चिकित्सा विभाग की मानें तो इस साल सितंबर तक प्रदेश में डेंगू से एक भी मौत नहीं हुई। एक प्रश्न के जवाब में कोटा दक्षिण विधायक संदीप शर्मा को विधानसभा सचिवालय से भेजी गई जानकारी में यह खुलासा हुआ है। इस सीजन में राज्य में सबसे ज्यादा डेंगू प्रभावित शर्मा का विधानसभा क्षेत्र रहा था। अगस्त से सितंबर के बीच हजारों लोग डेंगू के शिकार हुए थे। खुद विधायक चिकित्सा विभाग के इस जवाब से संतुष्ट नहीं हैं और स्वीकार रहे हैं कि कोटा में ही कई लोग डेंगू से मरे हैं। बहरहाल, पूरे मामले को लेकर उन्होंने विधानसभा सचिवालय को पत्र लिखा है। इससे पहले कोटा दौरे पर आए चिकित्सा मंत्री राजेंद्र राठौड़ भी अपने ही विभाग के आंकड़ों का यह झूठ स्वीकार चुके हैं और कह चुके हैं कि अफसरों ने समय पर सही आंकड़े नहीं भेजे।
ये कैसा सच, कोटा में ही हुई 9 मौतें, एक महीने तक महामारी से जूझा कोटा
विधायक ने मानसून सत्र के दौरान तारांकित सवाल में पूछा था कि प्रदेश में 3 वर्षों में डेंगू से कितनी जान गईं और कितने लोग प्रभावित हुए। जिलेवार जानकारी व रोकथाम के प्रयासों की जानकारी भी मांगी। 15 दिन पहले पत्र से आए लिखित जवाब में विभाग ने बताया कि डेंगू से राज्य में वर्ष 2012 व 2013 में 10-10, वर्ष 2014 में 7 व वर्ष 2015 में (20 सितंबर तक) कोई मौत नहीं हुई। जबकि इस अवधि में कोटा में ही 9 मौतें हो चुकी थी। इनमें से 2 मौतें तो एमबीएस व न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में हुई, जो जांच में डेंगू के एलाइजा पॉजिटिव भी थे। विभाग ने 20 सितंबर तक कोटा में महज 430 लोगों को डेंगू पॉजिटिव बताया, जबकि यह वह समय था, जब कोटा के सारे अस्पताल डेंगू रोगियों के अटे पड़े थे। हजारों लोग इस बुखार के शिकार हो चुके थे और प्राइवेट हॉस्पिटलों तक में रोगियों को भर्ती करने के लिए पलंग कम पड़ रहे थे।
मैं तो खुद हैरान हूं। डेंगू से कोटा में ही कई लोग मरे हैं। अन्य जिलों में भी डेंगू प्रकोप था। विभाग का कहना है कि एक भी मौत नहीं हुई। मैंने इस मामले को लेकर विधानसभा सचिवालय को पत्र लिखा है। यह जानकारी सही नहीं है।
- संदीप शर्मा, विधायक
^हम एलाइजा के बाद ही डेथ को कन्फर्म मानते हैं। हो सकता है विधानसभा में जानकारी देने तक कोई मौत नहीं हुई हो। इसके बाद एक-दो मौतें जरूर मेरे ध्यान में हैं। ज्यादा डिटेल मैं रिकॉर्ड देखकर बता सकता हूं।
-डॉ. बीआर मीणा, निदेशक (जन स्वास्थ्य)
ये कैसा सच, कोटा में ही हुई 9 मौतें, एक महीने तक महामारी से जूझा कोटा
विधायक ने मानसून सत्र के दौरान तारांकित सवाल में पूछा था कि प्रदेश में 3 वर्षों में डेंगू से कितनी जान गईं और कितने लोग प्रभावित हुए। जिलेवार जानकारी व रोकथाम के प्रयासों की जानकारी भी मांगी। 15 दिन पहले पत्र से आए लिखित जवाब में विभाग ने बताया कि डेंगू से राज्य में वर्ष 2012 व 2013 में 10-10, वर्ष 2014 में 7 व वर्ष 2015 में (20 सितंबर तक) कोई मौत नहीं हुई। जबकि इस अवधि में कोटा में ही 9 मौतें हो चुकी थी। इनमें से 2 मौतें तो एमबीएस व न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में हुई, जो जांच में डेंगू के एलाइजा पॉजिटिव भी थे। विभाग ने 20 सितंबर तक कोटा में महज 430 लोगों को डेंगू पॉजिटिव बताया, जबकि यह वह समय था, जब कोटा के सारे अस्पताल डेंगू रोगियों के अटे पड़े थे। हजारों लोग इस बुखार के शिकार हो चुके थे और प्राइवेट हॉस्पिटलों तक में रोगियों को भर्ती करने के लिए पलंग कम पड़ रहे थे।
मैं तो खुद हैरान हूं। डेंगू से कोटा में ही कई लोग मरे हैं। अन्य जिलों में भी डेंगू प्रकोप था। विभाग का कहना है कि एक भी मौत नहीं हुई। मैंने इस मामले को लेकर विधानसभा सचिवालय को पत्र लिखा है। यह जानकारी सही नहीं है।
- संदीप शर्मा, विधायक
^हम एलाइजा के बाद ही डेथ को कन्फर्म मानते हैं। हो सकता है विधानसभा में जानकारी देने तक कोई मौत नहीं हुई हो। इसके बाद एक-दो मौतें जरूर मेरे ध्यान में हैं। ज्यादा डिटेल मैं रिकॉर्ड देखकर बता सकता हूं।
-डॉ. बीआर मीणा, निदेशक (जन स्वास्थ्य)
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Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai