34 में से दो बसों को सितंबर-13 में चालू किया गया था, लेकिन वे भी कुछ समय के बाद बंद हो गई। अब इन बसों को संचालित करने के लिए कोटा सिटी ट्रांसपोर्ट कंपनी का गठन किया गया है। कमेटी इन बसों को जयपुर की तर्ज पर चालू करने के लिए निविदा जारी करने वाली थी कि कार्यकारी समिति में इनमें से 14 बसों को ही संचालित करने पर चर्चा हुई। इसलिए निविदा को भी रोक दिया गया था।
14 बसों के लिए इन रूटों का प्रस्ताव: निगम प्रशासन ने 14 बसों के रूट भी तय कर दिए गए हैं। इसमें दो बसों को पर्यटकों के लिए चलाया जाएगा। पांच-पांच बसों को स्टेशन से खड़े गणेशजी व स्टेशन से अनंतपुरा और दो बसों को स्टेशन से सब्जीमंडी चलाने का प्रस्ताव रखा गया है।
लगातार हो रहा है खर्चा
रोडवेज के कुन्हाड़ी स्थित गैराज में खड़ी इन बसों का संचालन नहीं हो रहा, लेकिन इस पर खर्चा लगातार हो रहा है। गैराज समिति के अध्यक्ष गोपाल मंडा के अनुसार पहले साल बीमे के 27 लाख, दूसरे साल 23.50 लाख तथा तीसरे साल 20 लाख रुपए लगे हैं। बसों की हालत ऐसी हो गई है, कि उन्हें चालू करने के लिए हर बस पर डेढ़ लाख रुपए खर्च करने होंगे। बसें चली नहीं, लेकिन इनकी वैल्यू लगातार घट रही है। हर साल बीस प्रतिशत दर बस की कम हो जाती है।
पार्षद बोले-महापौर ने रखा था प्रस्ताव
पार्षद गोपाल मंडा ने कहा कि कार्यकारी समिति की बैठक में 20 बसों को सरकार को वापस देने का प्रस्ताव महापौर महेश विजय ने रखा था। तब कहा गया था कि बसों की संख्या इतनी है कि शहर के सभी रूटों पर बसें चलाने के बावजूद पूरी बसों का उपयोग नहीं किया जा सकता। आयुक्त शिवप्रसाद एम नकाते ने कहा कि प्रस्ताव आया था, जिसके बारे में बैठक में ही बता दिया गया था। इस बारे में अभी कोई फाइनल फैसला नहीं हुआ है। संचालन के लिए बनी कंपनी ही इस बारे में फैसला करेगी।
सांसद और विधायक विराेध में, बसों को लौटाने का सोचना ही गलत
महापौर से बात करेंगे
सिटी बसों को वापस क्यों भेजा जा रहा है, इस बारे में महापौर से बात की जाएगी। जो बसें कोटा के लिए हैं, वे कोटा में ही चले, इसके लिए पूरा प्रयास किया जाएगा। हर काम नफा-नुकसान को ध्यान में रखकर नहीं किया जाता।
-प्रहलाद गुंजल, विधायक
बनाएंगे फायदे की नीति
कोटा में बसों के लिए फायदे की नीति बनाएंगे। महापौर के साथ बैठकर बात करेंगे। इससे शहर का हुलिया ही बदल जाएगा। हम कैसे इन बसों को वापस जाने देंगे।
-ओम बिरला, सांसद
बसें तो चलनी चाहिए
शहर को ट्रैफिक की सुविधा देने के लिए 34 बसों को खरीदा गया है तो उन्हेंं शहर में ही चलाया जाना चाहिए। उन्हें वापस जयपुर भेजने का फैसला लेना या सोचना भी गलत है। यह खाली नहीं चले, इसके लिए प्रयास करने चाहिए।
-भवानीसिंह राजावत, विधायक
दायरा बढ़ा दो
इनका दायरा बढ़ा दो। कोटा से कैथून, कोटा से मंडाना, कोटा से ताथेड़ व कोटा से तालेड़ा तक बसों का संचालन शुरू कर दिया जाए, खूब ट्रैफिक मिलेगा। बसों को वापस भेजना गलत है। -संदीप शर्मा, विधायक
बात की, फैसला नहीं हुआ
अभी बसों को जयपुर भेजने के मामले में कोई फैसला नहीं हुआ है। बैठक में सिर्फ अपने विचार रखे गए थे। कार्यकारी समिति की बैठक में बसों को शहर में संचालित करने पर चर्चा हुई है। अभी इस पर फैसला होना बाकी है। -महेश विजय, महापौर
घाटे में ही चलनी थी बसें, वापस लौटाने की सोच अक्षमता की पराकाष्ठा-धारीवाल
Job
Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai