एनजीटी की लगातार फटकार और लगभग 200 करोड़ रुपए खर्च करने के बावजूद चंबल में रोज लगभग 100 एमएलडी गंदा पानी गिर रहा है। यूआईटी के बनाए दो सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) पूरी क्षमता से काम करने के बावजूद केवल 50 एमएलडी पानी ही साफ कर सकते हैं, जबकि शहर के 22 नालों से रोज लगभग 150 एमएलडी गंदा पानी निकलता है।
यूआईटी ने इसको लेकर हाथ खड़े कर दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि दोनों एसटीपी से केवल 10 नाले ही जुड़ पाए हैं। बाकी के 12 नाले अभी भी सीधे चंबल में गिर रहे हैं। यूआईटी ने सरकार को लिखे पत्र में साफ कहा है कि मौजूदा संसाधनों में पूरे शहर की सीवरेज समस्या को हल नहीं किया जा सकता। अब आगे का काम स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट और अमृत योजना के तहत करवाया जाएगा। इसमें कम से 4 साल और लगेंगे।
पिछली सरकार ने शहर की सीवरेज समस्या को दूर करने व 22 नालों को चंबल में गिरने से रोकने के लिए साजीदेहड़ा व नदी पार क्षेत्र में 2 एसटीपी तैयार करने की योजना शुरू की थी। इसके साथ ही शहर में पाइप लाइन भी बिछाई गई। 5 साल में भी यह योजना अभी तक पूरी नहीं हो पाई है। अब यूआईटी के अधिकारी मानते हैं कि इस योजना के पूरा होने पर भी न तो चंबल प्रदूषण मुक्त हो सकती है न पूरे शहर की सीवरेज समस्या का निदान हो सकता है।
250 कॉलोनियों में नहीं है सीवरेज सिस्टम
सचिव डॉ. मोहनलाल यादव की मानें तो कृषि क्षेत्र में बसी 250 कॉलोनियों के अलावा श्रीनाथपुरम सहित अन्य कॉलोनियों में भी सीवरेज सिस्टम डेवलप नहीं हुआ है। इसके लिए अलग से योजना बनानी होगी। जहां तक मौजूदा सिस्टम में नालों को जोड़ने की बात है तो अभी तक मात्र 10 नाले ही इसमें जुड़ पाए हैं। इनका पानी ही इतना आ रहा है कि उसे ही ट्रीट किया जा रहा है।
शहर के ये 12 नाले अभी नहीं जुड़े एसटीपी से
एक्सईएन सुनील कुमार के अनुसार गोदावरी धाम, किशोरपुरा, भटजी घाट, चश्मे की बावड़ी, बंबूलिया घाट, हरिजन बस्ती, छोटी समाध, बैराज कॉलोनी, कुन्हाड़ी नाला, सकतपुरा नाला, बालिता नाला व फतेहगढ़ी का नाला शामिल है। इसमें गोदावरी व किशोरपुरा का नाला तो चंबल के ऊपरी हिस्से में गिरते हैं, जिससे शहर को पीने का पानी सप्लाई होता है।
अभी तक ये 10 नाले ही जुड़ सके
अभी तक केवल साजीदेहड़ा, करबला, खाई रोड, मुक्ति मार्ग नयापुरा, राजभवन रोड, गांवडी सिविल लाइन, नंदाजी की बावड़ी, घूमचक्कर का नाला, चांदमारी बालाजी व लालजी घाटावाला नाले ही सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से जुड़े हैं।
एनजीटी ने दिया है 19 जनवरी तक का समय
एनजीटी भोपाल ने अपने आदेश में साफ कहा था कि चंबल में गिरने वाले 22 नाले टैप किए जाएं। चंबल को प्रदूषण मुक्त करने के लिए बैराज से रोज 5 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जाए। इसके अलावा धोबी घाट भी बंद कराए जाएं। इसके लिए 19 जनवरी तक का समय दिया था। अब सवाल ये है कि बिना एसटीपी के एनजीटी के आदेशों की पालना कैसे होगी।
मौजूदा सिस्टम पर्याप्त नहीं
मौजूदा सिस्टम से पूरे शहर की सीवरेज लाइन को नहीं जोड़ा जा सकता। यहां पर डेढ़ सौ एमएलडी क्षमता के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की आवश्यकता है। अभी केवल मात्र 50 एमएलडी की ही सुविधा है। इसकी क्षमता बढ़ाने व संसाधनों में इजाफा करने के लिए राज्य सरकार को लिखा गया है। वैसे स्मार्ट सिटी व अमृत योजना में भी इसे शामिल किया जा रहा है। - डॉ. मोहनलाल यादव, सचिव यूआईटी
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