ये हालत तब है जब नए अस्पताल में 10 ओटी बनने के बाद से ही बंद पड़े हैं। यहां केवल 6 ओटी ही चल रहे हैं। विशेषज्ञ सर्जनों की भी कोई कमी नहीं है। दोनों विभागों के सर्जनों ने ऑपरेशन के दिन बढ़ाने के लिए अस्पताल प्रशासन को लिखकर भी दे दिया है। हालांकि अधीक्षक का कहना है कि जब तक निश्चेतना विशेषज्ञ की नियुक्ति नहीं होगी ऐसा हो ही नहीं हो सकता।
समस्या क्या: हफ्ते में केवल 2 दिन ही होते हैं ऑपरेशन
प्लास्टिक सर्जरी विभाग में मंगलवार व शनिवार तथा शिशु सर्जरी विभाग में सोमवार व गुरुवार को सर्जरी होती है। इन दिनों में प्लास्टिक सर्जरी विभाग जहां एक सप्ताह में 5 से 6 सर्जरी कर पाता है, वहीं शिशु सर्जरी विभाग 8 से 10 सर्जरी कर रहा है। जबकि हर सप्ताह इससे दोगुने नए रोगी उनके पास ऑपरेशन के लिए आ रहे हैं। दोनों विभाग ओटी डे 2 से बढ़ाकर 4 करना चाहते हैं।
और समाधान ये: 1 ओटी भी चालू कर दें तो दोगुने होंगे ऑपरेशन
अस्पताल में बंद पड़े 10 ओटी में से 1 ओटी भी चालू कर दिया जाए तो इन दोनों विभागों में आने वाले रोगियों को बड़ी राहत मिल सकती है। एक ओटी दोनों विभागों को 2-2 दिन के लिए आवंटित किया जा सकता है। इससे सर्जरी की संख्या दोगुनी हो जाएगी और लंबी वेटिंग की वजह से प्राइवेट हॉस्पिटल में जाने के लिए मजबूर रोगी सरकारी अस्पताल में ही सर्जरी करा पाएंगे।
प्लास्टिक सर्जन डॉक्टर रितेश जैन ने बताया कि ऐसे भी रोगी आते हैं, जिनके पास जयपुर जाने का किराया भी नहीं होता। जब उन्हें 5 से 6 माह बाद की डेट देते हैं तो वे सोचते हैं कि हम यहां इलाज नहीं करना चाहते, प्राइवेट में बुलाना चाहते हैं। इसलिए मैंने डिमांड की है कि ओटी डे 4 कर दिए जाएं।
शिशु सर्जरी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर संजय जैन ने बताया कि हम हर हफ्ते एक ही टेबल पर 10 सर्जरी कर पाते हैं, जबकि 30 नए केस आते हैं। इनमें से आधे प्राइवेट में चले जाते हैं। इमरजेंसी के लिए भी हमें ओटी तब मिलता है, जब खाली होता है।
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Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai