मेडिकल कॉलेज के बायोकेमेस्ट्री विभाग में संविदा पर तैनात सहायक आचार्य डॉ. नीलम खंडेलवाल ने विभागाध्यक्ष डॉ. गुलाब कंवर पर मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया है। साथ ही इस मामले में मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. गिरीश वर्मा, महिला आयोग, लोकायुक्त, मानवाधिकार को भी लिखित में शिकायत की है। मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. वर्मा ने इस मामले में तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है।
क्यों रो पड़ी सहायक आचार्य
सहायक आचार्य डॉ. नीलम खंडेलवाल ने शुक्रवार को पत्रकार वार्ता में रुंधे गले से कहा कि मैं बीते साढ़े पांच साल से विभागाध्यक्ष डॉ. गुलाब कंवर की प्रताड़ना झेल रही हूं। जिल्लत बर्दाश्तगी की हद हो चुकी है, अब मुझे न्याय मिलना ही चाहिए। उनका आरोप है कि 2010 में जब वह पीजी करने मेडिकल कॉलेज आई थी, तभी से डॉ. गुलाब कंवर की प्रताड़ना झेल रही हैं। कभी उन्होंने मुझे पीजी की प्रायोगिक परीक्षा तक से वंचित किया। बाद में अब एकेडमिक टीचिंग काम तक नहीं करने दिया जा रहा है। जबकि उनसे जूनियर डॉक्टर्स टीचिंग कर रहे हैं।
तीन सदस्यीय कमेटी करेगी जांच : मेडिकल कॉलेज की दो महिला डॉक्टरों के विवाद के मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। इसके चेयरमैन डॉ. एसआर मीणा होंगे। कमेटी में डॉ. सुरेश दुलारा व डॉ. राकेश शर्मा को शामिल किया गया है। -डॉ. गिरीश वर्मा, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
डॉ. शेखावत पर अभद्रता का आरोप
डॉ. खंडेलवाल ने मेडिकल कॉलेज के पीजी रेजीडेंट क्षेत्रपाल शेखावत पर अभद्रता का आरोप लगाया। उन्होंने महावीरनगर थाने पर शुक्रवार को शिकायत भी दी। उन्होंने आरोप लगाया कि 28 अप्रैल को जब मैं विभाग की प्रयोगशाला का दैनिक अवलोकन करने पहुंची तो वहां डॉ. गुलाब कंवर के उकसाने पर पीजी रेजीडेंट डॉ. क्षेत्रपाल शेखावत ने मेरे साथ अभद्रता की। मेरा पर्स टेबल से उठाकर बाहर फेंक दिया
पीजी रेजीडेंट डॉ क्षेत्रपाल शेखावत ने कहा है कि बायोकेमेस्ट्री लैब में डॉ. नीलम खंडेलवाल की ड्यूटी नहीं हैं। वे बीते तीन-चार दिन से लगातार लैब में आ रही थी और मेरी सीट पर बैठ जाती थी, ऐसे में मुझे पढ़ाई में परेशानी होती थी। मैं उनके सामने एतराज दर्ज करवा चुका था। विभागाध्यक्ष डॉ. गुलाब कंवर को भी लिखित में दे चुका था। मुझ पर जो आरोप लगाए गए हैं वे तथ्यहीन है।
ये है आरोप
डॉ. खंडेलवाल ने आरोप लगाया कि 2010 में पीजी करने आई तो डॉ. कंवर ने डॉ. प्रवीण शर्मा की गाइडेंस में पीजी करने से मना किया। 2011 में उनके चरित्र पर अशोभनीय टिप्पणी की। 2013 में पीजी पास नहीं करने की धमकी दी। प्रायोगिक परीक्षा में डॉ. नीलम के उपस्थित होने पर गैर हाजिर दर्ज कर दिया। 2015 में आरपीएससी से लिखित परीक्षा में चयन हुआ। इसके बाद अनुभव प्राप्त करने के लिए सहायक आचार्य के पद के साक्षात्कार के लिए कोटा मेडिकल कॉलेज गईं तो डॉ. गुलाब ने शून्य नंबर देकर अयोग्य घोषित करना चाहा। हालांकि आपत्ति करने पर प्रिंसिपल ने डॉ. नीलम के पक्ष में सरकार को रिपोर्ट भेजी।
आरोपी ने क्या कहा
बॉयोकेमेस्ट्री के विभागाध्यक्ष डॉ गुलाब कंवर ने कहा है कि मैं पहले ही मेडिकल कॉलेज प्राचार्य को डॉ. नीलम की कारगुजारियों से परेशान डॉक्टर, पीजी रेजीडेंट और लैब में कार्यरत कर्मचारियों की रिपोर्ट दे चुकी हूं। मैंने कभी डॉ. नीलम खंडेलवाल को प्रताड़ित नहीं किया। उनके आरोप निराधार है।
क्यों रो पड़ी सहायक आचार्य
सहायक आचार्य डॉ. नीलम खंडेलवाल ने शुक्रवार को पत्रकार वार्ता में रुंधे गले से कहा कि मैं बीते साढ़े पांच साल से विभागाध्यक्ष डॉ. गुलाब कंवर की प्रताड़ना झेल रही हूं। जिल्लत बर्दाश्तगी की हद हो चुकी है, अब मुझे न्याय मिलना ही चाहिए। उनका आरोप है कि 2010 में जब वह पीजी करने मेडिकल कॉलेज आई थी, तभी से डॉ. गुलाब कंवर की प्रताड़ना झेल रही हैं। कभी उन्होंने मुझे पीजी की प्रायोगिक परीक्षा तक से वंचित किया। बाद में अब एकेडमिक टीचिंग काम तक नहीं करने दिया जा रहा है। जबकि उनसे जूनियर डॉक्टर्स टीचिंग कर रहे हैं।
तीन सदस्यीय कमेटी करेगी जांच : मेडिकल कॉलेज की दो महिला डॉक्टरों के विवाद के मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। इसके चेयरमैन डॉ. एसआर मीणा होंगे। कमेटी में डॉ. सुरेश दुलारा व डॉ. राकेश शर्मा को शामिल किया गया है। -डॉ. गिरीश वर्मा, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
डॉ. शेखावत पर अभद्रता का आरोप
डॉ. खंडेलवाल ने मेडिकल कॉलेज के पीजी रेजीडेंट क्षेत्रपाल शेखावत पर अभद्रता का आरोप लगाया। उन्होंने महावीरनगर थाने पर शुक्रवार को शिकायत भी दी। उन्होंने आरोप लगाया कि 28 अप्रैल को जब मैं विभाग की प्रयोगशाला का दैनिक अवलोकन करने पहुंची तो वहां डॉ. गुलाब कंवर के उकसाने पर पीजी रेजीडेंट डॉ. क्षेत्रपाल शेखावत ने मेरे साथ अभद्रता की। मेरा पर्स टेबल से उठाकर बाहर फेंक दिया
पीजी रेजीडेंट डॉ क्षेत्रपाल शेखावत ने कहा है कि बायोकेमेस्ट्री लैब में डॉ. नीलम खंडेलवाल की ड्यूटी नहीं हैं। वे बीते तीन-चार दिन से लगातार लैब में आ रही थी और मेरी सीट पर बैठ जाती थी, ऐसे में मुझे पढ़ाई में परेशानी होती थी। मैं उनके सामने एतराज दर्ज करवा चुका था। विभागाध्यक्ष डॉ. गुलाब कंवर को भी लिखित में दे चुका था। मुझ पर जो आरोप लगाए गए हैं वे तथ्यहीन है।
ये है आरोप
डॉ. खंडेलवाल ने आरोप लगाया कि 2010 में पीजी करने आई तो डॉ. कंवर ने डॉ. प्रवीण शर्मा की गाइडेंस में पीजी करने से मना किया। 2011 में उनके चरित्र पर अशोभनीय टिप्पणी की। 2013 में पीजी पास नहीं करने की धमकी दी। प्रायोगिक परीक्षा में डॉ. नीलम के उपस्थित होने पर गैर हाजिर दर्ज कर दिया। 2015 में आरपीएससी से लिखित परीक्षा में चयन हुआ। इसके बाद अनुभव प्राप्त करने के लिए सहायक आचार्य के पद के साक्षात्कार के लिए कोटा मेडिकल कॉलेज गईं तो डॉ. गुलाब ने शून्य नंबर देकर अयोग्य घोषित करना चाहा। हालांकि आपत्ति करने पर प्रिंसिपल ने डॉ. नीलम के पक्ष में सरकार को रिपोर्ट भेजी।
आरोपी ने क्या कहा
बॉयोकेमेस्ट्री के विभागाध्यक्ष डॉ गुलाब कंवर ने कहा है कि मैं पहले ही मेडिकल कॉलेज प्राचार्य को डॉ. नीलम की कारगुजारियों से परेशान डॉक्टर, पीजी रेजीडेंट और लैब में कार्यरत कर्मचारियों की रिपोर्ट दे चुकी हूं। मैंने कभी डॉ. नीलम खंडेलवाल को प्रताड़ित नहीं किया। उनके आरोप निराधार है।
Job
Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai