सालाना 10 लाख से अधिक कमाने वाले एलपीजी उपभोक्ताओं को सब्सिडी न देने के केन्द्र सरकार के फैसले से संभाग में 4338 उपभोक्ता प्रभावित होंगे। यह फैसला हालांकि जनवरी से लागू होने से जा रहा है। इससे सरकार को साल भर में करीब 1 करोड़ रुपए सब्सिडी बचेगी।
आयकर विभाग से प्राप्त ताजा आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में कोटा संभाग में व्यक्तिगत सालाना 10 लाख से अधिक आय वाले 4338 उपभोक्ता हैं। सरकार के निर्देश के मुताबिक इन उपभोक्ताओं को अब बाजार दर से गैस सिलेंडर मिलेगा।
वर्तमान में घरेलू सिलेंडर की बाजार दर 613 रुपए है। इस पर उपभोक्ताओं को 183.18 रुपए प्रति सिलेंडर सब्सिडी दी जा रही है, जो सीधे बैंक खाते में जमा होती है। प्रति उपभोक्ता सालाना 12 सिलेंडर के आधार पर 95.35 लाख (करीब एक करोड़) रुपए सब्सिडी के होते हैं। इसमें वह आंकड़े शामिल नहीं हैं, जो पहले ही सब्सिडी सरेंडर कर चुके हैं।
लेकिन दिक्कत ये... गैस कंपनियों के पास नहीं आय का आंकड़ा
गैस कंपनियों के पास इस तरह का कोई आंकड़ा नहीं है कि किस उपभोक्ता की कितनी आय है। जिसके आधार पर उसकी सब्सिडी रोकी जाए। न ही इस संबंध में गैस एजेंसियों के पास कोई गाइड लाइन है।
हाड़ौती एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर एसोसिएशन के सचिव अरविंद गुप्ता का कहना है कि अभी तक किसी भी ग्राहक की आय का रिकॉर्ड एजेंसियों ने नहीं मांगा है। यदि किसी से आयकर रिटर्न की प्रति मांगी तो शायद ही ग्राहक उन्हें देगा।
वहीं, इंडेन के डिप्टी सेल्स ऑफिसर धीरज चौऋषिया ने बताया कि अभी तक किसी उपभोक्ता की आय का निर्धारण करने के बारे में उच्चाधिकारियों से कोई निर्देश नहीं मिले हैं, जिसके आधार पर यह तय हो सके कि अमुक उपभोक्ता की आय 10 लाख रुपए से अधिक है। इसलिए उसकी सब्सिडी रोकी जाए।
गाइड लाइन का इंतजार
गैस कंपनियों का कहना है कि साल समाप्त होने में दो दिन बचे हैं। अब सरकार से कोई गाइडलाइन मिलने का इंतजार है।
आयकर विभाग से प्राप्त ताजा आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में कोटा संभाग में व्यक्तिगत सालाना 10 लाख से अधिक आय वाले 4338 उपभोक्ता हैं। सरकार के निर्देश के मुताबिक इन उपभोक्ताओं को अब बाजार दर से गैस सिलेंडर मिलेगा।
वर्तमान में घरेलू सिलेंडर की बाजार दर 613 रुपए है। इस पर उपभोक्ताओं को 183.18 रुपए प्रति सिलेंडर सब्सिडी दी जा रही है, जो सीधे बैंक खाते में जमा होती है। प्रति उपभोक्ता सालाना 12 सिलेंडर के आधार पर 95.35 लाख (करीब एक करोड़) रुपए सब्सिडी के होते हैं। इसमें वह आंकड़े शामिल नहीं हैं, जो पहले ही सब्सिडी सरेंडर कर चुके हैं।
लेकिन दिक्कत ये... गैस कंपनियों के पास नहीं आय का आंकड़ा
गैस कंपनियों के पास इस तरह का कोई आंकड़ा नहीं है कि किस उपभोक्ता की कितनी आय है। जिसके आधार पर उसकी सब्सिडी रोकी जाए। न ही इस संबंध में गैस एजेंसियों के पास कोई गाइड लाइन है।
हाड़ौती एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर एसोसिएशन के सचिव अरविंद गुप्ता का कहना है कि अभी तक किसी भी ग्राहक की आय का रिकॉर्ड एजेंसियों ने नहीं मांगा है। यदि किसी से आयकर रिटर्न की प्रति मांगी तो शायद ही ग्राहक उन्हें देगा।
वहीं, इंडेन के डिप्टी सेल्स ऑफिसर धीरज चौऋषिया ने बताया कि अभी तक किसी उपभोक्ता की आय का निर्धारण करने के बारे में उच्चाधिकारियों से कोई निर्देश नहीं मिले हैं, जिसके आधार पर यह तय हो सके कि अमुक उपभोक्ता की आय 10 लाख रुपए से अधिक है। इसलिए उसकी सब्सिडी रोकी जाए।
गाइड लाइन का इंतजार
गैस कंपनियों का कहना है कि साल समाप्त होने में दो दिन बचे हैं। अब सरकार से कोई गाइडलाइन मिलने का इंतजार है।
Job
Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai