गैंगस्टर आनंदपाल के बेहद खास गुर्गे झालावाड़ निवासी सुरेश पाटीदार (मेहर) को एसओजी ने कोटा से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस पर फायरिंग करने से लेकर आनंदपाल की फरारी की साजिश में इसका अहम रोल था। सुरेश झालरापाटन के बोरदा ग्राम पंचायत की सरपंच गुड्डी बाई का पति है।
आनंदपाल के करता था काम
यह आनंदपाल के लिए पिछले दस साल से काम कर रहा है। एसओजी डीएसपी गोविंद सिंह ने बताया कि बुधवार को एटीएस से इनपुट मिला था कि आनंदपाल का गुर्गा बीकानेर से किराए की कार से झालरापाटन जा रहा है। इनपुट पर उसे एसओजी ने कोटा स्थित बड़गांव पुलिस चौकी के पास धर दबोचा। गुरुवार को सुरेश को परबतसर (नागौर) कोर्ट में पेश किया गया। जहां से उसे सात दिन के रिमांड पर लिया गया है। सूत्रों के मुताबिक आनंदपाल को बीकानेर में अवैध हथियारों की सप्लाई करने के लिए सुरेश गया था और उससे मिलकर आ रहा था।
2008 में भागा थ जेल से
टीएस एडीजी आलाेक त्रिपाठी ने बताया कि सुरेश 2008 में एमपी की राजगढ़ जेल से भाग गया था। 2012 में कोटा एसओजी ने सुरेश को अवैध हथियारों के साथ गिरफ्तार किया था। आरोपी आनंदपाल के लिए मध्यप्रदेश से अमेरिकन राइफल ला रहा था। आरोपी के खिलाफ नागौर, बूंदी और मध्यप्रदेश में एनडीपीएस के कई प्रकरण दर्ज हैं। सुरेश के यूपी और मध्यप्रदेश के हथियार तस्करों से संपर्क हैं। वो 10 साल से आनंदपाल के इशारे पर उसकी गैंग के सदस्यों के लिए हथियार लेकर आता था और आपराधिक वारदातों के लिए उन्हें हथियार उपलब्ध कराता था।
केसर सिंह व कमांडो के साथ मिलकर रची साजिश
सूत्रों ने बताया कि सुरेश ने आनंदपाल को भगाने के लिए अजमेर निवासी केसर सिंह और कमांडो शक्ति सिंह व सुनील के साथ मिलकर साजिश रची थी। इसके बाद सितंबर 2015 में जब आनंदपाल को नागौर लाडनूं पेशी पर लाया गया तो सुरेश अपने साथियों के साथ कार से रैकी कर रहा था। जब आनंदपाल को पेशी से वापस अजमेर लाया जा रहा था तो उसने योजना के अनुसार परबतसर के पास पुलिस की गाड़ी के सामने गाड़ी लगा दी और फायरिंग करने लगे। इस दौरान आनंदपाल भी पुलिस की गाड़ी से नीचे उतर गया और कमांडो शक्ति सिंह की एके-47 लेकर पुलिसकर्मियों पर फायरिंग करने लगा और सुरेश के साथ कार में बैठकर फरार हो गया। पूछताछ में सामने आया कि फरारी के बाद आनंदपाल व सुरेश ने यूपी, हरियाणा, नागौर व बीकानेर में अपने परिचितों के ठिकानों पर फरारी काटी। सूत्रों के मुताबिक 24 अप्रैल को गिरफ्तार हुए आनंदपाल के दो गुर्गों विजय मांडिया और इमरान ने पुलिस पूछताछ में सुरेश का जिक्र किया था।
आनंदपाल के करता था काम
यह आनंदपाल के लिए पिछले दस साल से काम कर रहा है। एसओजी डीएसपी गोविंद सिंह ने बताया कि बुधवार को एटीएस से इनपुट मिला था कि आनंदपाल का गुर्गा बीकानेर से किराए की कार से झालरापाटन जा रहा है। इनपुट पर उसे एसओजी ने कोटा स्थित बड़गांव पुलिस चौकी के पास धर दबोचा। गुरुवार को सुरेश को परबतसर (नागौर) कोर्ट में पेश किया गया। जहां से उसे सात दिन के रिमांड पर लिया गया है। सूत्रों के मुताबिक आनंदपाल को बीकानेर में अवैध हथियारों की सप्लाई करने के लिए सुरेश गया था और उससे मिलकर आ रहा था।
2008 में भागा थ जेल से
टीएस एडीजी आलाेक त्रिपाठी ने बताया कि सुरेश 2008 में एमपी की राजगढ़ जेल से भाग गया था। 2012 में कोटा एसओजी ने सुरेश को अवैध हथियारों के साथ गिरफ्तार किया था। आरोपी आनंदपाल के लिए मध्यप्रदेश से अमेरिकन राइफल ला रहा था। आरोपी के खिलाफ नागौर, बूंदी और मध्यप्रदेश में एनडीपीएस के कई प्रकरण दर्ज हैं। सुरेश के यूपी और मध्यप्रदेश के हथियार तस्करों से संपर्क हैं। वो 10 साल से आनंदपाल के इशारे पर उसकी गैंग के सदस्यों के लिए हथियार लेकर आता था और आपराधिक वारदातों के लिए उन्हें हथियार उपलब्ध कराता था।
केसर सिंह व कमांडो के साथ मिलकर रची साजिश
सूत्रों ने बताया कि सुरेश ने आनंदपाल को भगाने के लिए अजमेर निवासी केसर सिंह और कमांडो शक्ति सिंह व सुनील के साथ मिलकर साजिश रची थी। इसके बाद सितंबर 2015 में जब आनंदपाल को नागौर लाडनूं पेशी पर लाया गया तो सुरेश अपने साथियों के साथ कार से रैकी कर रहा था। जब आनंदपाल को पेशी से वापस अजमेर लाया जा रहा था तो उसने योजना के अनुसार परबतसर के पास पुलिस की गाड़ी के सामने गाड़ी लगा दी और फायरिंग करने लगे। इस दौरान आनंदपाल भी पुलिस की गाड़ी से नीचे उतर गया और कमांडो शक्ति सिंह की एके-47 लेकर पुलिसकर्मियों पर फायरिंग करने लगा और सुरेश के साथ कार में बैठकर फरार हो गया। पूछताछ में सामने आया कि फरारी के बाद आनंदपाल व सुरेश ने यूपी, हरियाणा, नागौर व बीकानेर में अपने परिचितों के ठिकानों पर फरारी काटी। सूत्रों के मुताबिक 24 अप्रैल को गिरफ्तार हुए आनंदपाल के दो गुर्गों विजय मांडिया और इमरान ने पुलिस पूछताछ में सुरेश का जिक्र किया था।
Sahi kaha