आईएल कोटा का मुद्दा गुरुवार को विधानसभा में उठा। प्रश्नकाल में कोटा दक्षिण विधायक संदीप शर्मा ने यह मुद्दा उठाया और कहा कि आईएल बंद होने की कगार पर खड़ी है। इस पर उद्योग मंत्री ने जवाब दिया। जवाब देते वक्त मंत्री ने आईएल की देनदारियां करीब 200 करोड़ बढ़ाकर बता दीं। मंत्री ने कहा कि आईएल पर 800 करोड़ की देनदारियां हैं, जबकि असल में आईएल की देनदारियां करीब 600 करोड़ ही है।
अब यह साफ हो जाता है कि राज्य का उद्योग विभाग कितनी गंभीरता से आईएल को पुनर्जीवित करने पर विचार कर रहा है। मंत्री ने कहा कि आईएल 100 फीसदी केंद्र सरकार की पब्लिक सेक्टर यूनिट है। वर्तमान में इसकी 800 करोड़ की देनदारियां हैं। पहले जमीन बिकी तो दो तिहाई फंड आए, जो इन्होंने सैलरी में बांट दिए। अभी आईएल की वित्तीय स्थिति बहुत गंभीर है। केंद्र सरकार ने हमें पत्र लिखा था, हमें इसे टेकओवर करने के लिए बोला था। हमने साफ मना कर दिया, क्योंकि इतनी भारी लाइबिलिटी हम वहन नहीं कर सकेंगे। मंत्री ने दूसरे सवाल के जवाब में कहा कि कोटा में उद्योग के लिए 16 एमओयू किए हैं। इससे 1825 करोड़ के निवेश और 10 हजार से अधिक रोजगार मिलने की संभावना है।
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