सरकारी बिजली वितरण कंपनियां हर साल ज्यादा खर्च और घाटे की दुहाई देकर बिजली के रेट बढ़ा देती हैं। इस साल भी बिजली कंपनियों ने राजस्थान राज्य विद्युत नियामक आयोग (आरईआरसी) के पास 10 से 15 प्रतिशत बिजली टैरिफ बढ़ाने की याचिका लगाई गई है। आरईआरसी ने इस पर 11 जनवरी तक आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं। इसमें आम लोग, औद्योगिक संगठनों, एनजीओ और राजनीतिक पार्टियां समेत कोई भी शामिल हो सकता है। आम लोग ज्यादा से ज्यादा आपत्तियां भेजकर बिजली महंगी होने से रोक सकते हैं। आम उपभोक्ता के सुझाव एवं आपत्तियों के बाद ही रिवाइज टैरिफ तय होगी। बिजली वितरण कंपनियों के खिलाफ सुझाव एवं आपत्तियां नहीं आने के कारण फैसला हर बार जनता के खिलाफ जाता है। हर बार जनता एवं संगठनों की ओर से अौसतन 100 से कम आपत्तियां आती हैं। इसके चलते आरईआरसी बिजली कंपनियों की ओर से पेश आंकड़ों एवं तथ्यों के आधार पर ही अपना फैसला देती है।
उपभोक्ताओं पर पड़ता है खर्चों एवं छीजत का भार
आरईआरसी से रिटायर्ड अधिकारियों का कहना है कि बिजली कंपनियां अपने खर्चे बढ़ाकर पेश करती हैं। इसके साथ ही महंगे रेट पर बिजली खरीदती हैं। बिजली चोरी एवं सिस्टम लॉस का भार भी आम जनता पर डालती हैं। आम लोगों को इस पर आपत्ति दर्ज करानी चाहिए।
20 फरवरी को महंगी हुई थी बिजली
इसी साल 20 फरवरी को ही बिजली टैरिफ में 16 से 20 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई थी। आरईआरसी ने घरेलू बिजली का रेट 85 पैसे प्रति यूनिट (औसत) तक महंगी करने की अनुमति दी थी। नई टैरिफ एक फरवरी 2015 से ही लागू की गई थी।
ज्यादा आपत्तियां और सुझाव दें तो कम से कम बढ़ेगी बिजली टैरिफ
आरएसईबी से रिटायर्ड डिप्टी चीफ इंजीनियर बालमुकंद सनाढ्य का कहना है कि वितरण कंपनियों की ओर से मनमाने ढंग से लेखा-जोखा पेश कर हर बार बिजली का रेट बढ़ाने के लिए आरईआरसी में याचिका लगाई जाती हैं। आरईआरसी की ओर से उपभोक्ताओं से आपत्ति -सुझाव भी मांगे जाते हैं। लोग याचिका पर आपत्ति नहीं करते हैं। वहीं आरएसईबी से रिटायर्ड कॉमर्शियल ऑफिसर जीएल शर्मा का मानना है कि ज्यादा से ज्यादा लोग व संस्थाएं आंकड़ों व तथ्यों के साथ अपनी आपत्ति व सुझाव दे तो आरईआरसी उन पर सुनवाई करे। इससे रेट में बढ़ोत्तरी भी कम होगी, आम जनता को बड़ी राहत मिल सकती हैं।
आम उपभोक्ता ऐसे दे सकते हैं आपत्ति
बिजली दरें बढ़ाने की याचिका के बारे में आपत्ति, सुझाव, टिप्पणी भेजने के लिए लोग संस्था, संगठन, एनजीओ, राजनीति पार्टियां, यूनियन सहायक प्रपत्रों और आरईआरसी के सहकार मार्ग, जयपुर स्थित कार्यालय पर छह प्रतियों में भेज सकते हैं। इसके साथ ही ई मेल आईडी rerejpr@yahoo.co.in पर भी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं।
टैरिफ बढ़ाने के लिए कंपनियों की दलील
1. आय के मुकाबले ज्यादा खर्चा हो रहा है।
2. बिजली छीजत रोकने के लिए सुधार पर खर्च।
3. कंपनियों को लोन व ब्याज भी चुकाना है।
घाटा बढ़ने के वास्तविक कारण
1. पावर ट्रेडिंग के जरिए पिछले 5 साल में महंगे रेट पर बिजली खरीदना।
2. मटेरियल की खरीद व टेंडरों में गड़बड़झाला। स्क्रैप की नीलामी में घपला।
3. बिजली की छीजत कम नहीं होना। सरकार सब्सिडी समय पर नहीं देती है।
बढ़ी हुई टैरिफ से होगी 1245 करोड़ रुपए की ज्यादा आय
मौजूदा टैरिफ
बिजली कंपनियों को हर वर्ष 12 हजार 191 करोड़ रुपए की इनकम होती है।
प्रस्तावित टैरिफ
याचिका लागू होने के बाद 13 हजार 436 करोड़ रुपए की इनकम होने लगेगी।
आय : बिजली कंपनियों को हर साल 1245 करोड़ रुपए की ज्यादा आय होगी। इससे हर साल होने वाले 3 हजार 330 करोड़ के राजस्व घाटा कम होकर 2 हजार 85 करोड़ रुपए ही रह जाएगा।
कम लोग ही दर्ज कराते हैं आपत्ति
शहर के व्यापारिक एवं औद्योगिक संगठनों ने जब भास्कर ने यह जाना कि दरें बढ़ाने के पहले आपत्तियां दर्ज भी होती हैं या नहीं, तो उनका कहना था कि वे हर बार आपत्ति दर्ज कराते हैं। लेकिन, आपत्तियां इतनी कम होती हैं कि आयोग उनकी परवाह नहीं करता। लघु उद्योग भारती के प्रांतीय अध्यक्ष गोविंदराम मित्तल का कहना है कि वे हर बार आपत्ति दर्ज कराते हैं, लेकिन आयोग अपना फैसला बिजली कंपनियों के पक्ष में देता है। हाड़ौती कोटा स्टोन इंडस्ट्रीज के संस्थापक अध्यक्ष राजेश गुप्ता ने बताया कि बिजली की दरें बढ़ाने से पहले आयोग समाचार पत्रों में विज्ञापन देकर आपत्ति एवं सुझाव मांगता है। परन्तु जानकारी के अभाव में आम उपभोक्ता आयोग पर ही छोड़ देते हैं। कोटा व्यापार महासंघ के महासचिव अशोक माहेश्वरी का कहना है कि वे हर बार आपत्ति दर्ज कराते हैं, लेकिन आयोग जनता की शिकायत एवं सुझावों को दरकिनार कर दरें बढ़ाने की छूट देता है।
उपभोक्ताओं पर पड़ता है खर्चों एवं छीजत का भार
आरईआरसी से रिटायर्ड अधिकारियों का कहना है कि बिजली कंपनियां अपने खर्चे बढ़ाकर पेश करती हैं। इसके साथ ही महंगे रेट पर बिजली खरीदती हैं। बिजली चोरी एवं सिस्टम लॉस का भार भी आम जनता पर डालती हैं। आम लोगों को इस पर आपत्ति दर्ज करानी चाहिए।
20 फरवरी को महंगी हुई थी बिजली
इसी साल 20 फरवरी को ही बिजली टैरिफ में 16 से 20 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई थी। आरईआरसी ने घरेलू बिजली का रेट 85 पैसे प्रति यूनिट (औसत) तक महंगी करने की अनुमति दी थी। नई टैरिफ एक फरवरी 2015 से ही लागू की गई थी।
ज्यादा आपत्तियां और सुझाव दें तो कम से कम बढ़ेगी बिजली टैरिफ
आरएसईबी से रिटायर्ड डिप्टी चीफ इंजीनियर बालमुकंद सनाढ्य का कहना है कि वितरण कंपनियों की ओर से मनमाने ढंग से लेखा-जोखा पेश कर हर बार बिजली का रेट बढ़ाने के लिए आरईआरसी में याचिका लगाई जाती हैं। आरईआरसी की ओर से उपभोक्ताओं से आपत्ति -सुझाव भी मांगे जाते हैं। लोग याचिका पर आपत्ति नहीं करते हैं। वहीं आरएसईबी से रिटायर्ड कॉमर्शियल ऑफिसर जीएल शर्मा का मानना है कि ज्यादा से ज्यादा लोग व संस्थाएं आंकड़ों व तथ्यों के साथ अपनी आपत्ति व सुझाव दे तो आरईआरसी उन पर सुनवाई करे। इससे रेट में बढ़ोत्तरी भी कम होगी, आम जनता को बड़ी राहत मिल सकती हैं।
आम उपभोक्ता ऐसे दे सकते हैं आपत्ति
बिजली दरें बढ़ाने की याचिका के बारे में आपत्ति, सुझाव, टिप्पणी भेजने के लिए लोग संस्था, संगठन, एनजीओ, राजनीति पार्टियां, यूनियन सहायक प्रपत्रों और आरईआरसी के सहकार मार्ग, जयपुर स्थित कार्यालय पर छह प्रतियों में भेज सकते हैं। इसके साथ ही ई मेल आईडी rerejpr@yahoo.co.in पर भी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं।
टैरिफ बढ़ाने के लिए कंपनियों की दलील
1. आय के मुकाबले ज्यादा खर्चा हो रहा है।
2. बिजली छीजत रोकने के लिए सुधार पर खर्च।
3. कंपनियों को लोन व ब्याज भी चुकाना है।
घाटा बढ़ने के वास्तविक कारण
1. पावर ट्रेडिंग के जरिए पिछले 5 साल में महंगे रेट पर बिजली खरीदना।
2. मटेरियल की खरीद व टेंडरों में गड़बड़झाला। स्क्रैप की नीलामी में घपला।
3. बिजली की छीजत कम नहीं होना। सरकार सब्सिडी समय पर नहीं देती है।
बढ़ी हुई टैरिफ से होगी 1245 करोड़ रुपए की ज्यादा आय
मौजूदा टैरिफ
बिजली कंपनियों को हर वर्ष 12 हजार 191 करोड़ रुपए की इनकम होती है।
प्रस्तावित टैरिफ
याचिका लागू होने के बाद 13 हजार 436 करोड़ रुपए की इनकम होने लगेगी।
आय : बिजली कंपनियों को हर साल 1245 करोड़ रुपए की ज्यादा आय होगी। इससे हर साल होने वाले 3 हजार 330 करोड़ के राजस्व घाटा कम होकर 2 हजार 85 करोड़ रुपए ही रह जाएगा।
कम लोग ही दर्ज कराते हैं आपत्ति
शहर के व्यापारिक एवं औद्योगिक संगठनों ने जब भास्कर ने यह जाना कि दरें बढ़ाने के पहले आपत्तियां दर्ज भी होती हैं या नहीं, तो उनका कहना था कि वे हर बार आपत्ति दर्ज कराते हैं। लेकिन, आपत्तियां इतनी कम होती हैं कि आयोग उनकी परवाह नहीं करता। लघु उद्योग भारती के प्रांतीय अध्यक्ष गोविंदराम मित्तल का कहना है कि वे हर बार आपत्ति दर्ज कराते हैं, लेकिन आयोग अपना फैसला बिजली कंपनियों के पक्ष में देता है। हाड़ौती कोटा स्टोन इंडस्ट्रीज के संस्थापक अध्यक्ष राजेश गुप्ता ने बताया कि बिजली की दरें बढ़ाने से पहले आयोग समाचार पत्रों में विज्ञापन देकर आपत्ति एवं सुझाव मांगता है। परन्तु जानकारी के अभाव में आम उपभोक्ता आयोग पर ही छोड़ देते हैं। कोटा व्यापार महासंघ के महासचिव अशोक माहेश्वरी का कहना है कि वे हर बार आपत्ति दर्ज कराते हैं, लेकिन आयोग जनता की शिकायत एवं सुझावों को दरकिनार कर दरें बढ़ाने की छूट देता है।
Job
Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai