दशहरा मैदान को प्रगति मैदान की तर्ज पर कल्चरल हब बनाने का रास्ता साफ हो गया। कोटा नगर निगम द्वारा बनाए गए प्रोजेक्ट को राज्य सरकार ने हरी झंडी दे दी। इसके साथ ही इसके लिए डीपीआर बनाने का काम 3.95 करोड़ रुपए में देश की बड़ी आर्किटेक्ट कंपनी आभा नारायण लांबा एसोसिएट को दिया जा रहा है।
मंगलवार को ही कंपनी के साथ नगर निगम का एलओई (लेटर ऑफ एक्सेप्टेबल) साइन हो गया है। कंपनी 3 माह के भीतर इसकी डीटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाकर देगी। इसके लिए पिछले लंबे समय से प्रोजेक्ट तैयार होकर पड़ा था। नगर निगम ने इसकी तैयारी शुरू कर फाइल राज्य सरकार के पास भेजी थी, जो वहां जाकर डंप हो गई थी। पिछले दिनों न केवल राज्य सरकार ने इसके लिए स्वीकृति जारी कर दी बल्कि इसके लिए डीपीआर बनवाकर काम शुरू करने की मंजूरी भी दे दी। राज्य सरकार ने ही इसकी डीपीआर के लिए कंसल्टेंट कंपनियों से बातचीत की थी। इसमें मुंबई की आर्किटेक्ट कंपनी आभा नारायण लांबा एसोसिएट ने इसके लिए 4.39 करोड़ रुपए मांगे थे। बाद में 3.95 करोड़ रुपए में फाइनल किया गया।
ये बनेगा कल्चरल हब में
नगर निगम ने कंपनी से डिमांड की है कि वे इस मैदान को इस तरह से विकसित करना चाहते हैं कि हर वर्ग की जरूरत पूरी हो और सालभर यहां कार्यक्रम होते रहें। साथ ही यहां पर दशहरा मेला, ऑडिटोरियम, एजुकेशनल ब्लाक, मैरिज गार्डन, प्रदर्शनी स्थल, छोटे मेले के लिए स्थान तैयार किए जाएंगे।
200 करोड़ से अधिक आएगी लागत
कल्चरल हब विकसित करने पर करीब 200 करोड़ रुपए का खर्च आने का अनुमान है। यदि पीपीपी मॉडल पर दिया जाएगा तो कंपनियों को आमंत्रित किया जाएगा। यदि निगम को संचालन करना है तो ये खर्च राज्य सरकार व नगर निगम वहन करेगी।
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