आईएल (इंस्ट्रूमेंटेशन लिमिटेड) पर तालाबंदी की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। केंद्रीय भारी उद्योग एवं लोक उद्यम मंत्रालय ने आईएल की कोटा यूनिट के क्लोजर का प्रस्ताव केंद्रीय कैबिनेट को भेज दिया है। इससे करीब एक हजार कर्मचारी बेरोजगार होंगे।
कोटा यूनिट बंद होगा
विभागीय मंत्री अनंत जी गीते ने मंगलवार को दिल्ली में मीडिया को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि केरल की पलक्कड़ यूनिट को चलाने के लिए वहां की राज्य सरकार तैयार है, इसलिए उसे बंद नहीं किया जाएगा। जबकि राजस्थान सरकार कोटा यूनिट को लेने से मना कर चुकी है, ऐसे में कोटा यूनिट को बंद करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचा।
सड़कों पर आंदोलन
कोटा आईएल में वर्तमान में करीब 600 स्थायी और 400 अस्थायी कर्मचारी कार्यरत हैं। इस उद्योग को बचाने के लिए कोटावासी लंबे समय से सड़कों पर आंदोलनरत हैं। आईएल मैनेजमेंट इसे चलाने के लिए सारे प्लान सरकार को बता चुका। अहम बात है कि इसको चलाने के लिए करीब 310 करोड़ की जरूरत थी, जबकि बंद करने पर 700 करोड़ की लागत आएगी।
बैठक का औचित्य क्या?
आईएल के मसले पर बुधवार को दिल्ली में एक बैठक है। यह बैठक सांसद ओम बिरला के अनुरोध पर तय की गई है, जिसमें भारी उद्योग मंत्रालय के ज्वॉइंट सेक्रेटरी स्तर के अधिकारी आईएल कर्मचारियों की बात सुनेंगे।
दूसरी कंपनियां कई गुना ज्यादा घाटे में
केवल 67 करोड़ रुपए सालाना घाटे में चल रही आईएल को बंद करने पर आमादा है, जबकि इससे कई गुना ज्यादा घाटे में दूसरी सरकारी सेक्टर की कंपनियां हैं। इनमें पहला नंबर है बीएसएनएल का, जो (पीबीईईटी सर्वे 2013-14) 69 अरब से ज्यादा सालाना घाटे में है। एयर इंडिया 58 अरब और एमटीएनएल का वार्षिक घाटा करीब 33 अरब है।
234 कंपनियों की रैंकिंग
पीबीईईटी (प्रोफिट/लॉस बिफोर एक्सेप्शनल एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी आइटम्स एंड टैक्स) की रिपोर्ट में 234 कंपनियों की रैंकिंग की गई थी, जिसमें आईएल को 206वीं रैंक मिली। देश में घाटे में चल रही पब्लिक सेक्टर की 77 कंपनियों में 28 कंपनियां हैं, जिनका वार्षिक घाटा आईएल से कई गुना है।
वित्त मंत्री ने दी जानकारी
उन्हें बंद करने की बात सरकार के स्तर पर कभी नहीं हुई। जबकि, आईएल महज 100-200 करोड़ रुपए से पुनर्जीवित होने की क्षमता रखती है। गत दिनों लोकसभा में पेश एक रिपोर्ट में वित्त मंत्री ने ये जानकारी दी, जिसमें पब्लिक सेक्टर यूनिटों (पीएसयू) का लेखा-जोखा था।
कोटा यूनिट बंद होगा
विभागीय मंत्री अनंत जी गीते ने मंगलवार को दिल्ली में मीडिया को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि केरल की पलक्कड़ यूनिट को चलाने के लिए वहां की राज्य सरकार तैयार है, इसलिए उसे बंद नहीं किया जाएगा। जबकि राजस्थान सरकार कोटा यूनिट को लेने से मना कर चुकी है, ऐसे में कोटा यूनिट को बंद करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचा।
सड़कों पर आंदोलन
कोटा आईएल में वर्तमान में करीब 600 स्थायी और 400 अस्थायी कर्मचारी कार्यरत हैं। इस उद्योग को बचाने के लिए कोटावासी लंबे समय से सड़कों पर आंदोलनरत हैं। आईएल मैनेजमेंट इसे चलाने के लिए सारे प्लान सरकार को बता चुका। अहम बात है कि इसको चलाने के लिए करीब 310 करोड़ की जरूरत थी, जबकि बंद करने पर 700 करोड़ की लागत आएगी।
बैठक का औचित्य क्या?
आईएल के मसले पर बुधवार को दिल्ली में एक बैठक है। यह बैठक सांसद ओम बिरला के अनुरोध पर तय की गई है, जिसमें भारी उद्योग मंत्रालय के ज्वॉइंट सेक्रेटरी स्तर के अधिकारी आईएल कर्मचारियों की बात सुनेंगे।
दूसरी कंपनियां कई गुना ज्यादा घाटे में
केवल 67 करोड़ रुपए सालाना घाटे में चल रही आईएल को बंद करने पर आमादा है, जबकि इससे कई गुना ज्यादा घाटे में दूसरी सरकारी सेक्टर की कंपनियां हैं। इनमें पहला नंबर है बीएसएनएल का, जो (पीबीईईटी सर्वे 2013-14) 69 अरब से ज्यादा सालाना घाटे में है। एयर इंडिया 58 अरब और एमटीएनएल का वार्षिक घाटा करीब 33 अरब है।
234 कंपनियों की रैंकिंग
पीबीईईटी (प्रोफिट/लॉस बिफोर एक्सेप्शनल एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी आइटम्स एंड टैक्स) की रिपोर्ट में 234 कंपनियों की रैंकिंग की गई थी, जिसमें आईएल को 206वीं रैंक मिली। देश में घाटे में चल रही पब्लिक सेक्टर की 77 कंपनियों में 28 कंपनियां हैं, जिनका वार्षिक घाटा आईएल से कई गुना है।
वित्त मंत्री ने दी जानकारी
उन्हें बंद करने की बात सरकार के स्तर पर कभी नहीं हुई। जबकि, आईएल महज 100-200 करोड़ रुपए से पुनर्जीवित होने की क्षमता रखती है। गत दिनों लोकसभा में पेश एक रिपोर्ट में वित्त मंत्री ने ये जानकारी दी, जिसमें पब्लिक सेक्टर यूनिटों (पीएसयू) का लेखा-जोखा था।
Job
Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai