी चार नालों को जोड़ा जा रहा है। इस पंप हाउस में बिजली का कनेक्शन देने के साथ अन्य तैयारियां की जा रही है।
कुन्हाड़ी पुलिया के पास बरसात के समय इसके साथ की लाइन भी बह गई थी। उसे ठीक करके एसटीपी के पंप हाउस से जोड़ा जा रहा है। सेवन वंडर्स के पास एक नाले को ट्रीटमेंट प्लांट वाली लाइन से जोड़ा जा रहा है। इसी तरह साजीदेहड़ा नाले को पहले ही जोड़ दिया गया है। उन्होंने कहा कि करीब दस नाले ट्रीटमेंट प्लांट से जुड़ जाएंगे। इससे लाडपुरा से लेकर स्टेशन इलाके के नालों का गंदा पानी धाकड़खेड़ी ट्रीटमेंट प्लांट में भेजा जाएगा।
स्मार्ट सिटी में बनेगी योजना
यह बात तो सही है कि शहर में जितना पानी घरों तक पहुंच रहा है और जितना निकल रहा है, उसके अनुरूप कोटा में एसटीपी नहीं है। इससे सभी नालों को व गंदे पानी को रोककर ट्रीट नहीं किया जा सकता। इसके लिए अब बड़ी योजना बनाई जा रही है। स्मार्ट सिटी में भी यह मामला शामिल किया गया है। इसमें बाकी पानी के लिए एसटीपी बनाया जाएगा। -डॉ. मोहनलाल यादव, सचिव
इनमें साजीदेहड़ा के प्लांट में अभी एक नाले को जोड़कर गंदे पानी को ट्रीट करने का रिहर्सल हो रहा है। तीनों प्लांट चलने लगेंगे तो भी सिर्फ 56 एमएलडी गंदा पानी ही ट्रीट हो सकेगा। बाकी पानी को कैसे रोका जाएगा, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। यूआईटी के अधिकारी कह रहे हैं इसके लिए बड़ी योजना बनाई जाएगी।
चंबल में गिरने वाले नालों को रोकने की योजना को लेकर एनजीटी ने पूरा दबाव बनाया हुआ है। इसे देखते हुए यूआईटी प्रशासन एसटीपी व लाइन बिछाने के काम को जल्द पूरा करने में जुटा है। इसके लिए साजीदेहड़ा नाले को एसटीपी से जोड़ा गया है। इसके बावजूद इस नाले से साजीदेहड़ा से आगे जो पानी निकल रहा है, वह सीधा चंबल में जा रहा है। बाकी नालों को रोकने पर अभी कोई काम नहीं हो रहा। हालांकि स्टेशन इलाके में आरयूआईडीपी योजना में डाली गई लाइन से दस नालों को जोड़ने का काम किया जा रहा है।
सफाई के लिए योजना पर्याप्त नहीं
217करोड़ रुपए खर्च आए हैं 3 एसटीपी बनाने में, इससे केवल 56 एमएलडी पानी साफ होगा
>360 एमएलडी पानी रोज हो रहा सप्लाई
>288 एमएलडी नालों से निकलता है वेस्ट
>20 एमएलडी गंदा पानी हो रहा है ट्रीट
>36 एमएलडी और गंदा पानी ट्रीट करने के लिए बन रहे दो प्लांट
कैसे शुद्ध होगा गंदा पानी
यूआईटी के ही एक इंजीनियर की माने तो जो एसटीपी शहर में लगाए जा रहे हैं, उससे पूरे शहर से निकलने वाले गंदे पानी को साफ नहीं किया जा सकता। इसके लायक तो इनकी क्षमता ही नहीं है। कोटा में अकेलगढ़ व मिनी अकेलगढ़ से 360 एमएलडी पानी की सप्लाई की जाती है। मानकों के अनुसार इसका 80 प्रतिशत करीब 288 एमएलडी गंदा पानी 22 नालों से होते हुए सीधे चंबल में गिर रहा है। उनका मानना है कि जब तक बड़ी योजना नहीं बनती, शहर के गंदे पानी को चंबल में जाने से नहीं रोका जा सकता।
दस नालों को रोकने की चल रही कवायद
यूआईटी के एसई अनिल विजय के अनुसार स्टेशन इलाके के खेड़ली फाटक पंप हाउस से दो नालों को जोड़ दिया गया है। दो और नालों को जोड़ने की कवायद चल रही है। इसी क्रम में नयापुरा पंप हाउस से भी चार नालों को जोड़ा जा रहा है। इस पंप हाउस में बिजली का कनेक्शन देने के साथ अन्य तैयारियां की जा रही है।
कुन्हाड़ी पुलिया के पास बरसात के समय इसके साथ की लाइन भी बह गई थी। उसे ठीक करके एसटीपी के पंप हाउस से जोड़ा जा रहा है। सेवन वंडर्स के पास एक नाले को ट्रीटमेंट प्लांट वाली लाइन से जोड़ा जा रहा है। इसी तरह साजीदेहड़ा नाले को पहले ही जोड़ दिया गया है। उन्होंने कहा कि करीब दस नाले ट्रीटमेंट प्लांट से जुड़ जाएंगे। इससे लाडपुरा से लेकर स्टेशन इलाके के नालों का गंदा पानी धाकड़खेड़ी ट्रीटमेंट प्लांट में भेजा जाएगा।
स्मार्ट सिटी में बनेगी योजना
यह बात तो सही है कि शहर में जितना पानी घरों तक पहुंच रहा है और जितना निकल रहा है, उसके अनुरूप कोटा में एसटीपी नहीं है। इससे सभी नालों को व गंदे पानी को रोककर ट्रीट नहीं किया जा सकता। इसके लिए अब बड़ी योजना बनाई जा रही है। स्मार्ट सिटी में भी यह मामला शामिल किया गया है। इसमें बाकी पानी के लिए एसटीपी बनाया जाएगा। -डॉ. मोहनलाल यादव, सचिव
Job
Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai