सरकार के नियंत्रण के तमाम प्रयासों के बावजूद दालों के दाम लगातार नई ऊंचाई छू रहे हैं। पिछले एक माह में ही दालों के थोक दामों में 46 रुपए किलो तक की बढ़ोतरी हो चुकी है। उड़द मोगर 2 मार्च को 118 रुपए किलो थी, जो अब 164 रुपए किलो पर पहुंच गई है। यही हाल तुवर दाल का है, यह भी थोक में 140 रुपए किलो के आसपास बिक रही है।
देश भर में कम हुआ पैदावर
रिटेल मार्केट में तुवर दाल के दाम 160 रुपए किलो के आसपास हैं। अक्टूबर 2015 में देश भर में दाल-दलहन के स्टॉक सीमा तय हुई थी और छापामारी की कार्रवाई हुई थी, उस समय दालों के दाम 50 रुपए किलो तक नीचे आ गए थे। तुवर दाल के दाम मार्च के प्रथम सप्ताह में घटने शुरू हुए थे, लेकिन मार्च के अंतिम सप्ताह में ही फिर से 140 रुपए किलो को पार कर गए हैं। व्यापारी जयदेव सुखेजा का कहना है कि फिर से दालों में सटोरिए हावी हो गए हैं। यह भी सही है कि खपत के मुकाबले में देश भर में पैदावार कम है। सरकार के दालों के दामों पर नियंत्रण के प्रयास इस समय काम नहीं आ रहे हैं।
दालों के मूल्य नियंत्रण के उपाय बेअसर
केन्द्रीय खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने दालों के दामों पर नियंत्रण के लिए इस बार 50 हजार टन दालों के बफर स्टॉक की घोषणा की थी, जिस पर अभी तक कोई अमल नहीं हो सका है।
दालों का आयात
50 हजार टन दालों का आयात किया गया था, लेकिन इसके बाद भी दाल के दाम कम नहीं हुए।
स्टॉक सीमा
दाल की बढ़ती कीमतों पर काबू के लिए राज्य सरकार ने स्टॉक सीमा लागू की थी। थोक व्यापारी 2500 क्विंटल से ज्यादा स्टॉक नहीं रख सकेंगे। खुदरा व्यापारियों के लिए ये सीमा सिर्फ 25 क्विंटल है। कारोबारियों को ये स्टॉक 75 दिन के भीतर खत्म करना होगा। वहीं, दाल मिलों पर भी साल के कुल प्रोडक्शन का सिर्फ 2 महीने का ही स्टॉक रखने को कहा था।
एसोचैम का अनुमान.... देश में वर्ष 2014-15 में 1 करोड़ 72 लाख टन दालों का उत्पादन हुआ था। वर्ष 2015-16 में 1 करोड़ 70 लाख टन रहने का अनुमान है। खपत के आंकड़े देखें तो अभी भी एक करोड़ टन दालों के आयात की जरूरत है।
देश भर में कम हुआ पैदावर
रिटेल मार्केट में तुवर दाल के दाम 160 रुपए किलो के आसपास हैं। अक्टूबर 2015 में देश भर में दाल-दलहन के स्टॉक सीमा तय हुई थी और छापामारी की कार्रवाई हुई थी, उस समय दालों के दाम 50 रुपए किलो तक नीचे आ गए थे। तुवर दाल के दाम मार्च के प्रथम सप्ताह में घटने शुरू हुए थे, लेकिन मार्च के अंतिम सप्ताह में ही फिर से 140 रुपए किलो को पार कर गए हैं। व्यापारी जयदेव सुखेजा का कहना है कि फिर से दालों में सटोरिए हावी हो गए हैं। यह भी सही है कि खपत के मुकाबले में देश भर में पैदावार कम है। सरकार के दालों के दामों पर नियंत्रण के प्रयास इस समय काम नहीं आ रहे हैं।
दालों के मूल्य नियंत्रण के उपाय बेअसर
केन्द्रीय खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने दालों के दामों पर नियंत्रण के लिए इस बार 50 हजार टन दालों के बफर स्टॉक की घोषणा की थी, जिस पर अभी तक कोई अमल नहीं हो सका है।
दालों का आयात
50 हजार टन दालों का आयात किया गया था, लेकिन इसके बाद भी दाल के दाम कम नहीं हुए।
स्टॉक सीमा
दाल की बढ़ती कीमतों पर काबू के लिए राज्य सरकार ने स्टॉक सीमा लागू की थी। थोक व्यापारी 2500 क्विंटल से ज्यादा स्टॉक नहीं रख सकेंगे। खुदरा व्यापारियों के लिए ये सीमा सिर्फ 25 क्विंटल है। कारोबारियों को ये स्टॉक 75 दिन के भीतर खत्म करना होगा। वहीं, दाल मिलों पर भी साल के कुल प्रोडक्शन का सिर्फ 2 महीने का ही स्टॉक रखने को कहा था।
एसोचैम का अनुमान.... देश में वर्ष 2014-15 में 1 करोड़ 72 लाख टन दालों का उत्पादन हुआ था। वर्ष 2015-16 में 1 करोड़ 70 लाख टन रहने का अनुमान है। खपत के आंकड़े देखें तो अभी भी एक करोड़ टन दालों के आयात की जरूरत है।
Job
Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai