दादाबाड़ी से बसंत विहार जाने वाली मुख्य सड़क की हरीतिमा पट्टी पर पूरा बाजार बस गया है। साल 1999 से क्षेत्रवासी मेयर, कलेक्टर, आयुक्त से लेकर मुख्यमंत्री और राष्ट्रपति सचिवालय तक शिकायत करते-करते थक चुके हैं।
सुगम पोर्टल पर भी 4 सालों से शिकायत कर रहे हैं। कार्रवाई की बजाय वहां से जवाब मिला- शिकायत का निस्तारण हो गया। इस बीच यहां पूजा स्थल से लेकर दुकानें तक खुल गईं। इसके बावजूद निगम अधिकारियों की लापरवाही का आलम ये है कि आज तक कोई मौका तक देखने नहीं आया। क्षेत्रवासियों ने अब अतिक्रमण सहित अफसरों की लापरवाही की शिकायत लोकायुक्त को भेजी है।
बसंत बिहार गणेश तालाब सेक्टर 1 व 2 के बीच नाले के किनारे 12 फुट चौड़ा व 700 फुट लंबा भूखंड पहले हाउसिंग बोर्ड का था। हाउसिंग बोर्ड ने हरीतिमा पट्टी विकसित करने के लिए सालों पहले ये भूखंड नगर निगम को दे दिया। इसके बाद निगम ने न तो यहां हरीतिमा पट्टी विकसित की और न इस भूखंड पर कभी ध्यान दिया। निगम की लापरवाही की शह पाकर यहां अतिक्रमियों ने अतिक्रमण शुरू कर लिया। दिनोंदिन अतिक्रमण बढ़ता जा रहा है, लेकिन निगम अधिकारी कार्रवाई की बजाय बहानेबाजी में लगे हुए हैं।
- कार्रवाई की बजाय मामले को और उलझा रहा निगम: निगम अधिकारी खुद इस अतिक्रमण को मानते हैं, लेकिन कार्रवाई की बजाय मामले को और उलझा रहे हैं। क्षेत्रवासियों ने लगातार शिकायत की तो उन्होंने वर्ष 2012 में यूआईटी को पत्र लिखा। पत्र में लिखा- गणेश तालाब के लोगों ने अतिक्रमण की शिकायत दी है। उक्त ग्रीन बेल्ट पर पार्क विकसित करने के लिए आप योजना बनाएं। जैसे आप योजना बनाकर देंगे, अतिक्रमण हटाया जाएगा।
- राजनैतिक शह के कारण नहीं हटा रहे अतिक्रमण: क्षेत्रवासियों ने मजबूरन अतिक्रमण हटाने के लिए गणेश तालाब विकास एवं पर्यावरण रक्षक समिति का गठन किया। समिति का कहना है कि पिछले सालों में क्षेत्र में निगम व यूआईटी ने कई अतिक्रमण हटाए, लेकिन इस अतिक्रमण को नहीं हटाती। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि अतिक्रमियों को राजनैतिक सपोर्ट है इसलिए अधिकारी अतिक्रमण नहीं हटाते।
शिकायत के साथ ही बढ़ती गई बहानेबाजी
- सुगम पोर्टल पर 22 अगस्त 2011 को कलेक्ट्रेट (भूमि संबंधी) कॉलम में शिकायत की गई।
जवाब- निगम को 18 जुलाई 2011 को भूखंड ट्रांसफर हुआ है, जहां अतिक्रमण हो रहे हैं। सर्वे करवाकर सूची तैयार हो रही है, जिसके बाद नोटिस देकर कार्रवाई होगी। इसलिए परिवाद निस्तारण योग्य है।
- सुगम पोर्टल पर 25 दिसंबर 2011 को गृह रक्षा एवं नागरिक सुरक्षा (विविध) कॉलम में शिकायत की गई।
जवाब- निगम द्वारा यूआईटी सचिव को ग्रीन बेल्ट विकसित करने को पत्र लिख दिया है। परिवाद का निस्तारण हो गया है।
- सुगम पोर्टल पर 3 अक्टूबर 2012 को संभागीय आयुक्त ऑफिस (विविध) कॉलम में शिकायत की गई।
जवाब- निगम ने अतिक्रमियों को नोटिस जारी कर दिए हैं, उन्होंने पुनर्वास की मांग रख दी है। इसके संबंध में यूआईटी को पत्र लिखा गया है। आचार संहिता के बाद कार्रवाई होगी। परिवाद का निस्तारण हो गया है।
अतिक्रमण साबित होने के बाद हम किसी अतिक्रमण को हटा सकते हैं। अतिक्रमण चिह्नित करके हटाने संबंधित कोई आदेश नहीं मिला है। आदेश मिलने पर कार्रवाई करेंगे। - राजेश डागा, अतिक्रमण निरोधक दस्ते के प्रभारी
ग्रीन बेल्ट यूआईटी के अंडर में है या निगम के यह मुझे पता नहीं है। शिकायत तो मिली थी, मैं पता कर रहा हूं। जिसके बाद मुनादी करके अतिक्रमण हटाया जाएगा। - प्रकाश सैनी, अतिक्रमण निरोधक समिति अध्यक्ष
हां, यह क्षेत्र मेरे अंडर में ही है, लेकिन मुझे ज्वॉइन किए तो सिर्फ 6 माह हुए है। अभी कोई शिकायत नहीं आई और पहले की शिकायतों या सुगम पोर्टल पर किसने क्या जवाब दिया इसके बारे में मुझे कुछ पता नहीं है। - अशोक त्यागी, आयुक्त मुख्यालय
सुगम पोर्टल पर भी 4 सालों से शिकायत कर रहे हैं। कार्रवाई की बजाय वहां से जवाब मिला- शिकायत का निस्तारण हो गया। इस बीच यहां पूजा स्थल से लेकर दुकानें तक खुल गईं। इसके बावजूद निगम अधिकारियों की लापरवाही का आलम ये है कि आज तक कोई मौका तक देखने नहीं आया। क्षेत्रवासियों ने अब अतिक्रमण सहित अफसरों की लापरवाही की शिकायत लोकायुक्त को भेजी है।
बसंत बिहार गणेश तालाब सेक्टर 1 व 2 के बीच नाले के किनारे 12 फुट चौड़ा व 700 फुट लंबा भूखंड पहले हाउसिंग बोर्ड का था। हाउसिंग बोर्ड ने हरीतिमा पट्टी विकसित करने के लिए सालों पहले ये भूखंड नगर निगम को दे दिया। इसके बाद निगम ने न तो यहां हरीतिमा पट्टी विकसित की और न इस भूखंड पर कभी ध्यान दिया। निगम की लापरवाही की शह पाकर यहां अतिक्रमियों ने अतिक्रमण शुरू कर लिया। दिनोंदिन अतिक्रमण बढ़ता जा रहा है, लेकिन निगम अधिकारी कार्रवाई की बजाय बहानेबाजी में लगे हुए हैं।
- कार्रवाई की बजाय मामले को और उलझा रहा निगम: निगम अधिकारी खुद इस अतिक्रमण को मानते हैं, लेकिन कार्रवाई की बजाय मामले को और उलझा रहे हैं। क्षेत्रवासियों ने लगातार शिकायत की तो उन्होंने वर्ष 2012 में यूआईटी को पत्र लिखा। पत्र में लिखा- गणेश तालाब के लोगों ने अतिक्रमण की शिकायत दी है। उक्त ग्रीन बेल्ट पर पार्क विकसित करने के लिए आप योजना बनाएं। जैसे आप योजना बनाकर देंगे, अतिक्रमण हटाया जाएगा।
- राजनैतिक शह के कारण नहीं हटा रहे अतिक्रमण: क्षेत्रवासियों ने मजबूरन अतिक्रमण हटाने के लिए गणेश तालाब विकास एवं पर्यावरण रक्षक समिति का गठन किया। समिति का कहना है कि पिछले सालों में क्षेत्र में निगम व यूआईटी ने कई अतिक्रमण हटाए, लेकिन इस अतिक्रमण को नहीं हटाती। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि अतिक्रमियों को राजनैतिक सपोर्ट है इसलिए अधिकारी अतिक्रमण नहीं हटाते।
शिकायत के साथ ही बढ़ती गई बहानेबाजी
- सुगम पोर्टल पर 22 अगस्त 2011 को कलेक्ट्रेट (भूमि संबंधी) कॉलम में शिकायत की गई।
जवाब- निगम को 18 जुलाई 2011 को भूखंड ट्रांसफर हुआ है, जहां अतिक्रमण हो रहे हैं। सर्वे करवाकर सूची तैयार हो रही है, जिसके बाद नोटिस देकर कार्रवाई होगी। इसलिए परिवाद निस्तारण योग्य है।
- सुगम पोर्टल पर 25 दिसंबर 2011 को गृह रक्षा एवं नागरिक सुरक्षा (विविध) कॉलम में शिकायत की गई।
जवाब- निगम द्वारा यूआईटी सचिव को ग्रीन बेल्ट विकसित करने को पत्र लिख दिया है। परिवाद का निस्तारण हो गया है।
- सुगम पोर्टल पर 3 अक्टूबर 2012 को संभागीय आयुक्त ऑफिस (विविध) कॉलम में शिकायत की गई।
जवाब- निगम ने अतिक्रमियों को नोटिस जारी कर दिए हैं, उन्होंने पुनर्वास की मांग रख दी है। इसके संबंध में यूआईटी को पत्र लिखा गया है। आचार संहिता के बाद कार्रवाई होगी। परिवाद का निस्तारण हो गया है।
अतिक्रमण साबित होने के बाद हम किसी अतिक्रमण को हटा सकते हैं। अतिक्रमण चिह्नित करके हटाने संबंधित कोई आदेश नहीं मिला है। आदेश मिलने पर कार्रवाई करेंगे। - राजेश डागा, अतिक्रमण निरोधक दस्ते के प्रभारी
ग्रीन बेल्ट यूआईटी के अंडर में है या निगम के यह मुझे पता नहीं है। शिकायत तो मिली थी, मैं पता कर रहा हूं। जिसके बाद मुनादी करके अतिक्रमण हटाया जाएगा। - प्रकाश सैनी, अतिक्रमण निरोधक समिति अध्यक्ष
हां, यह क्षेत्र मेरे अंडर में ही है, लेकिन मुझे ज्वॉइन किए तो सिर्फ 6 माह हुए है। अभी कोई शिकायत नहीं आई और पहले की शिकायतों या सुगम पोर्टल पर किसने क्या जवाब दिया इसके बारे में मुझे कुछ पता नहीं है। - अशोक त्यागी, आयुक्त मुख्यालय
Job
Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai