एमबीएस अस्पताल के न्यूरो सर्जरी विभाग में एक 12 वर्षीय बालिका का जटिल ऑपरेशन किया गया। उसके सर्वाइकल स्पाइन में ट्यूमर था जिससे उसके दोनों हाथ व पैर लकवे का शिकार हो चुके थे। अब उसकी हालत में सुधार है।
न्यूरो सर्जन डॉ. एसएन गौतम ने बताया कि बूंदी की बालिका खुशी के हाथ-पैरों में कमजोरी की शिकायत लेकर परिजन दिखाने आए थे। एमआरआई कराने पर सर्वाइकल स्पाइन में ट्यूमर का पता चला। बालिका के ऑपरेशन में एनीस्थिसिया विभाग के हेड व सीनियर प्रोफेसर डॉ. एससी दुलारा खुद अपनी टीम के साथ मौजूद रहे। करीब चार घंटे चली सर्जरी के बाद ट्यूमर निकाला गया।
पिछले दिनों भी मांगी बाई नाम की एक वृद्धा ऐसी ही समस्या के साथ आई थी, जिसकी सर्जरी कर ट्यूमर निकाला गया था। दोनों रोगियों में ऑपरेशन के बाद काफी सुधार है। मांगी बाई डिस्चार्ज हो चुकी हैं, जबकि खुशी भर्ती है। उसके हाथ-पैरों में अब ताकत दिख रही है।
कितना मुश्किल थी सर्जरी
सर्वाइकल स्पाइन बेहद संवेदनशील जगह होती है। यहां से श्वसन तंत्र काफी नजदीक होता है और उस पर सर्जरी के दुष्प्रभाव पड़ने का खतरा रहता है। यदि जरा भी असावधानी हो जाए तो रोगी को बचाना मुश्किल हो सकता है।
भामाशाह योजना में 2 ऑपरेशन
रामपुरा जिला चिकित्सालय में भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत दो नेत्र ऑपरेशन किए गए। जिले में इस योजना के तहत ये पहला ऑपरेशन है। नेत्र सर्जन डॉ. वारिस हुसैन व डॉ. विनीत चौधरी ने बताया कि सत्यनारायण का लेंस प्रत्यारोपण किया गया व ललित की दाईं आंख से नाखुना को ऑटोग्राफ तकनीक से निकाला गया।
न्यूरो सर्जन डॉ. एसएन गौतम ने बताया कि बूंदी की बालिका खुशी के हाथ-पैरों में कमजोरी की शिकायत लेकर परिजन दिखाने आए थे। एमआरआई कराने पर सर्वाइकल स्पाइन में ट्यूमर का पता चला। बालिका के ऑपरेशन में एनीस्थिसिया विभाग के हेड व सीनियर प्रोफेसर डॉ. एससी दुलारा खुद अपनी टीम के साथ मौजूद रहे। करीब चार घंटे चली सर्जरी के बाद ट्यूमर निकाला गया।
पिछले दिनों भी मांगी बाई नाम की एक वृद्धा ऐसी ही समस्या के साथ आई थी, जिसकी सर्जरी कर ट्यूमर निकाला गया था। दोनों रोगियों में ऑपरेशन के बाद काफी सुधार है। मांगी बाई डिस्चार्ज हो चुकी हैं, जबकि खुशी भर्ती है। उसके हाथ-पैरों में अब ताकत दिख रही है।
कितना मुश्किल थी सर्जरी
सर्वाइकल स्पाइन बेहद संवेदनशील जगह होती है। यहां से श्वसन तंत्र काफी नजदीक होता है और उस पर सर्जरी के दुष्प्रभाव पड़ने का खतरा रहता है। यदि जरा भी असावधानी हो जाए तो रोगी को बचाना मुश्किल हो सकता है।
भामाशाह योजना में 2 ऑपरेशन
रामपुरा जिला चिकित्सालय में भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत दो नेत्र ऑपरेशन किए गए। जिले में इस योजना के तहत ये पहला ऑपरेशन है। नेत्र सर्जन डॉ. वारिस हुसैन व डॉ. विनीत चौधरी ने बताया कि सत्यनारायण का लेंस प्रत्यारोपण किया गया व ललित की दाईं आंख से नाखुना को ऑटोग्राफ तकनीक से निकाला गया।
Job
Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai