केंद्र ने रेटिंग के लायक ही नहीं समझा कोटा जिले की 13 में से 10 सीएचसी को

केंद्र ने रेटिंग के लायक ही नहीं समझा कोटा जिले की 13 में से 10 सीएचसी को

केंद्र ने रेटिंग के लायक ही नहीं समझा कोटा जिले की 13 में से 10 सीएचसी को

ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में कोटा जिले की स्थिति प्रदेश के डूंगरपुर और बांसवाड़ा जैसे आदिवासी बहुल जिलों से भी बदतर है। हालत ये है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने जिले के 13 में से 10 सीएचसी को रेटिंग के लायक भी नहीं माना है।
हैल्थ मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम (एचएमआईएस ) के तहत हाल में जारी देशभर की सीएचसी की रेटिंग में कोटा जिले को लेकर यह कड़वा सच सामने आया है। जिले से सिर्फ 3 सीएचसी रेटिंग में शामिल हैं। इनमें भी 2 शहरी क्षेत्र की हैं। ग्रामीण क्षेत्र से केवल मोड़क सीएचसी ही इस लायक है कि उसे मानकों की कसौटी पर मापा जा सकता है। इन तीनों में एक भी सीएचसी को फाइव स्टार रेटिंग नहीं मिली। वहीं, कोटा से ज्यादा दुर्गम व आदिवासी बहुल बांसवाड़ा जैसे जिले में 2 सीएचसी फाइव स्टार व डूंगरपुर में 2 सीएचसी फोर स्टार हैं।

मोड़क सीएचसी को फोर स्टार
यह रेटिंग अप्रैल से अक्टूबर, 2015 के बीच सीएचसी पर हुए कामकाज के आधार पर दी गई है, जिसकी रिपोर्ट जनवरी में जारी हुई है। एचएमआईएस पोर्टल समय-समय पूरे देश की सीएचसी की स्टार रेटिंग जारी करता है। इसमें कोटा जिले की सीएचसी की स्थिति यह रही -
- टू स्टार - भीमगंजमंडी
- थ्री स्टार - दादाबाड़ी
- फोर स्टार - मोड़क
और ये सीएचसी कहीं ठहरते ही नहीं: चेचट, रामगंजमंडी, सुकेत, इटावा, खातौली, कैथून, मंडाना, कनवास, सांगोद और सुल्तानपुर।
जिन कसौटियों पर होती है परख उनमें जीरो
डॉक्टर और विशेषज्ञ, नर्सिंग स्टाफ, एएनएम, लैब टेक्नीशियन, पुरुषों और महिलाओं के टॉयलेट, ऑपरेशन थियेटर, जनरेटर, दवा, वैक्सीन व गर्भनिरोधक साधनों की उपलब्धता के आधार पर सीएचसी को परखा जाता है। वहीं, नॉर्मल व सीजेरियन डिलिवरी की सुविधा, न्यू बॉर्न इमरजेंसी केयर, आवश्यक जांचें, शिकायत बॉक्स, रोगी कल्याण समितियां गठित होना, ओपीडी, इनडोर, रात में भर्ती रहने वाले रोगियों के आंकड़े भी देखे जातें हैं। इसी आधार पर रेटिंग दी जाती है। इससे जुड़ी सूचनाओं के लिए स्थायी रूप से एचएमआईएस ऑनलाइन पोर्टल बना हुआ है।

कोटा सीएमएचओ डॉक्टर आरएन यादव ने बताया कि जब यह रेटिंग हुई थी, उसके बाद काफी बदलाव हुआ है। जहां तक मैं समझ पा रहा हूं, इसमें सूचनाएं अपडेट नहीं हुईं। मैंने भी यह रिपोर्ट देखी है। अब डीपीएम और डीएलओ को कहा है कि वे नए सिरे से सूचनाएं अपडेट करें। यह बात सही है कि ग्रामीण क्षेत्र में सीजेरियन सुविधाओं का अभाव है। इसके लिए प्रयासरत हैं। रामगंजमंडी में जल्द ही सीजेरियन चालू हो जाएंगे। सबसे बड़ी समस्या विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है।

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2 Comments

  1. Visitor Photo
    By : Amritlal

    Job

  2. Visitor Photo
    By : Devesh

    Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai

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