रिसर्जेंट राजस्थान समिट में हाड़ौती को तीन बड़े निवेश मिले हैं। इन तीनों ही परियोजनाओं के बारे में इन डेप्थ जानकारी भास्कर ने संबंधित विषयों के एक्सपर्ट से जुटाई है। आइए जानते हैं, इन तीनों प्रोजेक्ट्स के क्या मायने हैं और कैसे इन क्षेत्रों में कोटा संभाग की ताकत बढ़ेगी।
नाइपर से लगेगा झालावाड़ पर मेडिकल हब बनने का ठप्पा
कुछ सालों पहले तक स्वास्थ्य सेवाओं के लिहाज से पिछड़ा हुआ संभाग का झालावाड़ जिला अब इसी क्षेत्र में हब बनने जा रहा है। यह राज्य का पहला ऐसा जिला मुख्यालय होगा, जहां चिकित्सा के क्षेत्र में मेडिकल कॉलेज से लेकर बड़ा कैंसर इंस्टीट्यूट और अब नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (नाइपर ) खुलने जा रहा है। अब जिले में नर्सिंग कर्मचारी से लेकर डॉक्टर और फार्मा के क्षेत्र के एक्सपर्ट तैयार हो सकेंगे। इन संस्थानों से आगामी कुछ सालों में जिले की तस्वीर तो बदलेगी ही, सीमावर्ती होने से राजस्थान और मध्यप्रदेश के आधा दर्जन से ज्यादा जिलों को भी लाभ मिलेगा।
तीन सवालों में समझिए वह सबकुछ, जो आप जानना चाहते हैं
1. क्या है नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च ?
यह राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान है। इसे भारत सरकार का रसायन व उर्वरक मंत्रालय संचालित करता है। इनमें एम. फार्मा व फार्मास्युटिकल में डॉक्ट्रेट की पढ़ाई होती है। इस इंस्टीट्यूट का सबसे बड़ा रोल रिसर्च में होता है। नई दवाइयों की खोज कर उनका पेटेंट कराना मुख्य काम होता है। इसका पूरा खर्च भारत सरकार वहन करती है।
2. देश में कहां-कहां हैं ऐसे इंस्टीट्यूट?
मोहाली, रायबरेली, गुवाहाटी, कोलकाता, हाजीपुर, हैदराबाद व अहमदाबाद में ही ऐसे इंस्टीट्यूट संचालित हैं। केंद्रीय वित्त मंत्री ने इसी साल के बजट में देश में 5 नए नाइपर खोलने का ऐलान किया था। इनमें से एक राजस्थान में भी प्रस्तावित था, जो झालावाड़ में खुलेगा। राज्य के ड्रग डिपार्टमेंट ने इसके लिए तीन महीने पहले सर्वे कराया था।
3. हमें क्या फायदा?
कम से कम एक हजार स्टूडेंट और फैकल्टी इसमें होंगे। इसके अलावा समय-समय पर कई राज्यों के ड्रग इंस्पेक्टर या ड्रग कंट्रोलर भी यहां प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष तौर पर रोजगार मिलेगा। राजस्थान में यह पहला इंस्टीट्यूट होगा। इंस्टीट्यूट में ऐसी प्रक्रियाओं पर भी शोध होगा, जिनसे दवा की टेस्टिंग सस्ती और आसान हो।
नाइपर से लगेगा झालावाड़ पर मेडिकल हब बनने का ठप्पा
कुछ सालों पहले तक स्वास्थ्य सेवाओं के लिहाज से पिछड़ा हुआ संभाग का झालावाड़ जिला अब इसी क्षेत्र में हब बनने जा रहा है। यह राज्य का पहला ऐसा जिला मुख्यालय होगा, जहां चिकित्सा के क्षेत्र में मेडिकल कॉलेज से लेकर बड़ा कैंसर इंस्टीट्यूट और अब नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (नाइपर ) खुलने जा रहा है। अब जिले में नर्सिंग कर्मचारी से लेकर डॉक्टर और फार्मा के क्षेत्र के एक्सपर्ट तैयार हो सकेंगे। इन संस्थानों से आगामी कुछ सालों में जिले की तस्वीर तो बदलेगी ही, सीमावर्ती होने से राजस्थान और मध्यप्रदेश के आधा दर्जन से ज्यादा जिलों को भी लाभ मिलेगा।
तीन सवालों में समझिए वह सबकुछ, जो आप जानना चाहते हैं
1. क्या है नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च ?
यह राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान है। इसे भारत सरकार का रसायन व उर्वरक मंत्रालय संचालित करता है। इनमें एम. फार्मा व फार्मास्युटिकल में डॉक्ट्रेट की पढ़ाई होती है। इस इंस्टीट्यूट का सबसे बड़ा रोल रिसर्च में होता है। नई दवाइयों की खोज कर उनका पेटेंट कराना मुख्य काम होता है। इसका पूरा खर्च भारत सरकार वहन करती है।
2. देश में कहां-कहां हैं ऐसे इंस्टीट्यूट?
मोहाली, रायबरेली, गुवाहाटी, कोलकाता, हाजीपुर, हैदराबाद व अहमदाबाद में ही ऐसे इंस्टीट्यूट संचालित हैं। केंद्रीय वित्त मंत्री ने इसी साल के बजट में देश में 5 नए नाइपर खोलने का ऐलान किया था। इनमें से एक राजस्थान में भी प्रस्तावित था, जो झालावाड़ में खुलेगा। राज्य के ड्रग डिपार्टमेंट ने इसके लिए तीन महीने पहले सर्वे कराया था।
3. हमें क्या फायदा?
कम से कम एक हजार स्टूडेंट और फैकल्टी इसमें होंगे। इसके अलावा समय-समय पर कई राज्यों के ड्रग इंस्पेक्टर या ड्रग कंट्रोलर भी यहां प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष तौर पर रोजगार मिलेगा। राजस्थान में यह पहला इंस्टीट्यूट होगा। इंस्टीट्यूट में ऐसी प्रक्रियाओं पर भी शोध होगा, जिनसे दवा की टेस्टिंग सस्ती और आसान हो।
Job
Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai